
आजकल दिल्ली और इसके आस-पास के इलाकों में स्वाइन फ्लू यानी H1N1 संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. इसी ख़बर को ध्यान में रखते हुए, गाजियाबाद के उप मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ. हरिवंश सिंह के मुताबिक आम जनता और सूअर पालने वाले लोगों को बहुत एहतियात बरतने की सख्त जरूरत है. अक्सर लोगों के मन में यह बात बैठ जाती है कि स्वाइन फ्लू सिर्फ सूअरों से ही फैलता है, लेकिन असल में ऐसा नहीं है. यह साफ तौर पर समझ लेना चाहिए कि हर H1N1 संक्रमण सीधे सूअर से नहीं आता. आजकल इंसानों में जो H1N1 वायरस मिल रहा है, वह मुख्य रूप सेमौसमी फ्लू का ही हिस्सा है.दूसरी तरफ, सूअरों में भी इन्फ्लुएंजा-ए वायरस के अलग-अलग रूप पाए जा सकते हैं. इसलिए, इंसान हों या सूअर,दोनों को इस बीमारी से बचाने के लिए साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखना बेहद जरूरी है.
सूअर पालने वाले लोगों को अपने फार्म पर खास ध्यान देना होगा. डॉ. हरिवंश के अनुसार, अगर किसी भी सूअर में खांसी, लगातार छींक आना, नाक से पानी बहना, आंखों का लाल होना, तेज बुखार या खाना-पीना कम करने जैसे लक्षण दिखें, तो उसे फौरन बाकी स्वस्थ जानवरों से अलग कर दें. बीमार जानवर को अलग बाड़े में रखें और तुरंत नजदीकी पशु डॉक्टर को खबर दें. इसके अलावा, फार्म के अंदर अनजान लोगों या दूसरे व्यापारियों की एंट्री पर सख्ती से रोक लगा दें. बाजार से नया सूअर लाएं, तो उसे सीधे पुराने झुंड में न मिलाएं. नए जानवर को कुछ दिन अलग रखकर डॉक्टर से जांच कराएं. फार्म की साफ-सफाई का खास खयाल रखें, फर्श और पानी के बर्तन रोजाना अच्छे कीटाणुनाशक से साफ करें. बाड़े में ताजी हवा आने का पूरा इंतजाम हो, लेकिन सीधी ठंडी हवा और भीड़भाड़ से जानवरों को बचाकर रखना भी उतना ही जरूरी है.
सूकर फार्म में काम करने वाले मजदूरों और कर्मचारियों की अपनी सेहत का खयाल रखना भी बहुत अहम है. डॉ. हरिवंश के मुताबिक, अगर किसी भी कर्मचारी को बुखार, खांसी, गले में खराश या जुकाम की शिकायत हो, तो उसे सूअरों के पास जाने से फौरन रोक देना चाहिए। कई बार इंसानों का फ्लू सूअरों में और सूअरों का फ्लू इंसानों में फैलने का बड़ा खतरा रहता है. बीमार जानवरों की देखभाल करते समय अपनी हिफाजत के लिए मास्क, दस्ताने और सुरक्षा वाले कपड़े जरूर पहनें. काम खत्म करने के बाद हाथों को साबुन और साफ पानी से बहुत अच्छी तरह धोना चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी देसी इलाज न करें. अगर फार्म में एक साथ कई सूअर अचानक बीमार पड़ने लगें या उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो, तो इसे अनदेखा न करें. तुरंत पशुपालन विभाग को बताएं और जानवरों की खरीद-बिक्री फौरन रोक दें.
जो लोग सूअर का मांस खाते हैं, उन्हें भी कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए और इस बारे में सही मालूमात होना बहुत जरूरी है. आम लोगों को यह गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए कि सूअर का मांस खाने से स्वाइन फ्लू होता है.अगर मांस को सही तरीके से साफ करके और अच्छी तरह पकाकर खाया जाए, तो बीमारी फैलने का कोई पक्का सबूत आज तक नहीं है. फिर भी, अपनी सेहत के लिए कुछ जरूरी सावधानियां अपनाना लाजिमी है. हमेशा उसी भरोसेमंद दुकान से गोश्त खरीदें जहां साफ-सफाई का पूरा खयाल रखा जाता हो. कच्चा या आधा पका मांस बिल्कुल न खाएं. घर की रसोई में कच्चे मांस को काटने वाले चाकू और बर्तनों को पके हुए खाने के बर्तनों से एकदम अलग रखें. कच्चे मांस को छूने के बाद हमेशा अपने हाथ साबुन से धोएं. इस बात का भी पूरा ध्यान रखें कि बीमार या मरे हुए सूअर का मांस न तो खुद खाएं और न बिकने दें.
अगर किसी इंसान में फ्लू जैसे लक्षण नजर आते हैं, तो उसे हल्के में बिल्कुल नहीं लेना चाहिए। तेज बुखार, लगातार खांसी, गले में दर्द, नाक बहना, बदन दर्द या बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस होने पर फौरन किसी अच्छे डॉक्टर से अपना चेकअप करवाएं. घर के बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को ज्यादा सावधान रहना चाहिए। अगर सांस लेने में जरा भी दिक्कत हो, सीने में दर्द हो या ऑक्सीजन का लेवल गिरने लगे, तो बिना देरी किए सीधे अस्पताल जाएं. बीमार इंसान को सूअरों के आस-पास जाने से हर हाल में बचना चाहिए। आखिर में बस यही अपील है कि इस बीमारी से घबराने या पैनिक करने की कोई जरूरत नहीं है, बल्कि समझदारी दिखाने का वक्त है. अगर हम सब मिलकर इन आसान बातों का पालन करेंगे, तो खुद को और पूरे समाज को पूरी तरह महफूज रख सकेंगे. "सतर्क पशुपालक – स्वस्थ पशु – सुरक्षित समाज" के नारे को हमेशा याद रखें.