महंगे दामों के बावजूद खरीफ के लिए पर्याप्त खाद, भारत 64 लाख टन यूरिया करेगा आयात

महंगे दामों के बावजूद खरीफ के लिए पर्याप्त खाद, भारत 64 लाख टन यूरिया करेगा आयात

वैश्विक कीमतें बढ़ने के बावजूद खरीफ सीजन में उर्वरकों की कमी नहीं होगी. भारत 64 लाख टन यूरिया आयात करेगा, कीमतें जस की तस रहेंगी.

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क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Apr 27, 2026,
  • Updated Apr 27, 2026, 6:13 PM IST

दुनिया के बाजार में खादों की कीमतें बढ़ने और पश्चिम एशिया में जारी संकट के बावजूद भारत ने आगामी खरीफ सीजन के लिए इसकी आपूर्ति को लेकर पूरी तैयारी कर ली है. सरकार ने साफ किया है कि किसानों को खादों की कोई कमी नहीं होगी और यूरिया, डीएपी की खुदरा कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी.

सरकार ने बताया है कि इस खरीफ सीजन में भारत करीब 64 लाख टन यूरिया और 19 लाख टन अन्य खाद आयात करेगा. पश्चिम एशिया संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खादों की कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं, जिससे आयात पर खर्च बढ़ा है, लेकिन इसका असर किसानों पर नहीं पड़ने दिया जाएगा.

खादों के दाम पहले जैसे ही रहेंगे

उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने मंत्रालयों के बीच हुई एक ब्रीफिंग में कहा कि यूरिया और डीएपी की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) में कोई बदलाव नहीं किया गया है.

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “यूरिया और DAP जैसे उर्वरकों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है. ये पहले के तय दामों पर ही उपलब्ध रहेंगे.”

फिलहाल, यूरिया 45 किलो का बैग 266.50 रुपये में, डीएपी 50 किलो का बैग 1,350 रुपये में बेचा जा रहा है.

आयात की स्थिति और सप्लाई

सरकार के अनुसार, संकट शुरू होने के बाद अब तक 9.4 लाख टन यूरिया देश में पहुंच चुका है. फरवरी में जारी एक वैश्विक टेंडर के जरिए 13.07 लाख टन यूरिया और सुनिश्चित किया गया था. इसके अलावा 25 लाख टन यूरिया के लिए एक और टेंडर जारी किया गया है, जिसकी आपूर्ति मई में होने की उम्मीद है.

अधिकारियों ने बताया कि यूरिया का अधिकांश आयात होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते हो रहा है. बावजूद इसके, सरकार को भरोसा है कि सप्लाई समय पर और बिना रुकावट जारी रहेगी.

घरेलू उत्पादन में आई तेजी

घरेलू स्तर पर मार्च महीने में गैस की सप्लाई में आई बड़ी रुकावट (फोर्स मेज्योर) की वजह से यूरिया उत्पादन प्रभावित हुआ था. उस समय खाद प्लांटों की क्षमता पहले से घटकर 60–65 प्रतिशत रह गई थी. हालांकि अब स्थिति में सुधार हुआ है. सरकार ने महंगी दरों पर भी गैस आयात की व्यवस्था की है. इसके चलते यूरिया इकाइयों के लिए गैस की उपलब्धता बढ़कर 97 प्रतिशत तक पहुंच गई है.

इसका नतीजा यह हुआ कि संकट के बाद घरेलू यूरिया उत्पादन बढ़कर 35.4 लाख टन तक पहुंच गया.

गैर-यूरिया उर्वरकों की भी पूरी तैयारी

खरीफ सीजन के चरम समय में मांग पूरी करने के लिए सरकार ने 19 लाख टन गैर-यूरिया खाद के आयात के लिए भी वैश्विक टेंडर जारी किया है. इसमें शामिल हैं-
12 लाख टन डीएपी, 4 लाख टन ट्रिपल सुपर फॉस्फेट (TSP) और 3 लाख टन अमोनियम सल्फेट.

सरकार ने संकेत दिया है कि घरेलू उत्पादन और मांग की समीक्षा के बाद जरूरत पड़ने पर आगे और आयात भी किया जा सकता है.

फिलहाल स्थिति मजबूत

1 अप्रैल से 26 अप्रैल के बीच खादों की उपलब्धता जरूरत से कहीं अधिक रही. इसमें शामिल है-

यूरिया: उपलब्ध 71.58 लाख टन, जरूरत 18.17 लाख टन
डीएपी: उपलब्ध 22.35 लाख टन, जरूरत 5.90 लाख टन
एमओपी (पोटाश): 12.46 लाख टन
एसएसपी: 26.26 लाख टन

खरीफ 2026 के लिए पर्याप्त स्टॉक

खरीफ 2026 सीजन के लिए खादों की कुल जरूरत 390.54 लाख टन आंकी गई है. इसके मुकाबले 190.21 लाख टन का शुरुआती स्टॉक पहले से मौजूद है, जो सीजन की जरूरत का लगभग 49 प्रतिशत है. अपर्णा शर्मा ने कहा, “खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की आपूर्ति की स्थिति बेहद मजबूत है. अब तक किसी भी हिस्से से कमी की कोई शिकायत नहीं मिली है.”

सरकार का भरोसा

उर्वरक विभाग ने दोबारा दोहराया कि देश की उर्वरक सुरक्षा मजबूत, स्थिर और सुव्यवस्थित बनी हुई है. सभी प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता लगातार मांग से अधिक है, जिससे किसानों को खेती के दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा.

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