अब स्मार्ट पैकेजिंग से बढ़ेगी कृषि उत्पादों की शेल्फ लाइफ, भोपाल में देशभर के वैज्ञानिकों ने तैयार किया रोडमैप

अब स्मार्ट पैकेजिंग से बढ़ेगी कृषि उत्पादों की शेल्फ लाइफ, भोपाल में देशभर के वैज्ञानिकों ने तैयार किया रोडमैप

भोपाल स्थित आईसीएआर-केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान (CIAE) और भारतीय पैकेजिंग संस्थान (IIP) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय मंथन में कृषि उत्पादों के लिए स्मार्ट एवं इंटेलिजेंट पैकेजिंग तकनीकों पर व्यापक चर्चा हुई.विशेषज्ञों ने AI, IoT, बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग और फ्रेशनेस इंडिकेटर जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने तथा इनके व्यावसायीकरण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर रोडमैप तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया.

धर्मेंद्र सिंह
  • Bhopal ,
  • Jul 26, 2026,
  • Updated Jul 26, 2026, 12:21 PM IST

कृषि उत्पादों की गुणवत्ता, खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाने में पैकेजिंग की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है. इसी दिशा में देशभर के वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों और नीति-निर्माताओं ने भोपाल में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय मंथन सत्र में भविष्य की स्मार्ट पैकेजिंग तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की. इस दौरान कृषि उत्पादों के लिए ऐसी पैकेजिंग प्रणालियों पर जोर दिया गया, जो उत्पाद की ताजगी बनाए रखें, शेल्फ लाइफ बढ़ाएं, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करें और कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करें.

भारतीय पैकेजिंग संस्थान (आईआईपी), नई दिल्ली तथा आईसीएआर-केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान (आईसीएआर-सीआईएई), भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में "कृषि उत्पादों के लिए स्मार्ट एवं इंटेलिजेंट पैकेजिंग प्रणालियों के सामंजस्य" विषय पर आयोजित इस राष्ट्रीय मंथन में देशभर से वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं, स्टार्टअप उद्यमियों और विद्यार्थियों ने भाग लिया.

क्यों जरूरी है स्मार्ट और इंटेलिजेंट पैकेजिंग?

भारत में हर साल फलों, सब्जियों और अन्य कृषि उत्पादों का बड़ा हिस्सा कटाई के बाद खराब हो जाता है.इसकी सबसे बड़ी वजह उचित पैकेजिंग और भंडारण की कमी है.स्मार्ट एवं इंटेलिजेंट पैकेजिंग तकनीकें उत्पाद की ताजगी, गुणवत्ता और सुरक्षा की लगातार निगरानी कर सकती हैं.इससे खाद्य पदार्थ अधिक समय तक सुरक्षित रहते हैं और किसानों को बेहतर बाजार मूल्य मिलने की संभावना बढ़ती है.

स्वदेशी तकनीक और उद्योग-शिक्षा सहयोग पर जोर

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो. (डॉ.) तनवीर आलम, अतिरिक्त निदेशक एवं क्षेत्रीय अधिकारी, भारतीय पैकेजिंग संस्थान, नई दिल्ली के स्वागत उद्बोधन से हुआ.मुख्य अतिथि प्रो. बलदेव राज कम्बोज, कुलपति, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार ने कहा कि भारत को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी पैकेजिंग तकनीकों का विकास और उनका व्यावसायीकरण आवश्यक है.उन्होंने उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच मजबूत साझेदारी बनाने पर विशेष बल दिया ताकि प्रयोगशाला में विकसित तकनीकें किसानों और उद्योगों तक तेजी से पहुंच सकें.

AI और डिजिटल तकनीक बदलेंगी पैकेजिंग की तस्वीर

विशिष्ट अतिथि प्रो. जे.पी. शर्मा, पूर्व कुलपति तथा डॉ. कै. नरसैया, एडीजी (प्रोसेस इंजीनियरिंग) एवं कार्यवाहक निदेशक, आईसीएआर-आईएएसआरआई ने स्मार्ट पैकेजिंग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल तकनीकों और डेटा आधारित निगरानी प्रणाली की भूमिका पर प्रकाश डाला.

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में पैकेजिंग केवल उत्पाद को सुरक्षित रखने का माध्यम नहीं होगी, बल्कि वह उत्पाद की गुणवत्ता, तापमान, नमी और ताजगी की जानकारी भी उपभोक्ता तक पहुंचाने का काम करेगी.

राष्ट्रीय स्तर पर नवाचार और तकनीक हस्तांतरण पर जोर

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय, भारत सरकार के वैज्ञानिक-एफ डॉ. विशाल चौधरी ने कृषि क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया. वहीं एग्रो इनोवेट इंडिया लिमिटेड (आईसीएआर) के सीईओ प्रवीण मलिक ने कहा कि नई तकनीकों को प्रयोगशाला से उद्योग और किसानों तक पहुंचाने के लिए प्रभावी प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और व्यावसायीकरण की मजबूत व्यवस्था विकसित करनी होगी.

