Business Idea: केले के पत्तों से भी चमक रहा किसानों का कारोबार, प्लेट बनाकर कमा रहे लाखों 

Business Idea: केले के पत्तों से भी चमक रहा किसानों का कारोबार, प्लेट बनाकर कमा रहे लाखों 

तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में केले के पत्तों से प्लेट और पैकिंग सामग्री तैयार की जाती हैं. ये प्लेट्स न सिर्फ धार्मिक अनुष्ठानों और पारंपरिक भोज में इस्तेमाल होती है बल्कि शादी-ब्याह और बड़े आयोजनों में भी खूब खरीदी जाती हैं. खास बात यह है कि केले के पत्तों से बनी प्लेट पूरी तरह बायोडिग्रेडेबल (जैविक रूप से नष्ट होने योग्य) होती है, इसलिए यह पर्यावरण के लिए भी बेहद उपयोगी है. 

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क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Sep 02, 2025,
  • Updated Sep 02, 2025, 1:49 PM IST

केला वैसे तो सेहत के लिए फायदेमंद फल माना जाता है, लेकिन इसका इस्तेमाल सिर्फ खाने तक ही सीमित नहीं है. आजकल केले के पत्तों से किसानों की किस्मत बदल रही है. दक्षिण भारत में इसकी बड़ी मांग है और यही वजह है कि केले की खेती करने वाले किसान अब इसके पत्तों से भी अच्छी-खासी कमाई कर रहे हैं. यहां के किसान केले के पत्तों से प्‍लेट बनाकर अच्‍छी खासी इनकम कमा रहे हैं. जहां पहले किसान केवल फलों की बिक्री तक सीमित थे, वहीं अब पत्तों से भी उनकी कमाई लाखों में हो रही है. इससे न सिर्फ किसानों की आमदनी बढ़ रही है बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है. 

प्लेट और पैकिंग में बढ़ रही मांग

तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में केले के पत्तों से प्लेट और पैकिंग सामग्री तैयार की जाती हैं. ये प्लेट्स न सिर्फ धार्मिक अनुष्ठानों और पारंपरिक भोज में इस्तेमाल होती है बल्कि शादी-ब्याह और बड़े आयोजनों में भी खूब खरीदी जाती हैं. खास बात यह है कि केले के पत्तों से बनी प्लेट पूरी तरह बायोडिग्रेडेबल (जैविक रूप से नष्ट होने योग्य) होती है, इसलिए यह पर्यावरण के लिए भी बेहद उपयोगी है. 

कीमत और कमाई

एक केले के पत्ते से औसतन चार प्लेट बनाई जाती हैं. बाजार में एक पत्ते की कीमत 30 से 50 रुपये तक मिल जाती है, जबकि प्लेट की क्वालिटी के हिसाब से यह 3 से 5 रुपये प्रति पीस बिक जाती है. देशी किस्म के केले के पत्तों की गुणवत्ता बेहतर होती है, ये जल्दी फटते नहीं और मजबूत भी होते हैं. यही वजह है कि किसान इनकी खेती पर ज्‍यादा ध्यान दे रहे हैं. आजकल विदेशों में भी प्राकृतिक और इको-फ्रेंडली प्लेटों की मांग बढ़ रही है. यूरोप और अमेरिका के कई देशों में प्लास्टिक पर बैन लगाया जा रहा है. ऐसे में केले के पत्तों से बनी प्लेटें भविष्य में बड़े पैमाने पर निर्यात की जा सकती हैं. इससे किसानों और उद्यमियों दोनों के लिए आय के नए रास्ते खुलेंगे. 

सरकार से मिल रहा सहारा

केले के पत्तों की सफाई और कटाई के बाद इन्हें मशीन से अलग-अलग आकार में काटकर प्लेट बनाई जाती है. कुछ जगहों पर मशीनरी की मदद से इन प्लेटों को और मजबूत करने के लिए हीटिंग प्रोसेस भी किया जाता है. इस काम में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं भी जुड़ी हैं, जिससे उन्हें रोजगार मिल रहा है. तमिलनाडु सरकार किसानों को इस व्यवसाय के लिए प्रोत्साहित कर रही है. राज्य में कृषि और संबंधित उद्योगों के लिए सब्सिडी योजनाएं चलाई जा रही हैं. अगर किसान केले के पत्तों से प्लेट बनाने की यूनिट लगाना चाहते हैं तो इसके लिए राज्य सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन कर सकते हैं.  इससे किसानों को उत्पादन लागत घटाने और मुनाफा बढ़ाने में मदद मिल रही है. 

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