
योगी सरकार किसानों के हित में कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है. इसी कड़ी में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने सख्त रूख अपनाया है. प्रदेश सरकार ने अनुदानित खाद के साथ गैर-अनुदानित उत्पादों की जबरन बिक्री यानी टैगिंग पर पूरे प्रदेश में पूरी तरह रोक लगा दी है. अब उर्वरक विक्रेता किसानों को खाद के साथ दवा, स्प्रे या अन्य कोई गैर-जरूरी सामान खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकेंगे. वहीं शासन ने उर्वरक विक्रय प्राधिकार पत्र में अंकित समस्त गैर-अनुदानित उत्पादों की आपूर्ति एवं बिक्री को 1 जनवरी, 2026 से उत्तर प्रदेश में पूर्णतया प्रतिबंधित करने के प्रस्ताव पर अपनी स्वीकृति दे दी है. अब उर्वरक कंपनियों को केवल अनुदानित उर्वरकों की बिक्री की अनुमति होगी, जिससे किसानों को केवल वही खाद खरीदनी होगी जिसकी उन्हें वास्तव में आवश्यकता है.
इसके अतिरिक्त,राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कृषि क्षेत्र की क्षमता, कौशल विकास और उत्पादन वृद्धि की योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु कुल 383.00 लाख रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है. इस धनराशि का उपयोग मुख्य रूप से कृषि परियोजनाओं के अनुरक्षण और कंप्यूटर हार्डवेयर की खरीद के लिए किया जाएगा, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली में आधुनिकता और कुशलता आएगी.
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में नवीन अवस्थापनाओं और परिसंपत्तियों के विकास को रफ्तार देने के लिए सरकार ने 1098.02 लाख रुपये (दस करोड़ अट्ठानवे लाख दो हजार मात्र) की राशि स्वीकृत की है.
इस बजट के माध्यम से प्रदेश में कृषि विभाग की विभिन्न परियोजनाओं को धरातल पर उतारा जाएगा, जिससे ग्रामीण स्तर पर कृषि संबंधी आधारभूत ढांचे का विस्तार होगा. यह कदम राज्य के किसानों की आय बढ़ाने और आधुनिक संसाधनों तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा.
कृषि मंत्री शाही ने बताया कि प्रदेश सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और उर्वरकों के वितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में यूरिया, डीएपी और एनपीके की कुल उपलब्धता 140 लाख मीट्रिक टन से अधिक है.
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