आईसीएआर करेगा मेगा रिसर्च प्रोजेक्ट का प्रस्ताव

उद्घाटन सत्र में डॉ. सुखदेव मंगराज, अध्यक्ष, एग्रो प्रोड्यूस प्रोसेसिंग डिवीजन, आईसीएआर-सीआईएई, भोपाल ने देश में स्मार्ट एवं इंटेलिजेंट पैकेजिंग पर हो रहे अनुसंधान का श्वेत पत्र (White Paper) तैयार करने का सुझाव दिया.उन्होंने आईसीएआर के माध्यम से इस क्षेत्र में मेगा अनुसंधान परियोजना शुरू करने का प्रस्ताव भी रखा. इस परियोजना में आईसीएआर-सीआईएई, भोपाल को अग्रणी संस्थान के रूप में विकसित करने की बात कही गई ताकि देशभर में हो रहे अनुसंधान को एक मंच पर लाया जा सके.

स्मार्ट पैकेजिंग की नई तकनीकों का प्रदर्शन

तकनीकी सत्रों में आईसीएआर, सीएसआईआर, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, भारतीय पैकेजिंग संस्थान और विभिन्न उद्योगों के विशेषज्ञों ने आधुनिक पैकेजिंग तकनीकों पर अपने शोध प्रस्तुत किए.

इनमें प्रमुख विषय शामिल रहे—

  • स्मार्ट एवं इंटेलिजेंट पैकेजिंग
  • फ्रेशनेस इंडिकेटर तकनीक
  • एक्टिव पैकेजिंग
  • जैव-अवक्रमणीय (Biodegradable) पैकेजिंग
  • सेंसर आधारित पैकेजिंग
  • AI एवं IoT आधारित पैकेजिंग सिस्टम
  • प्रौद्योगिकी हस्तांतरण
  • व्यावसायीकरण की संभावनाएं
  • अनुसंधान की चुनौतियां

भोपाल संस्थान ने दिखाई अपनी आधुनिक तकनीक

आईसीएआर-सीआईएई, भोपाल के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एम.के. त्रिपाठी ने संस्थान में विकसित स्मार्ट एवं इंटेलिजेंट पैकेजिंग तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी.

उन्होंने प्राकृतिक रंगद्रव्य आधारित फ्रेशनेस इंडिकेटर, सक्रिय (Active Packaging) एवं जैव-अवक्रमणीय पैकेजिंग, उनकी टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल (TRL), व्यावसायीकरण की संभावनाओं और भविष्य के अनुसंधान पर विस्तार से प्रस्तुति दी.

उन्होंने बताया कि इन तकनीकों के माध्यम से खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी और खाद्य अपव्यय में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है.

उद्योग जगत ने बताए बाजार की जरूरतें

कार्यक्रम में शामिल उद्योग विशेषज्ञों ने जैव-अवक्रमणीय प्लास्टिक, पैकेजिंग परीक्षण की आधुनिक विधियों, बाजार की बदलती मांग और व्यावसायिक संभावनाओं पर अपने अनुभव साझा किए.

विशेषज्ञों का मानना था कि यदि उद्योग और अनुसंधान संस्थान मिलकर काम करें तो भारत स्मार्ट पैकेजिंग तकनीकों में वैश्विक स्तर पर अग्रणी भूमिका निभा सकता है.

मंथन से निकले महत्वपूर्ण सुझाव

दो दिवसीय विचार-विमर्श के बाद विशेषज्ञों ने कई महत्वपूर्ण अनुशंसाएं कीं—

  • स्मार्ट एवं इंटेलिजेंट पैकेजिंग का राष्ट्रीय स्तर पर मानकीकरण किया जाए।
  • आईसीएआर, सीएसआईआर और कृषि विश्वविद्यालयों के बीच सहयोगात्मक अनुसंधान बढ़ाया जाए।
  • आधुनिक पैकेजिंग तकनीकों के विकास और व्यावसायीकरण को गति दी जाए।
  • स्टार्टअप और निजी उद्योगों को इस क्षेत्र में प्रोत्साहित किया जाए।
  • किसानों, उद्योगों और शोधकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू किए जाएं।
  • पर्यावरण अनुकूल एवं जैव-अवक्रमणीय पैकेजिंग को बढ़ावा दिया जाए।

समापन सत्र में संस्थागत सहयोग पर जोर

समापन सत्र में कृषि वैज्ञानिक भर्ती बोर्ड के सदस्य डॉ. सी.एन. रविशंकर ने कहा कि कृषि उत्पादों की गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए स्मार्ट एवं इंटेलिजेंट पैकेजिंग समय की आवश्यकता है.

उन्होंने अनुसंधान संस्थानों, उद्योगों और नीति-निर्माताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा विकसित तकनीकों के शीघ्र व्यावसायीकरण का आह्वान किया.

क्या होगा किसानों और उपभोक्ताओं को लाभ?

विशेषज्ञों के अनुसार स्मार्ट एवं इंटेलिजेंट पैकेजिंग तकनीकों के व्यापक उपयोग से—

  • कृषि उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ेगी।
  • कटाई के बाद होने वाली हानि कम होगी।
  • खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता बेहतर होगी।
  • किसानों को बेहतर बाजार और अधिक मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी।
  • खाद्य अपव्यय में कमी आएगी।
  • पर्यावरण अनुकूल पैकेजिंग को बढ़ावा मिलेगा।
  • भारत की कृषि निर्यात क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी।

इस राष्ट्रीय मंथन ने स्पष्ट किया कि भविष्य की कृषि केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि स्मार्ट पैकेजिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेंसर तकनीक और टिकाऊ नवाचार कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार में नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. 

 

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