
तमिलनाडु के किसान संगठनों ने कर्नाटक के मेकेदातु में कावेरी नदी पर प्रस्तावित बांध के खिलाफ बड़ा आंदोलन करने का ऐलान किया है. तमिलनाडु के सभी किसान संगठनों की समन्वय समिति ने शुक्रवार को कहा कि 20 सितंबर से पांच दिन तक राज्यभर में अभियान चलाया जाएगा. किसान संगठन इस अभियान के जरिए कर्नाटक सरकार की मेकेदातु परियोजना का विरोध करेंगे. किसान संगठनों के अध्यक्ष पी.आर. पांडियन ने यह घोषणा गुरुग्राम में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ हुई करीब पांच घंटे की बैठक के बाद की. बैठक में किसानों से जुड़े कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई.
पांडियन ने कर्नाटक के राजनीतिक नेतृत्व पर आरोप लगाया कि स्थानीय स्तर पर विरोध के बावजूद राजनीतिक फायदे के लिए मेकेदातु परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि किसानों का अभियान पूमपुहार से शुरू होगा. अगर जरूरत पड़ी तो किसान अपनी मांगों को लेकर प्रधानमंत्री से भी मुलाकात करेंगे. उन्होंने कावेरी नदी पर प्रस्तावित बांध का विरोध करते हुए कर्नाटक की ओर से केंद्रीय जल आयोग (CWC) को दी गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR पर भी सवाल उठाए. पांडियन ने इसे 'धोखाधड़ी' बताते हुए कहा कि इसमें तमिलनाडु, पुडुचेरी और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) की जरूरी मंजूरी नहीं है. किसान नेता ने केंद्र सरकार से मांग की कि मेकेदातु परियोजना को पर्यावरण और वन मंजूरी नहीं दी जाए. उनका कहना है कि यह परियोजना तमिलनाडु और कर्नाटक, दोनों राज्यों के किसानों के लिए नुकसानदायक हो सकती है.
पांडियन ने मेकेदातु के विकल्प के तौर पर तमिलनाडु के रासिमानल में बांध बनाने का सुझाव दिया. उन्होंने दावा किया कि 2024 में हुई एक संयुक्त बैठक के दौरान दोनों राज्यों के किसान रासिमानल साइट पर सहमत हुए थे. उन्होंने केंद्र सरकार से रासिमानल परियोजना के निर्माण को मंजूरी देने की मांग की. किसान संगठनों का कहना है कि इससे कावेरी के पानी का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है.
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ बैठक में किसानों ने सिर्फ कावेरी मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि MSP की कानूनी गारंटी देने की भी मांग की. पांडियन ने एम.एस. स्वामीनाथन समिति की सिफारिशों को लागू करने की मांग की. इसके अलावा किसानों ने बिजली नियामक आयोग अधिनियम को वापस लेने, स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता खत्म करने और भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव की मांग रखी. पांडियन के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री ने भरोसा दिया कि इन मांगों पर संबंधित विभागों से चर्चा की जाएगी और इन्हें प्रधानमंत्री के सामने भी रखा जाएगा.
किसान संगठनों ने तमिलनाडु की खेती पर अल-नीनो के संभावित असर को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने केंद्र से आपदा प्रबंधन कोष के तहत राज्य को अतिरिक्त आर्थिक सहायता देने की मांग की. इसके साथ ही किसानों ने भूजल स्तर बनाए रखने और आने वाले उत्तर-पूर्वी मॉनसून के पानी का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए जलाशयों से गाद निकालने यानी डीसिल्टिंग के लिए भी फंड देने की मांग की. पांडियन ने दिल्ली की ओर मार्च कर रहे पंजाब के किसानों को हरियाणा बॉर्डर पर हिरासत में लिए जाने की भी निंदा की. उन्होंने कहा कि किसानों से जुड़े मुद्दों का समाधान बातचीत के जरिए किया जाना चाहिए. (PTI)