
डिग्री लेने के बाद अच्छी नौकरी की तलाश करना आज लाखों युवाओं का सपना होता है, लेकिन राजस्थान के कोटा के एक युवा ने इस सोच को बदलकर दिखा दिया. BSC एग्रीकल्चर की पढ़ाई पूरी करने वाले यशराज ने कॉरपोरेट नौकरी की कतार में खड़े होने के बजाय खेती में अवसर तलाशे और मशरूम की खेती को अपना भविष्य बना लिया. आज उनका एग्री-स्टार्टअप सालाना 20 लाख रुपये के टर्नओवर तक पहुंच चुका है और वे 15 से 20 लोगों को रोजगार देकर हाड़ौती के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं. आइए जानते हैं उनकी सफलता की कहानी.
कॉलेज की पढ़ाई के दौरान मिली ट्रेनिंग ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी. कृषि प्रशिक्षण में उन्हें मशरूम उत्पादन, डेयरी फार्मिंग और वर्मी कम्पोस्ट जैसी तकनीकों को करीब से समझने का मौका मिला. इसी दौरान उन्होंने एक अहम बात पर ध्यान दिया कि राजस्थान जैसे गर्म प्रदेश में मशरूम की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन स्थानीय स्तर पर उत्पादन बेहद कम है. यहीं से उन्हें बाजार की जरूरत और अवसर दोनों दिखाई दिए. उन्होंने तय कर लिया कि नौकरी नहीं, बल्कि इसी कमी को अपना कारोबार बनाएंगे.
हालांकि, यह फैसला आसान नहीं था. घर की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि बड़ा निवेश किया जा सके. परिवार कॉलेज की फीस तक ही सहयोग कर पा रहा था. ऐसे में यशराज ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर पॉकेट मनी से 10 से 15 हजार रुपये जुटाए और एक छोटे से कमरे में सिर्फ 50 बैग के साथ मशरूम की खेती शुरू कर दी. पहला ही प्रयास उम्मीद से कहीं ज्यादा सफल रहा. शुरुआती उत्पादन से उन्हें करीब 15 से 20 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ. इसी सफलता ने भरोसा दिलाया कि उनका आइडिया सही दिशा में है.
छोटे स्तर से शुरू हुआ यह सफर आगे बढ़ा तो नई चुनौतियां सामने आ गईं. उत्पादन बढ़ाने के लिए पूंजी की जरूरत थी. यशराज ने MSME में अपने स्टार्टअप का रजिस्ट्रेशन कराया और कई बैंकों और निजी कंपनियों से फंडिंग और लोन के लिए संपर्क किया. लेकिन हर जगह निराशा हाथ लगी. कई बार ऐसा लगा कि अब यह सपना यहीं खत्म हो जाएगा. उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा भी आया जब वे पूरी तरह डीमोटिवेट हो गए थे और काम बंद करने का मन बना लिया था. लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय निजी स्तर पर पैसों का इंतजाम किया और संघर्ष जारी रखा.
आज वही संघर्ष उनकी सबसे बड़ी ताकत बन चुका है. कभी 50 बैग से शुरू हुआ मशरूम उत्पादन अब एक सफल एग्री-स्टार्टअप में बदल चुका है. उनका कारोबार सालाना 20 लाख रुपये का टर्नओवर हासिल कर रहा है. सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उन्होंने केवल खुद को ही आत्मनिर्भर नहीं बनाया, बल्कि 15 से 20 स्थानीय लोगों को रोजगार भी दिया है. स्टूडेंट लाइफ में मामूली रकम से शुरू हुआ उनका प्रयास आज एक सफल और मुनाफेदार उद्यमी का रूप ले चुका है.
यशराज का मानना है कि सफलता किसी बड़े निवेश की मोहताज नहीं होती, बल्कि बड़े इरादों की होती है. वे कहते हैं कि अगर आप किसी लक्ष्य को पूरी शिद्दत से अपने दिमाग और दिल में बिठा लेते हैं, लगातार मेहनत करते हैं और मुश्किलों के आगे हार नहीं मानते, तो आपका संघर्ष एक दिन जरूर सफलता की कहानी बन जाता है. कोटा के इस युवा की कहानी सिर्फ मशरूम की खेती की नहीं, बल्कि उस सोच की जीत है जो नौकरी तलाशने के बजाय रोजगार पैदा करने का सपना देखती है. यह कहानी बताती है कि सही आइडिया, धैर्य, मेहनत और लगातार प्रयास के दम पर छोटी शुरुआत भी करोड़ों सपनों की नींव बन सकती है.