
राजधानी दिल्ली में गोबर के वैज्ञानिक प्रबंधन और यमुना नदी को प्रदूषण से बचाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में दिल्ली नगर निगम (MCD) और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के बीच कंप्रेस्ड बायो गैस (CBG) प्लांट लगाने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए. इस पहल का उद्देश्य गोबर को ऊर्जा और जैविक खाद में बदलना, यमुना में प्रदूषण कम करना और पशुपालकों की अतिरिक्त आय सुनिश्चित करना है.
समझौते के तहत दिल्ली में गोबर के कलेक्शन, ट्रांसपोर्ट और वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेसिंग की व्यवस्था तैयार की जाएगी. गोबर से कंप्रेस्ड बायो गैस तैयार की जाएगी, जबकि प्रोसेसिंग के बाद बचने वाले अवशेष का इस्तेमाल हाई क्वालिटी वाली जैविक खाद बनाने में होगा. कार्यक्रम में केंद्रीय पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह), दिल्ली के उप राज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित केंद्र और दिल्ली सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.
अमित शाह ने कहा कि यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए प्रदूषण के सभी स्रोतों को रोकना जरूरी है. उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि दिल्ली का गोबर यमुना में न पहुंचे, बल्कि उसका वैज्ञानिक तरीके से इस्तेमाल किया जाए. उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र और दिल्ली सरकार मिलकर दिसंबर 2028 तक ऐसा प्रयास कर रही हैं कि यमुना में एक भी लीटर गंदा पानी न पहुंचे.
गृह मंत्री ने बताया कि दिल्ली में सीवर और औद्योगिक अपशिष्ट के उपचार के लिए करीब 80 ट्रीटमेंट प्लांट्स पर काम शुरू हो चुका है. इसके साथ ही गोबर के वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था विकसित होने से यमुना में जैविक प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी.
CBG संयंत्रों में तैयार होने वाली कंप्रेस्ड बायो गैस का उपयोग परिवहन, उद्योग और अन्य ऊर्जा जरूरतों के लिए किया जा सकेगा. इसे प्राकृतिक गैस का हरित विकल्प माना जाता है, जिससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी. गैस उत्पादन के बाद बचने वाला अवशेष जैविक खाद के रूप में किसानों के लिए उपलब्ध होगा, जिससे प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
अमित शाह ने कहा कि इस योजना का सीधा लाभ पशुपालकों को मिलेगा. समझौते के तहत गोबर उपलब्ध कराने वाले पशुपालकों को प्रति किलोग्राम गोबर के लिए एक रुपये का भुगतान किया जाएगा. इससे गोबर केवल अपशिष्ट नहीं रहेगा, बल्कि डेयरी किसानों और पशुपालकों के लिए अतिरिक्त आय का माध्यम बनेगा.
इस परियोजना के तहत दिल्ली के नांगली, घोघा-गोयला और गाजीपुर में गोबर प्रोसेसिंग और वेस्ट मैनेजमेंट से जुड़े प्रोजेक्ट्स विकसित किए जाएंगे. इन केंद्रों पर गोबर से बायो गैस और जैविक खाद तैयार की जाएगी, जिससे खुले में गोबर के फैलने की समस्या कम होगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा.
राजधानी में बड़ी संख्या में डेयरी और पशुपालन गतिविधियां संचालित होती हैं. अनुमान है कि दिल्ली में करीब सवा लाख मवेशियों से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में गोबर निकलता है. नई व्यवस्था के तहत इस गोबर का संग्रहण, परिवहन और वैज्ञानिक प्रसंस्करण किया जाएगा, जिससे नालों और जल स्रोतों के जरिए यमुना में पहुंचने वाले प्रदूषण को कम किया जा सकेगा.
अमित शाह ने कहा कि यदि यह मॉडल सफल रहता है तो इसे देश के अन्य बड़े शहरों में भी लागू किया जा सकता है. उनका कहना था कि यह पहल स्वच्छता, अपशिष्ट प्रबंधन, हरित ऊर्जा, जैविक खेती और पशुपालकों की आय बढ़ाने जैसे कई राष्ट्रीय उद्देश्यों को एक साथ आगे बढ़ाने में मदद करेगी. MCD और NDDB की साझेदारी को उन्होंने स्थानीय निकायों और तकनीकी संस्थाओं के सहयोग का प्रभावी उदाहरण भी बताया. (जितेंद्र सिंह की रिपोर्ट)