यूपी में गन्ने की खेती को बूस्ट: टिशू कल्चर तकनीक से तैयार होंगे बीज, ड्रिप इरि‍गेशन पर सामने आई खास जानकारी

यूपी में गन्ने की खेती को बूस्ट: टिशू कल्चर तकनीक से तैयार होंगे बीज, ड्रिप इरि‍गेशन पर सामने आई खास जानकारी

यूपी में गन्ना खेती को बढ़ावा देने के लिए टिशू कल्चर तकनीक से उन्नत बीज तैयार करने और ड्रिप इरिगेशन को बढ़ाने पर जोर दिया गया है. इससे उत्पादन बढ़ने और लागत घटने की बात सामने आई है.

Sugarcane Farming Boost yogi GovtSugarcane Farming Boost yogi Govt
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Apr 28, 2026,
  • Updated Apr 28, 2026, 8:09 PM IST

उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों की आय बढ़ाने और उत्पादन को मजबूत करने के लिए योगी सरकार ने तकनीक आधारित खेती पर फोकस तेज कर दिया है. एक तरफ टिशू कल्चर के जरिए उच्च गुणवत्ता वाले बीज उत्पादन की पहल की गई है, वहीं दूसरी ओर ड्रिप इरीगेशन को बढ़ावा देकर पानी, लागत और उत्पादन तीनों पर सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है. इन दोनों तकनीकों के संयुक्त इस्‍तेमाल से प्रदेश के गन्ना सेक्टर में बड़ा बदलाव आएगा.

टिशू कल्चर से बेहतर बीज और तेज विस्तार पर जोर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश गन्ना अनुसंधान परिषद और बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड के बीच समझौता हुआ है. इस पहल का उद्देश्य टिशू कल्चर तकनीक के जरिए उच्च गुणवत्ता वाले गन्ना बीज का उत्पादन बढ़ाना और किसानों तक उन्नत किस्मों को तेजी से पहुंचाना है. गन्ना आयुक्त मिनिस्थी एस के अनुसार इस तकनीक से बीज उत्पादन अधिक शुद्ध, तेज और प्रभावी होगा, जिससे किसानों को बेहतर पैदावार के अवसर मिलेंगे.

किसानों को मिलेगा आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण

एमओयू के तहत किसानों, मिल कर्मियों और तकनीकी स्टाफ को टिशू कल्चर लैब और ग्रीन हाउस संचालन की ट्रेनिंग दी जाएगी. इसमें प्लांटलेट तैयार करने, हार्डनिंग और खेत में रोपाई तक की पूरी प्रक्रिया शामिल होगी. 

साथ ही ‘हैंड्स-ऑन’ प्रशिक्षण के जरिए किसानों को सीधे प्रयोगात्मक तरीके से तकनीक समझाई जाएगी, ताकि वे इसे अपने खेतों में आसानी से लागू कर सकें. प्रशिक्षण मॉड्यूल में रसायनों, उपकरणों और आधुनिक खेती के तरीकों पर भी विशेष जोर रहेगा.

ड्रिप इरीगेशन से 25 प्रतिशत तक बढ़ी पैदावार

दूसरी ओर, गन्ना विकास विभाग द्वारा ड्रिप इरीगेशन को बढ़ावा देने से किसानों को सीधे फायदा मिला है. विभाग के अनुसार, पिछले 9 वर्षों में 73,078 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रिप सिस्टम स्थापित किया गया है. जिन किसानों ने इसे अपनाया है, उनके गन्ना उत्पादन में 25 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है. यह तकनीक बूंद-बूंद पानी देकर सिंचाई करती है, जिससे करीब 50 प्रतिशत पानी और उर्वरकों की बचत हो रही है.

कम बारिश और क्षारीय जमीन में भी खेती संभव

ड्रिप इरीगेशन के चलते उन क्षेत्रों में भी गन्ने की खेती संभव हो सकी है, जहां कम बारिश या क्षारीय मिट्टी की समस्या थी. इससे खेती का दायरा बढ़ा है और ज्यादा किसान इस तकनीक को अपना रहे हैं. पानी और खाद की बचत से लागत घटने के साथ किसानों की आय में भी सुधार हुआ है.

इथेनॉल उत्पादन में भी बड़ा उछाल

गन्ना विभाग के मुताबिक, प्रदेश में इथेनॉल उत्पादन क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. वर्ष 2017 तक जहां 37 चीनी मिलों में कुल क्षमता लगभग 88 करोड़ लीटर थी और उत्पादन 42 करोड़ लीटर के आसपास था, वहीं अब 53 मिलों में क्षमता बढ़कर करीब 258 करोड़ लीटर वार्षिक हो गई है. वर्तमान उत्पादन 137 करोड़ लीटर तक पहुंच चुका है, जिससे गन्ना आधारित उद्योग को नई मजबूती मिली है.

तकनीक आधारित खेती से बदल रहा गन्ना सेक्टर

टिशू कल्चर और ड्रिप इरीगेशन जैसी आधुनिक तकनीकों के संयोजन से उत्तर प्रदेश में गन्ना खेती अधिक वैज्ञानिक और लाभकारी बनती जा रही है. सरकार का फोकस किसानों को प्रशिक्षण, बेहतर बीज और संसाधन उपलब्ध कराकर उत्पादन बढ़ाने पर है, जिससे प्रदेश का चीनी उद्योग और किसानों की आय दोनों मजबूत हो सकें.

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