
हिमाचल प्रदेश के ऊपरी शिमला (अपर शिमला) में सेब की फसल पर अल्टरनेरिया (Alternaria) नाम की फफूंद जनित बीमारी तेजी से फैल रही है. इस बीमारी के बढ़ते मामलों को देखते हुए बागवानी विभाग (हॉर्टिकल्चर विभाग) ने प्रभावित इलाकों में अपनी फील्ड टीमें भेज दी हैं. विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में और टीमें भी तैनात की जाएंगी ताकि बीमारी की सही स्थिति का पता लगाया जा सके और किसानों को समय रहते बचाव के उपाय बताए जा सकें.
सेब उत्पादकों के अनुसार इस बार अल्टरनेरिया बीमारी ने कई बागों को अपनी चपेट में ले लिया है. इस बीमारी के कारण पेड़ों की पत्तियां समय से पहले झड़ रही हैं, जिससे पेड़ों की बढ़वार प्रभावित हो रही है. इसका सीधा असर सेब की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों पर पड़ने की आशंका है. किसानों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में यह बीमारी लगातार बढ़ रही है, लेकिन इस बार इसका प्रकोप पहले की तुलना में कहीं ज्यादा गंभीर दिखाई दे रहा है.
बागवानी विभाग के निदेशक सतीश शर्मा ने बताया कि विभाग की टीमें प्रभावित बागों का दौरा करेंगी और यह समझेंगी कि बीमारी कितनी तेजी से फैली है. साथ ही किसानों को यह भी बताया जाएगा कि बीमारी से बचाव के लिए कौन-कौन से उपाय अपनाने चाहिए और किस तरह समय पर दवा का छिड़काव करना चाहिए. विभाग की टीमें प्रभावित पेड़ों की पत्तियों के नमूने भी एकत्र करेंगी, जिन्हें प्रयोगशाला में भेजकर जांच की जाएगी. इससे यह पता लगाया जाएगा कि संक्रमण की असली वजह क्या है और बीमारी कितनी गंभीर है.
बागवानी विभाग केवल बीमारी की जांच ही नहीं करेगा, बल्कि किसानों द्वारा इस्तेमाल की जा रही फफूंदनाशक (फंगीसाइड) दवाओं की प्रभावशीलता की भी जांच करेगा. अब तक विभाग बाजार में बिकने वाली दवाओं के नमूने लेकर उनकी गुणवत्ता की जांच करता था, लेकिन इस बार किसानों से भी अनुरोध किया जाएगा कि उन्होंने जो दवाएं बागों में छिड़की हैं, यदि उनकी कुछ मात्रा बची है तो उसे भी जांच के लिए उपलब्ध कराएं. इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि इस्तेमाल की जा रही दवाएं बीमारी पर असर कर रही हैं या नहीं.
विभाग का मानना है कि लैब जांच और दवाओं की गुणवत्ता की रिपोर्ट मिलने के बाद बीमारी के फैलने की असली वजह सामने आ सकेगी. इसके आधार पर भविष्य में अल्टरनेरिया बीमारी की रोकथाम के लिए बेहतर रणनीति तैयार की जाएगी. साथ ही किसानों को ऐसी सलाह दी जाएगी जिससे वे समय रहते इस बीमारी को नियंत्रित कर सकें और सेब की फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सके.
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अल्टरनेरिया बीमारी को शुरुआती चरण में ही नियंत्रित नहीं किया गया तो इससे सेब की पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है. इसलिए किसानों को नियमित रूप से अपने बागों का निरीक्षण करना चाहिए. यदि पत्तियों पर भूरे या काले धब्बे दिखाई दें या पत्तियां समय से पहले गिरने लगें तो तुरंत बागवानी विभाग या कृषि विशेषज्ञों से संपर्क कर उचित सलाह लेनी चाहिए. समय पर पहचान और सही प्रबंधन से इस बीमारी के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
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