मेरठ में 23 अप्रैल को लगेगा बासमती बीज मेला, किसानों को मिलेंगी DNA प्रमाणित किस्में

मेरठ में 23 अप्रैल को लगेगा बासमती बीज मेला, किसानों को मिलेंगी DNA प्रमाणित किस्में

मेरठ के मोदीपुरम में 23 अप्रैल को बासमती बीज मेला लगेगा, जहां किसानों को उन्नत और DNA प्रमाणित किस्में तय दर पर मिलेंगी. मेले में कई राज्यों से किसानों के पहुंचने की संभावना है और बीज पहले आओ-पहले पाओ आधार पर वितरित होंगे.

Basmati Beej MelaBasmati Beej Mela
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Apr 21, 2026,
  • Updated Apr 21, 2026, 8:04 PM IST

मेरठ के मोदीपुरम स्थित बासमती निर्यात विकास फाउंडेशन (BEDF) परिसर में 23 अप्रैल 2026 को बासमती बीज बिक्री मेला आयोजित किया जाएगा. एपीडा के तहत होने वाले इस मेले में देश के विभिन्न राज्यों से किसानों के पहुंचने की संभावना जताई गई है. मेले में किसानों को बासमती की उन्नत किस्मों का वितरण पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर किया जाएगा. इसमें पूसा बासमती 1121, 1885, 1718, 1509, 1692, पूसा बासमती 1, 1401 और 1847 जैसी प्रमुख किस्में शामिल रहेंगी.

10 किलो पैक में मिलेंगे बीज

सभी बीज 10 किलोग्राम की पैकिंग में उपलब्ध होंगे. इनकी कीमत 100 रुपये प्रति किलोग्राम तय की गई है. भुगतान केवल QR कोड, ऑनलाइन या डेबिट कार्ड के जरिए ही स्वीकार किया जाएगा.

उच्च गुणवत्ता और प्रमाणित बीज पर जोर

आयोजकों के मुताबिक, किसानों को मेले में उपलब्ध कराए जाने वाले सभी बीज उच्च गुणवत्ता के और DNA प्रमाणित होंगे, जिससे उत्पादन में बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद है.

किसान गोष्ठी भी होगी आयोजित

बीज वितरण के साथ ही मेले में किसान गोष्ठी का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें विशेषज्ञ बासमती की खेती से जुड़ी तकनीकी जानकारी साझा करेंगे.

कई राज्यों से किसानों के आने की उम्मीद

हर साल की तरह इस बार भी पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली और जम्मू से बड़ी संख्या में किसानों के मेले में पहुंचने की संभावना है.

बासमती चावल क्‍यों है खास?

बासमती चावल भारतीय उपमहाद्वीप की खास भौगोलिक परिस्थितियों में उगाई जाने वाली लंबी दाने वाली सुगंधित किस्म है, जिसकी खेती का इतिहास सदियों पुराना माना जाता है. अपने विशेष पकने के गुण, खुशबू और स्वाद के कारण यह दुनिया भर में प्रीमियम चावल के रूप में पहचाना जाता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ-साथ होटल व रेस्टोरेंट उद्योग में इसकी अलग मांग बनी हुई है. 5 फरवरी 2016 से बासमती को भौगोलिक संकेतक (GI) का दर्जा मिला, जिससे इसकी पहचान और शुद्धता को कानूनी सुरक्षा मिली है.

APEDA निभाता है अहम भूमिका

इस GI के पंजीकृत स्वामी के रूप में एपीडा इसकी निगरानी और प्रमाणिकता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निभाता है. इसी उद्देश्य से एपीडा ने Basmati.Net नाम का एक वेब आधारित ट्रेसबिलिटी सिस्टम विकसित किया है, जो उत्पादन से लेकर निर्यात तक पूरी आपूर्ति श्रृंखला को डिजिटल रूप से जोड़ता है. इस प्लेटफॉर्म के जरिए जुड़े सभी हितधारक अपनी गतिविधियों का रिकॉर्ड दर्ज करते हैं, जिससे उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाले बासमती चावल की असलियत और गुणवत्ता की पुष्टि की जा सके.

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