
हिमाचल प्रदेश के सेब उत्पादक क्षेत्रों में पेड़ों पर कुछ बीमारियों का प्रकोप देखा जा रहा है. इसे देखते हुए डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी (यूएचएफ) के अलग-अलग वैज्ञानिक दल ने पिछले दो सप्ताह से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया है. दौरे के दौरान वैज्ञानिकों ने सेब उगाने वाले किसानों को सेब में अल्टरनेरिया लीफ स्पॉट, मार्सोनिना लीफ ब्लॉच, सेब स्कैब और अन्य बीमारियों की समय पर पहचान और बचाव के उपायों पर विशेष जोर दिया.
वैज्ञानिकों ने सेब बागानों से पत्तियों के नमूने लेकर उनकी जांच की और रोगों व पोषक तत्वों की कमी की पहचान की. इसके आधार पर किसानों को उनके क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुसार उचित सलाह दी गई. निरीक्षण के दौरान कुछ बागानों में मार्सोनिना लीफ ब्लॉच और अल्टरनेरिया रोग का हल्का प्रकोप देखने को मिला. इसके अलावा जड़ सड़न, कॉलर रॉट, पत्तियों के पीले पड़ने, पौधों के मुरझाने और तनों की छाल सड़ने जैसी समस्याओं पर भी वैज्ञानिकों ने किसानों को जानकारी दी. वैज्ञानिकों ने खेतों में अच्छी जल निकासी व्यवस्था बनाए रखने, जलभराव से बचने और बाचव के वैज्ञानिक उपाय अपनाने की सलाह दी.
बागवानों से बातचीत के दौरान यह भी सामने आया कि अधिकांश किसान मिट्टी और पत्तियों की नियमित जांच नहीं करवा रहे हैं. कई किसान खादों का इस्तेमाल वैज्ञानिक सलाह के बजाय अपने अनुभव के आधार पर कर रहे हैं, जिससे पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ रहा है. कई बागानों में फॉस्फेट खादों के अधिक प्रयोग के कारण जिंक की कमी के लक्षण भी पाए गए. इसके अलावा कुछ किसान जरूरत के अनुसार पौध संरक्षण उपाय अपनाने के बजाय पोषक तत्वों के स्प्रे का बहुत अधिक उपयोग कर रहे हैं या बिना तकनीकी सलाह के उन्हें कीटनाशकों के साथ मिला रहे हैं. इससे स्प्रे का असर कम हो सकता है और फसलों में फाइटोटॉक्सिसिटी यानी रासायनिक नुकसान का खतरा भी बढ़ जाता है.
मैदानी इलाकों में निरीक्षण के आधार पर विश्वविद्यालय ने सेब उगाने वाले किसानों के लिए नीचे बताई गई सलाह जारी की है-
रोकथाम के लिए (Prophylactic/Protective Spray)
मेटिराम (Metiram) @ 600 ग्राम/200 लीटर पानी या जिराम (Ziram) @ 500 ग्राम/200 लीटर पानी.
अधिक रोग प्रकोप की स्थिति में
Lustre 5% SE @ 160 मि.ली./200 लीटर पानी या Cabrio Top 60 WG @ 200 ग्राम/200 लीटर या Shamir @ 500 मि.ली./200 लीटर या Kohicap Plus @ 600 मि.ली./200 लीटर या Avtaar @ 500 ग्राम/200 लीटर या Merivon @ 50 मि.ली./200 लीटर या LUNA Experience @ 126 मि.ली./200 लीटर पानी.
वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वैज्ञानिक सलाह पर फफूंदनाशकों का बारी-बारी से (Alternately) प्रयोग करें और उन्हें अन्य कीटनाशकों, सूक्ष्म पोषक तत्वों, ग्रोथ रेगुलेटर या हार्मोनों के साथ न मिलाएं, क्योंकि इससे फाइट टॉक्सिसिटी, फलों पर रसेटिंग (Russeting) और दवाओं के असर में कमी आ सकती है. जरूरत होने पर इनका अलग-अलग प्रयोग किया जाना चाहिए.