होरमुज संकट के बीच रूस का बड़ा प्रस्ताव, ग्लोबल साउथ देशों को देगा खाद और कृषि सहायता

होरमुज संकट के बीच रूस का बड़ा प्रस्ताव, ग्लोबल साउथ देशों को देगा खाद और कृषि सहायता

होरमुज जलडमरूमध्य संकट के कारण वैश्विक खाद सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे एशिया में बुवाई पर खतरा मंडरा रहा है. इस बीच रूस ने ग्लोबल साउथ देशों को खाद और कृषि उत्पाद उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया है. बढ़ती कीमतों और सप्लाई संकट के बीच यह कदम कई देशों के लिए राहत बन सकता है.

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क‍िसान तक
  • Noida,
  • Apr 01, 2026,
  • Updated Apr 01, 2026, 10:05 AM IST

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और खेती पर दिखने लगा है. खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से खाद और ऊर्जा की सप्लाई प्रभावित हुई है. ऐसे मुश्किल समय में रूस ने ग्लोबल साउथ और पूर्वी देशों को खाद और कृषि उत्पाद देने का प्रस्ताव रखा है, जिससे कई देशों को राहत मिल सकती है.

होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट क्या है

होर्मुज जलडमरूमध्य एक बहुत महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल, गैस और खाद का व्यापार होता है. लेकिन पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण इस रास्ते को बंद करना पड़ा है. इससे वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ा है.

खाद सप्लाई पर बड़ा असर

रूस के वरिष्ठ अधिकारी अलेक्जेंडर वेनेदिक्तोव के अनुसार, इस जलडमरूमध्य के बंद होने से दुनिया की करीब 50 प्रतिशत खाद की सप्लाई रुक गई है. इसका सीधा असर एशिया के देशों पर पड़ सकता है, जहां खेती का सीजन शुरू होने वाला है. अगर समय पर खाद नहीं मिली, तो फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है.

कीमतों में तेज बढ़ोतरी

इस संकट का असर केवल सप्लाई तक सीमित नहीं है, बल्कि कीमतों पर भी पड़ा है. नाइट्रोजन आधारित खाद की कीमतों में करीब 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. इससे किसानों की लागत बढ़ेगी और खेती करना महंगा हो सकता है.

रूस का मदद का प्रस्ताव

ऐसे कठिन समय में रूस ने ग्लोबल साउथ और पूर्वी देशों के लिए मदद का हाथ बढ़ाया है. रूस ने कहा है कि वह इन देशों को खाद और अन्य कृषि उत्पाद उपलब्ध कराने के लिए तैयार है. इसके अलावा, रूस ने बहुआयामी सहयोग की भी बात कही है, जिससे कृषि क्षेत्र को मजबूत किया जा सके.

खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा

इस पूरे संकट ने वैश्विक खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है. जो देश आयात पर ज्यादा निर्भर हैं, उनके लिए स्थिति और गंभीर हो सकती है. खासकर विकासशील देशों को इस संकट का ज्यादा असर झेलना पड़ सकता है.

कृषि क्षेत्र के लिए चुनौती

अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो किसानों के सामने कई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं. समय पर खाद नहीं मिलने से उत्पादन घट सकता है और खाद्य संकट भी गहरा सकता है. ऐसे में सरकारों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है.

होर्मुज संकट ने यह दिखा दिया है कि वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन कितनी संवेदनशील है. रूस का यह प्रस्ताव कई देशों के लिए राहत लेकर आ सकता है, लेकिन इस स्थिति का स्थायी समाधान तभी संभव है जब क्षेत्र में शांति बहाल हो. आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दुनिया इस संकट से कैसे निपटती है और कृषि व खाद्य सुरक्षा को कैसे बनाए रखती है.

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