आधुनिक तकनीक से तरबूज की खेती बनी कमाई का जरिया, 2 बीघा से 8 लाख रुपये की हुई आय

आधुनिक तकनीक से तरबूज की खेती बनी कमाई का जरिया, 2 बीघा से 8 लाख रुपये की हुई आय

आगर-मालवा के महुडिया गांव के शिक्षित युवा किसान राकेश यादव ने आधुनिक तकनीकों के सहारे तरबूज की खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदल दिया. उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में 2 बीघा भूमि पर पीले और लाल तरबूज की खेती कर उन्होंने करीब 8 लाख रुपये की आय अर्जित की, जिससे वे क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं.

धर्मेंद्र सिंह
  • Bhopal ,
  • Jun 09, 2026,
  • Updated Jun 09, 2026, 8:05 AM IST

आगर-मालवा जिले के ग्राम महुडिया के शिक्षित युवा किसान राकेश यादव ने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर यह साबित कर दिया है कि खेती यदि वैज्ञानिक तरीके से की जाए तो यह अत्यधिक लाभकारी व्यवसाय बन सकती है. पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए उन्होंने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में अपनी 2 बीघा भूमि पर पीले और लाल रंग के उन्नत किस्म के तरबूज की खेती की, जिससे उन्हें उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई है.

राकेश यादव ने फसल उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने के लिए आधुनिक कृषि तकनीकों का सहारा लिया.उन्होंने खेत में मल्चिंग शीट, ड्रिप सिंचाई प्रणाली, क्रॉप कवर तथा कीट प्रबंधन के लिए ट्रैप तकनीक का उपयोग किया. इन तकनीकों के कारण खेत में नमी लंबे समय तक बनी रही, खरपतवार नियंत्रण हुआ, सिंचाई जल की बचत हुई और फसल को कीट एवं रोगों से भी सुरक्षा मिली.

400 क्विंटल मिला उत्पादन 

 राकेश यादव ने 2 बीघा भूमि से लगभग 400 क्विंटल तरबूज उत्पादन प्राप्त होने किया. बाजार में अच्छी मांग और बेहतर गुणवत्ता के कारण उन्हें अपनी उपज के अच्छे दाम मिला. अनुमान है कि इस खेती से उन्हें करीब 8 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई.

बड़े शहरों के बाजारों में बेच रहे उपज

राकेश यादव अपनी उपज को स्थानीय मंडियों तक सीमित न रखकर इंदौर और भोपाल जैसे बड़े उपभोक्ता बाजारों तक पहुंचा रहे हैं. इससे उन्हें बेहतर मूल्य मिल रहा है और उनकी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. उनका मानना है कि यदि किसान सीधे बड़े बाजारों से जुड़ें तो उनकी आमदनी और अधिक बढ़ सकती है.

पहले करेले से कमाया मुनाफा, अब जुकिनी की तैयारी

राकेश यादव पहले भी उद्यानिकी फसलों की खेती में सफलता हासिल कर चुके हैं.उन्होंने करेले की खेती से अच्छा लाभ अर्जित किया था. अब वे उद्यानिकी विभाग की अनुदान योजनाओं का लाभ लेकर पीली एक्सोटिक जुकिनी की खेती शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं. उनका उद्देश्य नई और उच्च मूल्य वाली फसलों को अपनाकर खेती को और अधिक लाभकारी बनाना है.

किसानों के लिए बन रहे प्रेरणा

राकेश यादव की सफलता क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है. उनकी उपलब्धि यह दर्शाती है कि सीमित भूमि पर भी वैज्ञानिक खेती और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से बेहतर उत्पादन एवं अधिक आय प्राप्त की जा सकती है.

उद्यानिकी विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे विभागीय योजनाओं और अनुदान सुविधाओं का लाभ उठाएं तथा अपनी कृषि भूमि के एक हिस्से में उद्यानिकी फसलों को अपनाकर आधुनिक तकनीकों के साथ खेती करें.इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि कृषि को एक टिकाऊ और लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करने में भी मदद मिलेगी.

 

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