
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का बड़ा बयान सामने आया है. टिकैत ने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा 36 दिन चले आंदोलन के बाद आया है, लेकिन छात्रों की कई मांगें अभी भी बाकी हैं. उन्होंने कहा कि जब तक छात्रों की सभी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा.
राकेश टिकैत ने कहा कि छात्रों का यह आंदोलन केवल इस्तीफे तक सीमित नहीं है. छात्रों की मांग है कि प्रदर्शन के दौरान दर्ज किए गए मुकदमे वापस लिए जाएं और जिन छात्रों ने कथित परीक्षा गड़बड़ियों के कारण आत्महत्या की, उनके परिवारों को आर्थिक सहायता दी जाए.
राकेश टिकैत ने कहा कि छात्रों ने पिछले 36 दिनों से दिल्ली में आंदोलन किया. इस दौरान छात्रों पर पुलिस कार्रवाई हुई और उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा. उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा में पेपर लीक जैसी घटनाओं से कई युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ, नौकरी के अवसर खत्म हुए और कुछ छात्रों ने आत्महत्या तक कर ली.
उन्होंने कहा कि इतनी गंभीर समस्याओं के बाद भी सरकार ने फैसला लेने में काफी समय लगाया. टिकैत के मुताबिक, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा एक कदम है, लेकिन छात्रों की बाकी मांगों पर भी सरकार को जल्द फैसला लेना चाहिए.
राकेश टिकैत ने साफ कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा और किसान संगठन छात्रों के आंदोलन के साथ खड़े हैं. उन्होंने कहा कि किसान गांवों में तैयार बैठे हैं और जरूरत पड़ने पर वे तुरंत दिल्ली पहुंच सकते हैं.
उन्होंने बताया कि किसान संगठनों की बैठकों में भी इस मुद्दे पर चर्चा हो रही है. उनका कहना है कि छात्रों की मांगों को लेकर देशभर में समर्थन बढ़ रहा है और यह आंदोलन धीरे-धीरे बड़ा रूप ले रहा है.
किसान नेता ने कहा कि छात्रों का आंदोलन किसी हिंसक रास्ते पर नहीं है, बल्कि यह अपने अधिकारों और भविष्य के लिए आवाज उठाने की लड़ाई है. उन्होंने कहा कि दुनिया में बदलाव अक्सर विचारों की ताकत से आता है.
टिकैत ने कहा कि आंदोलन में शामिल कई छात्र कम उम्र के हैं और उनके ऊपर कार्रवाई करना सही नहीं है. उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रशासन के व्यवहार में सरकार की नीति दिखाई देती है.
NEET और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग तक पहुंच गया है.
राकेश टिकैत ने कहा कि अगर सरकार छात्रों की मांगों को स्वीकार करती है तो समाधान निकल सकता है, लेकिन अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन जारी रहेगा. उन्होंने दोहराया कि किसान संगठन छात्रों के साथ हैं और जरूरत पड़ने पर उनके समर्थन में आगे भी उतरेंगे.
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