IFFCO ने FY26 में रिकॉर्ड मुनाफा कमाकर रचा इतिहास, Nano Fertilizers की बिक्री में दिखी तेज बढ़त

IFFCO ने FY26 में रिकॉर्ड मुनाफा कमाकर रचा इतिहास, Nano Fertilizers की बिक्री में दिखी तेज बढ़त

IFFCO Profit: इफको ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड कर-पूर्व लाभ दर्ज करते हुए अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है. उत्पादन और बिक्री दोनों मोर्चों पर मजबूती दिखी, जबकि नैनो उर्वरकों की मांग में तेज बढ़त दर्ज की गई, जो कृषि में बदलाव के संकेत दे रही है.

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क‍िसान तक
  • Noida,
  • Apr 01, 2026,
  • Updated Apr 01, 2026, 8:17 PM IST

सहकारी क्षेत्र की अग्रणी उर्वरक संस्था भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (IFFCO) ने वित्त वर्ष 2025-26 में अपने अब तक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ नया रिकॉर्ड बनाया है. संस्था ने इस दौरान 4100 करोड़ रुपये से अधिक का कर-पूर्व लाभ (Profit Before Tax) अर्जित किया है. इफको का यह प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक स्तर पर उर्वरक क्षेत्र कई चुनौतियों से गुजर रहा है. इसके बावजूद संस्था ने उत्पादन, वितरण और नवाचार के मोर्चे पर संतुलित रणनीति अपनाकर किसानों तक आपूर्ति बनाए रखी.

उत्पादन में मजबूती के साथ सप्लाई स्थिर

वित्त वर्ष के दौरान इफको ने 90 लाख मीट्रिक टन से अधिक उर्वरकों का उत्पादन किया. इसमें यूरिया और जटिल उर्वरकों का बड़ा योगदान रहा. फूलपुर, आंवला और पारादीप इकाइयों ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए कुल उत्पादन को मजबूती दी. वहीं, लॉजिस्टिक्स और बंदरगाह संचालन में सुधार से सप्लाई चेन भी अधिक प्रभावी बनी.

बिक्री में भी दिखी तेज रफ्तार

इफको की कुल उर्वरक बिक्री 119 लाख मीट्रिक टन के करीब पहुंच गई, जो देशभर में इसकी मजबूत वितरण व्यवस्था को दर्शाती है. खास बात यह रही कि पारंपरिक उर्वरकों के साथ-साथ नैनो उर्वरकों की मांग में भी तेजी देखने को मिली.

नैनो उर्वरकों की बिक्री 301 लाख बोतलों के पार पहुंच गई, जिसमें नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की हिस्सेदारी प्रमुख रही. इसमें 221 लाख बोतल नैनो यूरिया प्लस लिक्विड और 64.89 लाख से अधिक बोतल नैनो डीएपी लिक्विड की शामिल रही. इसके अलावा नैनो जिंक और नैनो कॉपर जैसे नए उत्पादों ने भी बाजार में शुरुआती सफलता हासिल की. 

नैनो टेक्नोलॉजी से कृषि में बदलाव की कोशिश

इफको ने नैनो उर्वरकों और आधुनिक कृषि तकनीकों के जरिए खेती को अधिक टिकाऊ और लागत प्रभावी बनाने पर जोर दिया है. इन उत्पादों के इस्‍तेामल से जहां रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम हो रहा है, वहीं मृदा स्वास्थ्य और पोषक तत्वों की दक्षता बढ़ाने की कोशिश भी की जा रही है. IFFCO ने साफ किया कि उसका लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की आय में सुधार और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना है. इसके लिए संतुलित पोषण, वैज्ञानिक उपयोग और जागरूकता अभियानों पर लगातार काम किया जा रहा है. 

इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने कही ये बात

इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने कहा कि संस्था आने वाले वित्त वर्ष में सहकारिता, नवाचार और किसानों की उन्नति को केंद्र में रखकर आगे बढ़ेगी. उन्होंने किसानों से नैनो उर्वरकों को अपनाने की अपील भी की.  उन्‍होंने कहा, “जैसे ही हम वित्त वर्ष 2026–27 में प्रवेश कर रहे हैं, हमें सहकारिता आधारित समग्र विकास, नवाचार और किसानों की उन्नति के साझा संकल्प के साथ आगे बढ़ना है. हमारी प्रत्येक उपलब्धि केवल व्यावसायिक सफलता नहीं, बल्कि किसानों की बेहतर सेवा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. हम ‘सहकार से समृद्धि’ के अपने लक्ष्य को साकार कर रहे हैं.” उन्होंने किसानों से नैनो उर्वरकों को अपनाने तथा सहकारिता की शक्ति का लाभ उठाने का आह्वान भी किया.

उन्होंने आगे कहा की “मैं सभी कर्मचारियों एवं अधिकारियों से आह्वान करता हूं कि वे उत्साह एवं उद्देश्य के साथ निरंतर उत्कृष्टता की ओर अग्रसर रहें. सहकारिता के मूल्यों, विज्ञान की शक्ति और ‘सहकार से समृद्धि’ के मार्गदर्शन में हम सभी मिलकर प्रत्येक किसान और प्रत्येक सहकारी संस्था के लिए एक उज्ज्वल एवं समृद्ध भविष्य का निर्माण करें.”

MD के. जे. पटेल ने इफको परिवार को दी बधाई

वहीं, प्रबंध निदेशक के. जे. पटेल ने इस प्रदर्शन को इफको परिवार के सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया और कहा कि संयुक्त उपक्रमों ने भी बेहतर योगदान दिया है. उन्‍होंने कहा,
“मैं इफको परिवार के प्रत्येक सदस्य को पारंपरिक एवं नैनो उर्वरकों के उत्पादन एवं बिक्री में उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए हार्दिक बधाई देता हूं. वित्त वर्ष 2025–26 में हमारे संयुक्त उपक्रमों एवं सहयोगी संस्थाओं का उत्कृष्ट प्रदर्शन हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता, दृढ़ता और उत्कृष्टता की निरंतर खोज को दर्शाता है.” इफको अब अगले वित्त वर्ष में नवाचार के विस्तार, वैश्विक सहयोग और कृषि मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है. संस्था का फोकस आत्मनिर्भर कृषि और पर्यावरण के अनुकूल उत्पादन प्रणाली विकसित करने पर रहेगा.

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