
खेती को सिर्फ फसल उगाने तक सीमित न रखकर अगर उसे उद्योग से जोड़ा जाए तो गांवों में भी आर्थिक मजबूती और आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम की जा सकती है. महाराट्र के गढ़चिरौली जिले के मलांडा गांव के एक प्रगतिशील किसान ने असल यह कर दिखाया है.केंद्र सरकार की एक योजना का सही इस्तेमाल कर उन्होंने न सिर्फ अपनी आमदनी बढ़ाई बल्कि दूसरे किसानों के लिए भी एक नई राह खोल दी. अब गांव के बाकी किसान भी उनकी तरह ही इस दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं.
गढ़चिरौली जिले के मलांडा गांव के प्रोग्रेसिव किसान कृष्ण भागरथी भुरकुरिया ने अपनी मेहनत और दूरदर्शिता से वह कर दिखाया है जिसके बारे में लोग सिर्फ सोचते ही रह जाते हैं. उन्होंने यह साबित कर दिया है कि पारंपरिक खेती के साथ अगर वैल्यू एडिशन और इंडस्ट्री को जोड़ा जाए तो आर्थिक स्थिरता और आत्मनिर्भरता हासिल की जा सकती है. उन्होंने केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री माइक्रो फूड एंटरप्राइजेज अपग्रेडेशन (पीएमएफएमई) योजना का फायदा उठाया और मसाला प्रोसेसिंग इंडस्ट्री की शुरुआत की. आज यह इंडस्ट्री ग्रामीण किसानों के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बन चुकी है.
कृष्ण भुरकुरिया के पास दो हेक्टेयर पुश्तैनी जमीन है. बड़े परिवार की जरूरतों को देखते हुए सिर्फ़ खेती पर निर्भर रहना मुश्किल हो रहा था. इसी वजह से उन्होंने आमदनी के वैकल्पिक स्रोत की तलाश शुरू की. वर्ष 2022-23 में तालुका कृषि अधिकारी कार्यालय द्वारा आयोजित एक ग्राम सभा के दौरान एग्रीकल्चर असिस्टेंट पी. जी. मेश्राम ने पीएमएफएमई योजना की विस्तृत जानकारी दी. इसी मार्गदर्शन से प्रेरित होकर भुरकुरिया ने कृषि से जुड़ी पूरक मसाला प्रोसेसिंग यूनिट शुरू करने का फैसला किया.
एग्रीकल्चर असिस्टेंट की तकनीकी सहायता से उन्होंने डिस्ट्रिक्ट रिसोर्स पर्सन (डीआरपी) के जरिये से सभी जरूरी दस्तावेज पूरे किए. इसके बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से प्रोजेक्ट के लिए लोन स्वीकृत हुआ.उन्होंने अपनी ओर से 8,000 रुपये की पूंजी लगाई और करीब 90,000 रुपये की लागत से यह यूनिट स्थापित की. फरवरी 2023 से इस यूनिट में उत्पादन शुरू हो गया. डिस्ट्रिक्ट सुपरिटेंडेंट एग्रीकल्चर ऑफिसर प्रीति हिरलकर ने कहा कि छोटे किसानों के लिए वैल्यू एडिशन पर ध्यान देना आज की सबसे बड़ी ज़रूरत है. यह स्पाइसेस यूनिट मिर्च पाउडर, विभिन्न मसाले, आटा और दालों की प्रोसेसिंग करती है. तैयार उत्पादों की बिक्री मालंदा गांव और धनोर के स्थानीय बाजारों में की जाती है.
इस मसाला प्रोसेसिंग इंडस्ट्री से हर साल लाखों रुपये की अतिरिक्त आय हो रही है. इससे परिवार की आर्थिक जरूरतें आसानी से पूरी हो रही हैं. स्थानीय स्तर पर कच्चे माल के वैल्यू एडिशन से गांव की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है. कृष्ण भुरकुरिया ने वेबसाइट अग्रोवन को बताया कि योजना से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आया है. उन्होंने अन्य किसानों से भी अपील की है कि वे सिर्फ खेती पर निर्भर न रहें बल्कि सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी छोटी इंडस्ट्री शुरू करें और आत्मनिर्भर बनें.
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