
सर्दियों की पहचान बन चुकी स्ट्रॉबेरी इस समय बाजार में सुर्खियों में है.देशभर में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है लेकिन सीमित सप्लाई के चलते इसके दाम आसमान छू रहे हैं. मौसम की मार और उत्पादन में गिरावट ने किसानों से लेकर उपभोक्ताओं तक सभी को प्रभावित किया है. महाराष्ट्र के कई गांवों में स्ट्रॉबेरी की खेती जमकर होती है और यहां पर इसकी कीमतें इस समय आसमान छू रही है. जहां ग्राहकों को मंहगी स्ट्रॉबेरी से परेशानी हो रही है तो वहीं किसानों को फायदा होने की उम्मीदें हैं.
फिलहाल बाजार में स्ट्रॉबेरी की जबरदस्त मांग बनी हुई है. लेकिन मांग के मुकाबले सप्लाई कम होने की वजह से इसके दाम लगातार बढ़ रहे हैं. ग्रेड के हिसाब से रिटेल बाजार में एक किलो स्ट्रॉबेरी की कीमत 250 रुपये से लेकर 700 रुपये तक पहुंच गई है.महाराष्ट्र के महाबलेश्वर, वाई और पंचगनी इलाके स्ट्रॉबेरी उत्पादन के प्रमुख केंद्र माने जाते हैं. इसके अलावा नासिक जिले के कुछ हिस्सों में भी स्ट्रॉबेरी की खेती की जाती है. आमतौर पर स्ट्रॉबेरी का सीजन अक्टूबर से शुरू होकर मार्च के अंत तक चलता है, जबकि अप्रैल में यह लगभग खत्म हो जाता है. क्रिसमस और नए साल के दौरान देशभर में स्ट्रॉबेरी की मांग सबसे ज्यादा रहती है.
महाबलेश्वर और वाई क्षेत्र के किसानों ने अब पुणे के श्री छत्रपति शिवाजी मार्केट यार्ड स्थित फल मंडी में स्ट्रॉबेरी की आवक शुरू कर दी है. ग्रेड के अनुसार होलसेल मार्केट में भी स्ट्रॉबेरी 250 रुपये से 700 रुपये प्रति किलो के भाव बिक रही है. व्यापारियों के मुताबिक पिछले साल की तुलना में इस बार कीमतों में करीब 30 से 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इस साल स्ट्रॉबेरी की फसल पर जलवायु परिवर्तन का साफ असर देखने को मिला है. उम्मीद के मुताबिक ठंड न पड़ने से उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिससे बाजार में आवक कम रही. इसी वजह से अगले कुछ दिनों तक स्ट्रॉबेरी के दाम ऊंचे बने रहने की संभावना है.
फिलहाल पुणे और आसपास के इलाकों में स्ट्रॉबेरी की मांग स्थिर बनी हुई है और टूरिस्ट सीजन के चलते बिक्री में इजाफा हो रहा है. मौसम में ठंड बढ़ने के बाद जनवरी में आवक बढ़ने की उम्मीद है जिससे कीमतों में कुछ नरमी आ सकती है. दाम घटने के बाद पल्प बनाने वालों और जूस विक्रेताओं की ओर से खरीद बढ़ने की संभावना जताई जा रही है.
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