धान छोड़ ग्राफ्टेड बैंगन से रचा मुनाफे का रिकॉर्ड: महासमुंद के किसान ने प्रति एकड़ कमाए 6.5 लाख रुपये

धान छोड़ ग्राफ्टेड बैंगन से रचा मुनाफे का रिकॉर्ड: महासमुंद के किसान ने प्रति एकड़ कमाए 6.5 लाख रुपये

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत मिली सहायता और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से महासमुंद के किसान क्रांति कुमार चंद्राकर ने ग्राफ्टेड बैंगन की खेती में बड़ी सफलता हासिल की है.प्रति एकड़ 400 क्विंटल उत्पादन और 6.50 लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ अर्जित कर उन्होंने कृषि विविधीकरण और तकनीक आधारित खेती की मिसाल पेश की है.

धर्मेंद्र सिंह
  • Raipur ,
  • Jun 16, 2026,
  • Updated Jun 16, 2026, 10:57 AM IST

छत्तीसगढ़ में कृषि नवाचार और उद्यानिकी फसलों के विस्तार का सकारात्मक असर अब खेतों में दिखाई देने लगा है. महासमुंद जिले के ग्राम लोहारडीह के प्रगतिशील किसान क्रांति कुमार चंद्राकर ने पारंपरिक धान खेती से हटकर ग्राफ्टेड बैंगन की आधुनिक खेती अपनाई और शानदार सफलता हासिल की है. उनकी यह उपलब्धि कृषि विविधीकरण और तकनीक आधारित खेती का एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है.

धान की पारंपरिक खेती से नहीं मिल रहा था अपेक्षित लाभ

एम.टेक. तक शिक्षित किसान क्रांति कुमार चंद्राकर अपनी 1.46 हेक्टेयर सिंचित भूमि पर मुख्य रूप से धान की खेती करते थे.लेकिन बढ़ती उत्पादन लागत, अधिक जल खपत और सीमित आय के कारण उन्हें संतोषजनक लाभ नहीं मिल रहा था. बेहतर आमदनी की तलाश में उन्होंने खेती में बदलाव का निर्णय लिया.

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना से मिला सहयोग

वर्ष 2025-26 में उन्होंने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत संचालित ग्राफ्टेड बैंगन एवं टमाटर सीडलिंग प्रदर्शन कार्यक्रम में भाग लिया. योजना के अंतर्गत उन्हें 30 हजार रुपये की डीबीटी आधारित अनुदान सहायता प्राप्त हुई, जिससे आधुनिक खेती तकनीकों को अपनाने में मदद मिली.

ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक ने बढ़ाई उत्पादन क्षमता

तकनीकी विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में किसान ने अपने खेत में ड्रिप सिंचाई प्रणाली और मल्चिंग तकनीक का उपयोग किया.इन आधुनिक तकनीकों के कारण पानी की बचत हुई, खरपतवार नियंत्रण आसान हुआ और पौधों का विकास बेहतर तरीके से हुआ.परिणामस्वरूप फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई.

प्रति एकड़ 400 क्विंटल तक उत्पादन

ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से किसान को प्रति एकड़ लगभग 400 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ.अच्छी गुणवत्ता के कारण बाजार में बैंगन को औसतन 25 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा गया, जिससे कुल आय में भारी बढ़ोतरी हुई.

35 हजार के लाभ से सीधे 6.5 लाख रुपये तक पहुंची कमाई

किसान चंद्राकर के अनुसार, जहां धान की खेती से उन्हें लगभग 35 हजार रुपये का लाभ प्राप्त होता था, वहीं ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से सभी खर्चों को घटाने के बाद प्रति एकड़ लगभग 6.50 लाख रुपये का शुद्ध लाभ मिला. यह आय पारंपरिक खेती की तुलना में कई गुना अधिक है.

अन्य किसानों के लिए बन रहे प्रेरणा स्रोत

क्रांति कुमार चंद्राकर की सफलता के बाद आसपास के किसान भी उद्यानिकी फसलों, ग्राफ्टेड सब्जियों, ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं. इससे जिले में कृषि विविधीकरण को बढ़ावा मिल रहा है और किसानों की आय बढ़ाने के नए रास्ते खुल रहे हैं.

तकनीक आधारित खेती से बदल रही कृषि की तस्वीर

उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ऐसे प्रदर्शन कार्यक्रम किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन रहे हैं. इससे न केवल उत्पादन और आय में वृद्धि हो रही है, बल्कि छत्तीसगढ़ में खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और आधुनिक बनाने की दिशा में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है.

 

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