
उत्तर प्रदेश में उर्वरकों की बिक्री को लेकर एक नया विवाद सामने आया है. भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने कृषि विभाग को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि प्रदेश के कई जिलों में किसानों को अमोनियम सल्फेट उर्वरक को 'भारत एनपीके' के नाम से बेचकर गुमराह किया जा रहा है. संगठन का कहना है कि यह केवल भ्रामक पैकेजिंग का मामला नहीं है, बल्कि अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह किसानों के साथ धोखाधड़ी और खाद बांटने की व्यवस्था में बड़ी गड़बड़ का संकेत भी हो सकता है. BKU ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. दूसरी ओर खाद कंपनी ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि उर्वरक मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार अमोनियम सल्फेट को एनपीके श्रेणी में शामिल किया गया है और बिक्री पैकेजिंग भी इसी श्रेणी के मानकों के अनुरूप की जा रही है.
BKU (अराजनैतिक) ने प्रमुख सचिव, कृषि विभाग उत्तर प्रदेश को भेजे अपने पत्र में कहा है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों, खासकर मुजफ्फरनगर, बिजनौर, शामली, सहारनपुर, हापुड़ और अन्य गन्ना उत्पादक क्षेत्रों से किसानों की लगातार शिकायतें मिल रही हैं. किसानों का कहना है कि बाजार में जो बैग बिक रहे हैं, उन पर बड़े अक्षरों में 'भारत एनपीके' लिखा हुआ है, जबकि अंदर मौजूद उर्वरक वास्तव में अमोनियम सल्फेट है.
यूनियन का कहना है कि अधिकतर किसान बैग पर बड़े अक्षरों में लिखे नाम को देखकर ही उर्वरक खरीद लेते हैं. वे छोटे अक्षरों में लिखी तकनीकी जानकारी नहीं पढ़ पाते. ऐसे में यदि किसी बैग पर प्रमुखता से 'भारत एनपीके' लिखा हो, तो किसान स्वाभाविक रूप से उसे एनपीके उर्वरक ही समझेगा. इससे किसान गलत उर्वरक खरीद सकता है, जिसका सीधा असर उनकी फसल और आय पर पड़ेगा.
BKU ने अपने पत्र में कहा है कि यह मामला इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि ऐसी शिकायतें मुख्य रूप से गन्ना उत्पादक क्षेत्रों से सामने आ रही हैं. गन्ने की फसल को अच्छी पैदावार के लिए नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश तीनों प्रमुख पोषक तत्वों की जरूरत होती है. यही कारण है कि किसान एनपीके खाद का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन अमोनियम सल्फेट केवल नाइट्रोजन और सल्फर का स्रोत है. इसमें फास्फोरस और पोटाश नहीं होता. यदि किसान इसे एनपीके समझकर खेत में डाल देता है, तो फसल में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी हो सकती है. इससे उत्पादन घट सकता है, क्वालिटी प्रभावित हो सकती है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.
यूनियन ने अपने पत्र में यह भी दावा किया है कि जुलाई महीने में जिन जिलों में मैसर्स एच.यू.आर.एल. (HURL) को पीसीएफ या निजी एजेंसियों के माध्यम से एनपीके उर्वरक की आपूर्ति का जिम्मा दिया गया था, वहां कई स्थानों से एनपीके के बजाय अमोनियम सल्फेट मिलने की शिकायतें आई हैं. हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यूनियन का कहना है कि यदि जांच में यह सही पाया जाता है तो यह उर्वरक वितरण व्यवस्था में गंभीर गड़बड़ियों का मामला होगा.
BKU ने कृषि विभाग को याद दिलाया है कि कृषि निदेशालय उत्तर प्रदेश पहले भी वर्ष 2016 और 2021 में पत्र जारी कर स्पष्ट कर चुका है कि किसी उर्वरक को भ्रामक नाम, पैकेजिंग के साथ बेचना नियमों का उल्लंघन है. ऐसे मामलों में उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कार्रवाई का प्रावधान है. यूनियन का कहना है कि उसे अमोनियम सल्फेट उर्वरक बेचने से कोई आपत्ति नहीं है. आपत्ति केवल इस बात पर है कि यदि किसी उत्पाद को उसकी वास्तविक पहचान छिपाकर या एनपीके जैसा दिखाकर बेचा जा रहा है, तो यह किसानों के साथ छल है. संगठन ने इसकी तुलना करते हुए कहा कि जैसे वनस्पति घी को शुद्ध देसी घी बताकर नहीं बेचा जा सकता, उसी तरह अमोनियम सल्फेट को एनपीके जैसा दिखाकर बेचना भी उचित नहीं है.
BKU ने सरकार से इस पूरे मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की है. संगठन ने कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने, जुलाई में एनपीके आवंटन वाले सभी जिलों से रिपोर्ट मंगाने, संबंधित कंपनियों, थोक और फुटकर विक्रेताओं के स्टॉक की जांच कराने, भ्रामक पैकेजिंग वाले उर्वरकों की बिक्री पर तत्काल रोक लगाने और जांच पूरी होने तक संबंधित बैच की आपूर्ति रोकने की मांग की है.
इसके अलावा यूनियन ने दोषी पाए जाने पर संबंधित कंपनियों के खिलाफ उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कड़ी कार्रवाई करने, भ्रामक पैकेजिंग वाले बैग बाजार से वापस मंगाने, पूरे प्रदेश में विशेष निरीक्षण अभियान चलाने और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग की है. यूनियन का कहना है कि यदि समय रहते इस मामले पर कार्रवाई नहीं की गई तो प्रदेश के लाखों किसानों को आर्थिक नुकसान हो सकता है और उर्वरक वितरण व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े होंगे, इसलिए सरकार को किसान हित में जल्द और निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने चाहिए.
अमोनियम सल्फेट उर्वरक के बैग पर एनपीके (NPK) अंकित होने को लेकर उठ रहे सवालों के बीच हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (HURL) ने स्पष्टीकरण जारी किया है. कंपनी ने कहा है कि उर्वरक विभाग, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार अमोनियम सल्फेट को एनपीके श्रेणी में शामिल किया गया है और बिक्री पैकेजिंग भी इसी श्रेणी के मानकों के अनुरूप की जा रही है. कंपनी के मुताबिक अमोनियम सल्फेट बेचने वाली कई प्रमुख उर्वरक कंपनियां भी इसी व्यवस्था का पालन कर रही हैं.
एचयूआरएल ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि अमोनियम सल्फेट के बैग पर उत्पाद का नाम स्पष्ट रूप से अंकित किया जाता है, जबकि पॉइंट ऑफ सेल (POS) मशीन से जारी रसीद पर भी अमोनियम सल्फेट का ही उल्लेख रहता है. कंपनी का कहना है कि एनपीके का उल्लेख किसी प्रकार से उत्पाद की वास्तविक पहचान छिपाने के लिए नहीं, बल्कि केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित वर्गीकरण और पैकेजिंग मानकों के अनुपालन के तहत किया जा रहा है.
कंपनी ने यह भी कहा कि उर्वरक विभाग की ओर से कोई नया निर्देश जारी होने तक अमोनियम सल्फेट उर्वरक की वर्तमान पैकेजिंग और डिजाइन जारी रहेगी. उल्लेखनीय है कि यह स्पष्टीकरण भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) द्वारा उठाए गए मुद्दे के जवाब में जारी किया गया है.