घटती मांग के बीच सरकार ने घटाया चीनी कोटा, 7 महीनों में खपत में गिरावट

घटती मांग के बीच सरकार ने घटाया चीनी कोटा, 7 महीनों में खपत में गिरावट

भारत में चीनी की घटती मांग के चलते सरकार ने अप्रैल 2026 के लिए बिक्री कोटा घटाकर 23 लाख टन कर दिया है. सात महीनों में खपत में 3% की गिरावट दर्ज हुई है. नए नियमों और सख्ती के बीच चीनी मिलों को अब डिजिटल सिस्टम और सरकारी दिशानिर्देशों का पालन करना जरूरी होगा.

घटती मांग के बीच सरकार ने घटाया चीनी कोटाघटती मांग के बीच सरकार ने घटाया चीनी कोटा
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Apr 01, 2026,
  • Updated Apr 01, 2026, 9:09 AM IST

भारत में चीनी की मांग में हल्की गिरावट देखने को मिल रही है, जिसके चलते सरकार ने अप्रैल महीने के लिए घरेलू बाजार में चीनी की बिक्री का कोटा कम कर दिया है. यह फैसला चीनी उद्योग और किसानों दोनों के लिए महत्वपूर्ण संकेत देता है कि बाजार में खपत का रुख बदल रहा है.

अप्रैल में घटा चीनी आवंटन

सरकार ने अप्रैल 2026 के लिए 23 लाख टन चीनी बिक्री की अनुमति दी है, जो पिछले साल के 23.5 लाख टन से कम है. वहीं अप्रैल 2024 के 25 लाख टन के मुकाबले यह और भी कम है. इससे साफ है कि चीनी की मांग में धीरे-धीरे गिरावट आ रही है. हालांकि जरूरत पड़ने पर सरकार अतिरिक्त कोटा जारी कर सकती है.

7 महीनों में खपत में कमी

अगर अक्टूबर से सितंबर तक के 2025-26 सीजन की बात करें, तो पहले सात महीनों में चीनी की कुल खपत 156 लाख टन रही है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 161 लाख टन थी. यानी करीब 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. यह आंकड़ा बताता है कि बाजार में चीनी की मांग पहले की तुलना में थोड़ी कमजोर हुई है.

राज्यों को मिला अलग-अलग कोटा

सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार महाराष्ट्र को अप्रैल के लिए 8.17 लाख टन चीनी का कोटा दिया गया है, जो पिछले साल से थोड़ा ज्यादा है. वहीं उत्तर प्रदेश को 7.83 लाख टन मिला है, जो पहले से कम है. कर्नाटक को 3.30 लाख टन का आवंटन मिला है, जो मामूली बढ़ोतरी दर्शाता है.

मांग कम होने से मिली राहत

चीनी मिलों ने सरकार से शिकायत की थी कि बाजार में मांग कमजोर है, जिससे उनकी बिक्री प्रभावित हो रही है. इस पर सरकार ने मार्च 2026 के लिए नियमों में ढील दी थी. आमतौर पर मिलों को अपने कोटे का कम से कम 90 प्रतिशत बाजार में भेजना होता है, लेकिन मार्च के लिए इस नियम को एक बार के लिए ढीला कर दिया गया था.

सरकार का कड़ा नियंत्रण

भारत में चीनी उद्योग पूरी तरह से सरकार के नियंत्रण में है. गन्ने की कीमत तय करने से लेकर मिलों के लिए क्षेत्र तय करना और घरेलू व निर्यात बाजार में बिक्री की मात्रा निर्धारित करना-ये सभी फैसले सरकार द्वारा लिए जाते हैं. यही कारण है कि छोटे बदलाव भी पूरे उद्योग पर बड़ा असर डालते हैं.

नए नियम और सख्ती

सरकार ने 1 अप्रैल से नए नियम लागू किए हैं. अगर किसी मिल ने जनवरी में ज्यादा चीनी बेच दी या कोटे का सही इस्तेमाल नहीं किया, तो उसकी कटौती अप्रैल के कोटे से की जाएगी. इसके अलावा, अगर मिलें समय पर अपनी रिपोर्ट (P-II) जमा नहीं करती हैं, तो उन्हें अगले महीने का कोटा नहीं मिलेगा.

डिजिटल सिस्टम की अनिवार्यता

सरकार ने सभी चीनी मिलों को निर्देश दिया है कि वे अपने सिस्टम को NSWS पोर्टल से जोड़ें. इसके लिए API आधारित सिस्टम को 10 अप्रैल तक पूरा करना जरूरी है. ऐसा न करने पर मिलों को मई महीने का कोटा नहीं मिलेगा.

जूट बैग में पैकेजिंग अनिवार्य

सरकार ने यह भी कहा है कि कम से कम 20 प्रतिशत चीनी की पैकेजिंग जूट के बैग में करनी होगी. यह नियम जूट उद्योग को बढ़ावा देने के लिए लागू किया गया है और मिलों को इसकी जानकारी भी पोर्टल पर देनी होगी.

कुल मिलाकर, चीनी की घटती मांग और सरकार के सख्त नियमों से यह साफ है कि उद्योग को अब नई रणनीति बनाने की जरूरत है. आने वाले समय में मांग को बढ़ाने और उत्पादन संतुलन बनाए रखने के लिए सरकार और उद्योग दोनों को मिलकर काम करना होगा.

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