
फर्टिलाइजर क्षेत्र की सरकारी कंपनियों (PSU) में हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया को लेकर संसद की एक समिति ने केंद्र सरकार के काम के तरीके पर सवाल उठाए हैं. केमिकल्स और फर्टिलाइजर से जुड़ी स्टैंडिंग कमेटी ने कहा है कि उसकी कई महत्वपूर्ण सिफारिशों पर सरकार ने स्पष्ट जवाब नहीं दिया.
सोमवार को संसद में पेश की गई समिति की ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ के मुताबिक, फर्टिलाइजर विभाग ने समिति की 18 सिफारिशों में से केवल चार पर ही स्पष्ट जवाब दिया. वहीं 11 सिफारिशों पर विभाग के जवाब अधूरे पाए गए, जिसके चलते समिति को अपनी पुरानी सिफारिशें दोबारा दोहरानी पड़ीं.
समिति के अध्यक्ष और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद कीर्ति आजाद ने कहा कि हाल के वर्षों में संसदीय समितियों को मिलने वाले सरकारी जवाबों की क्वालिटी में गिरावट आई है. उनका कहना है कि कई मामलों में सरकार जवाबदेही से बचती दिख रही है और समय पर जवाब भी नहीं दिए जा रहे हैं.
रिपोर्ट में सबसे ज्यादा चिंता फर्टिलाइजर PSU के डिसइन्वेस्टमेंट को लेकर जताई गई है. समिति ने कहा कि अभी तक यह तय नहीं हुआ है कि फर्टिलाइजर सेक्टर को रणनीतिक क्षेत्र (Strategic Sector) माना जाए या नहीं. इसके बावजूद विनिवेश की प्रक्रिया आगे बढ़ती दिख रही है.
समिति ने सरकार से पूछा है कि फर्टिलाइजर सेक्टर को क्लासिफाई करने की मौजूदा स्थिति क्या है और अंतिम फैसला होने तक सरकारी कंपनियों के हितों की रक्षा के लिए कौन से अंतरिम कदम उठाए जा रहे हैं. समिति ने यह भी कहा कि देश की भविष्य की फर्टिलाइजर जरूरतों का विस्तार से आकलन किए बिना डिसइन्वेस्टमेंट को आगे बढ़ाना सही नहीं है. उसने दोहराया कि किसी भी फैसले से पहले उत्पादन क्षमता, खपत के रुझान, आयात पर निर्भरता और कच्चे माल (फीडस्टॉक) की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए पूरी स्टडी कराई जानी चाहिए.
रिपोर्ट में फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स त्रावणकोर लिमिटेड (FACT) और मद्रास फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (MFL) के पुराने लोन री-स्ट्रक्चरिंग की सिफारिश पर भी सरकार के जबाव को स्पष्ट नहीं बताया गया है. समिति का कहना है कि विभाग ने केवल इस सुझाव को नोट किया, लेकिन कोई ठोस योजना या प्रस्ताव नहीं बताया.
असम के नामरूप में नए अमोनिया-यूरिया कॉम्प्लेक्स को मंजूरी मिलने का स्वागत करते हुए भी समिति ने कहा कि देशभर में पुराने हो चुके फर्टिलाइजर प्लांटों के आधुनिकीकरण के लिए बड़ी योजना की जरूरत है. समिति के अनुसार, सभी फर्टिलाइज़र PSU में 25 साल से अधिक पुराने 27 यूरिया प्लांट और 50 साल से अधिक पुराने सात प्लांट मौजूद हैं, लेकिन उनके अपडेशन के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.
इसके अलावा समिति ने हल्दिया और दुर्गापुर की बंद फर्टिलाइजर फैक्ट्रियों को फिर से शुरू करने, फर्टिलाइजर PSU की जमीन-जायदाद का राष्ट्रीय स्तर पर ऑडिट कराने और लंबे समय से पेंडिंग डिसइन्वेस्टमेंट प्रस्तावों की समीक्षा के लिए व्यवस्था बनाने जैसी सिफारिशों पर भी सरकार के जवाब को सही नहीं बताया.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि प्रोजेक्ट्स एंड डेवलपमेंट इंडिया लिमिटेड (PDIL) के रणनीतिक विनिवेश की दो कोशिशें पहले ही नाकाम हो चुकी हैं और अब तीसरी प्रक्रिया शुरू नहीं किए जाने की संभावना है. हालांकि समिति का कहना है कि सरकार ने कोयला गैसीफिकेशन और इंजीनियरिंग सेवाओं जैसे क्षेत्रों में PDIL की भूमिका मजबूत करने के विकल्पों पर गंभीरता से विचार नहीं किया है. समिति ने सरकार से इन सभी मुद्दों पर स्पष्ट रोडमैप पेश करने और अपनी लंबित सिफारिशों पर ठोस कार्रवाई करने की मांग की है.