Urea Alternative: धान फसल पर 'कहर' बरपाएगा यह सरकारी आदेश! ICAR के पूर्व वैज्ञानिक ने दी चेतावनी

Urea Alternative: धान फसल पर 'कहर' बरपाएगा यह सरकारी आदेश! ICAR के पूर्व वैज्ञानिक ने दी चेतावनी

धान की फसल में यूरिया के विकल्प को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. ICAR के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक का कहना है कि अमोनियम सल्फेट के ज्यादा इस्तेमाल से फसल और खाद्य सुरक्षा दोनों प्रभावित हो सकते हैं.

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क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • May 19, 2026,
  • Updated May 19, 2026, 12:33 PM IST

मिडिल-ईस्‍ट युद्ध संकट के चलते दुनियाभर में रासायनिक खाद और इसके कच्‍चे माल की सप्‍लाई पर बुरा असर पड़ रहा है. इस कारण से सभी देश अपने-अपने स्‍तर पर खाद की कमी से बचने के लिए अलग-अलग तरीके और उपाय अपना रहे हैं. भारत सरकार ने भी ऐसा ही कदम उठाते हुए यूरिया की जगह अमोनियम सल्फेट के इस्‍तेमाल को बढ़ावा देने के लिए आदेश जारी किया है. जिस पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वीरेन्द्र सिंह लाठर ने आपत्ति जताई है और सरकार को चेताया है कि इससे धान की फसल को भारी नुकसान होने की आशंका है. ऐसे में सरकार को इस फैसले पर फिर से विचार करने की जरूरत है.

धान की खेती पर बढ़ सकता है खतरा

डॉ. वीरेन्द्र सिंह लाठर ने कहा कि भारत जैसे देश में धान सिर्फ एक फसल नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा की सबसे बड़ी आधार फसलों में शामिल है. देश में लाखों टन अनाज उत्पादन सीधे तौर पर धान की खेती पर निर्भर करता है. ऐसे में बिना पर्याप्त वैज्ञानिक परीक्षण के यूरिया की जगह अमोनियम सल्फेट को बढ़ावा देना जोखिम भरा कदम साबित हो सकता है.

सरकार ने जारी की है नई सलाह

डॉ. लठार ने कहा कि केंद्र सरकार ने 11 मई 2026 को राज्यों को भेजे गए पत्र में धान फसल में यूरिया के विकल्प के तौर पर अमोनियम सल्फेट के इस्‍तेमाल की सलाह दी है. मंत्रालय का उद्देश्य यूरिया की कमी के बीच नाइट्रोजन की उपलब्धता बनाए रखना है. अमोनियम सल्फेट में करीब 21 प्रतिशत नाइट्रोजन और 24 प्रतिशत सल्फर पाया जाता है.

'नाइट्रोजन पूरी करने में बढ़ेगी सल्फर की मात्रा'

डॉ. लाठर ने कहा कि धान की अच्छी पैदावार के लिए प्रति एकड़ करीब 60 किलो शुद्ध नाइट्रोजन की जरूरत होती है. यह मात्रा सामान्य तौर पर लगभग 130 किलो यूरिया से पूरी हो जाती है. लेकिन, अगर किसान अमोनियम सल्फेट का इस्‍तेमाल करेंगे तो उतनी ही नाइट्रोजन देने के लिए करीब 300 किलो उर्वरक प्रति एकड़ डालना पड़ेगा. इससे खेत में जरूरत से कई गुना ज्यादा सल्फर पहुंच जाएगा.

'जलभराव वाले खेतों में बढ़ सकता है नुकसान'

उन्होंने चेताया कि धान की रोपाई आमतौर पर जलभराव वाले खेतों में होती है. ऐसी स्थिति में अत्यधिक सल्फर फसल पर जहरीला असर पैदा कर सकता है. इससे पौधों की जड़ें कमजोर होने, फसल में बौनापन आने और पैदावार घटने का खतरा बढ़ सकता है. वैज्ञानिकों के अनुसार धान में सीमित मात्रा में ही सल्फर की जरूरत होती है.

खाद्य सुरक्षा पर असर की जताई आशंका

डॉ. वीरेन्द्र सिंह लाठर का कहना है कि अगर बड़े स्तर पर यह सलाह लागू हुई तो इसका असर सीधे धान उत्पादन पर पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि देश पहले ही खाद संकट और वैश्विक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है. ऐसे में उत्पादन घटने की स्थिति राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बन सकती है.

फैसले पर पुनर्विचार की मांग

पूर्व प्रधान वैज्ञानिक ने केंद्र सरकार से इस आदेश पर तत्काल पुनर्विचार करने की मांग की है. उन्‍होंने कहा कि किसानों को ऐसी सलाह देने से पहले अलग-अलग कृषि परिस्थितियों में व्यापक परीक्षण जरूरी है. बिना वैज्ञानिक संतुलन के खाद का इस्‍‍तेमाल बढ़ाने से मिट्टी और फसल दोनों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है.

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