जालना के किसानों का कमाल, कम पानी में ड्रैगन फ्रूट से लाखों कमाने की तैयारी!

जालना के किसानों का कमाल, कम पानी में ड्रैगन फ्रूट से लाखों कमाने की तैयारी!

महाराष्ट्र के जालना जिले में पानी की कमी किसानों के लिए बड़ी चुनौती है. ऐसे में अंबड तालुका के दो किसानों ने पारंपरिक खेती से हटकर ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की. कम पानी में खेती के इस प्रयोग से दोनों किसानों को लाखों रुपये की आमदनी की उम्मीद है.

ड्रैगन फ्रूट की खेतीड्रैगन फ्रूट की खेती
क‍िसान तक
  • Jalna,
  • Aug 29, 2026,
  • Updated Aug 29, 2026, 11:04 AM IST

महाराष्ट्र का जालना जिला अक्सर सूखे और पानी की कमी वाले क्षेत्र के रूप में जाना जाता है. कम बारिश और पानी की कमी के कारण यहां किसानों के सामने पारंपरिक खेती को लेकर कई चुनौतियां रहती हैं. लेकिन इसी चुनौती को अवसर में बदलते हुए अंबड तालुका के पिठोरी सिरसगांव के दो किसानों ने ड्रैगन फ्रूट की सफल खेती का प्रयोग किया है. पारंपरिक फसलों के बजाय फल बागवानी का विकल्प चुनकर इन किसानों ने कम पानी में अच्छी आमदनी का रास्ता तलाशने की कोशिश की है. मोबाइल से जानकारी हासिल की, दूसरे किसानों की बागों का दौरा किया और खुद ही खेत में जरूरी स्ट्रक्चर तैयार किया. ऐसे में आइए जानते हैं जालना के इन किसानों की ड्रैगन फ्रूट की खेती की पूरी कहानी.

खेती में आया 6 लाख रुपये का खर्च

कम बारिश और पानी की कमी वाले इस इलाके में किसान संभाजी अशोक काकडे और नारायण हरिभाऊ गोरे ने ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की है. दोनों किसानों ने मोबाइल के जरिए ड्रैगन फ्रूट की खेती की जानकारी हासिल की. साथ ही, पहले से इसकी खेती कर रहे किसानों से चर्चा की और उनकी बागों का जायजा लेने के बाद खुद भी इस फसल की ओर कदम बढ़ाया.

किसान संभाजी अशोक काकडे ने 1 जनवरी 2024 को डेढ़ एकड़ जमीन में ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगाए. इस खेती के लिए उन्हें करीब 6 लाख रुपये का खर्च आया. ड्रैगन फ्रूट को बाजार में अच्छा भाव और अच्छी मांग मिलने की जानकारी उन्हें मोबाइल के जरिए मिली थी. इसके बाद उन्होंने पारंपरिक खेती के बजाय ड्रैगन फ्रूट की खेती करने का फैसला किया. डेढ़ एकड़ जमीन के लिए उन्होंने सोलापुर जिले के पंढरपुर तालुका से करीब साढ़े पांच हजार पौधे लाए.

15 लाख रुपये आमदनी होने की उम्मीद

ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए सबसे जरूरी पोल यानी स्ट्रक्चर भी संभाजी काकडे ने खुद तैयार किया है. इससे उन्हें निर्माण लागत में बचत करने में मदद मिली. संभाजी काकडे के मुताबिक, ड्रैगन फ्रूट की फसल में अन्य कई फसलों की तुलना में रोगों का प्रकोप कम रहता है. ज्यादा बारिश होने पर भी फसल पर इसका बड़ा असर नहीं पड़ता, जबकि गर्मी के मौसम में भी इस फसल को तुलनात्मक रूप से कम पानी की जरूरत होती है. यही वजह है कि कम पानी वाले इलाके में यह खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकती है.

किसान संभाजी काकडे को उम्मीद है कि पहली ही बार में डेढ़ एकड़ जमीन से करीब 15 टन ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन हो सकता है. इससे उन्हें 10 से 15 लाख रुपये तक की आमदनी होने की उम्मीद है. वहीं, बाजार में ड्रैगन फ्रूट की अच्छी मांग होने के कारण वे अपनी बाग का माल सोलापुर, छत्रपति संभाजीनगर और पुणे की बाजार में भेजेंगे. खर्च निकालने के बाद भी अच्छी आमदनी होने की उम्मीद है. संभाजी काकडे दूसरे किसानों से भी समूह खेती के जरिए ड्रैगन फ्रूट की खेती अपनाने की अपील कर रहे हैं.

किसानों से चर्चा करके शुरू की खेती

संभाजी काकडे के साथ किसान नारायण हरिभाऊ गोरे ने भी ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की है. खेती शुरू करने से पहले उन्होंने ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे अन्य किसानों से चर्चा की और उनकी बाग का निरीक्षण किया. इसके बाद उन्होंने भी इस फसल को अपनाने का फैसला किया. नारायण गोरे ने भी मोबाइल से ड्रैगन फ्रूट की खेती की जानकारी हासिल की और सोलापुर जिले के पंढरपुर तालुका से 6 हजार पौधे मंगवाए. इनमें से करीब साढ़े पांच हजार पौधों की खेत में रोपाई की गई.

किसान नारायण गोरे ने भी ड्रैगन फ्रूट की बाग के लिए जरूरी पोल और स्ट्रक्चर खुद तैयार किया. इससे उनके खेती के खर्च में करीब 25 से 30 प्रतिशत तक की बचत हुई. 6 हजार पौधों के लिए परिवहन समेत करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च हुए. अब साढ़े पांच हजार पौधों से पहली ही बार में करीब साढ़े सात से आठ लाख रुपये की आमदनी होने का अनुमान नारायण गोरे ने जताया है.

दूसरे किसानों के लिए बने प्रेरणा

इन दोनों किसानों की बाग में दो पोल के बीच करीब 10 पौधे लगाए गए हैं. कम बारिश और पानी की उपलब्धता की चुनौती को देखते हुए दोनों किसानों ने ड्रैगन फ्रूट को एक बेहतर वैकल्पिक फसल के रूप में चुना है. ड्रैगन फ्रूट को स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद फल माना जाता है और बाजार में इसकी मांग भी लगातार बनी हुई है. ऐसे में बाजार की मांग, कम पानी की जरूरत और अच्छी कीमत को देखते हुए ड्रैगन फ्रूट किसानों के लिए अतिरिक्त आय का एक विकल्प बन सकता है.

खास बात यह है कि इन किसानों ने केवल खेती करने तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि बाजार की मांग को समझते हुए फसल का उत्पादन और बिक्री दोनों की योजना बनाई है. खुद स्ट्रक्चर तैयार कर लागत कम करना, मोबाइल से आधुनिक खेती की जानकारी लेना-इन प्रयासों से पिठोरी सिरसगांव के किसानों ने खेती में नया प्रयोग किया है. साथ ही किसानों की यह पहल दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणादायक साबित हो रही है. (गौरव विजय साली की रिपोर्ट)

MORE NEWS

Read more!