
दुनिया भर में कॉफी की खेती पर अब एक नया संकट मंडरा रहा है. अंतरराष्ट्रीय कॉफी संगठन (ICO) की रिपोर्ट के अनुसार, खाद (फर्टिलाइज़र) की बढ़ती कीमतें किसानों की लागत बढ़ा रही हैं. इसकी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है, जिससे सप्लाई और व्यापार पर असर पड़ रहा है. अगर यही हाल रहा तो आने वाले समय में कॉफी का उत्पादन कम हो सकता है और कीमतें और बढ़ सकती हैं.
कॉफी की अच्छी फसल के लिए खाद बहुत जरूरी होती है. लेकिन अभी खाद की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं. ICO का कहना है कि 2025-26 की फसल पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि किसान पहले ही खाद डाल चुके हैं. लेकिन अगर यही स्थिति जारी रही तो 2026-27 की फसल पर बड़ा असर पड़ सकता है. दुनिया में काफी मात्रा में खाद का व्यापार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होता है, जो अभी तनाव की वजह से प्रभावित है.
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण जहाजों का आना-जाना मुश्किल हो गया है. इससे माल ढुलाई महंगी हो गई है. इसी वजह से मार्च 2026 में कॉफी की कीमतों में फिर से बढ़ोतरी देखी गई. ICO के अनुसार, कॉफी की कीमत 2.3% बढ़कर 273.70 सेंट प्रति पाउंड हो गई. तेल और गैस का बड़ा हिस्सा भी इसी रास्ते से जाता है, जिससे पूरे व्यापार पर असर पड़ता है.
मार्च 2026 में कॉफी की कुछ किस्मों के दाम बढ़े तो कुछ के घटे. कोलंबियन और अन्य माइल्ड कॉफी के दाम बढ़े. ब्राजील की कॉफी के दाम भी ऊपर गए. लेकिन रोबस्टा कॉफी के दाम थोड़े कम हुए. लंदन और न्यूयॉर्क बाजारों में भी कीमतों में अलग-अलग बदलाव देखने को मिला.
इस पूरे बदलाव में भारत को कुछ फायदा हुआ है. वियतनाम जैसे बड़े कॉफी उत्पादक देश में निर्यात कम हुआ, जिससे भारत को मौका मिला. फरवरी 2026 में भारत का कॉफी निर्यात करीब 38.5% बढ़ गया. यह बढ़कर 0.79 मिलियन बैग तक पहुंच गया. इससे भारत के किसानों और व्यापारियों को लाभ मिला.
वैश्विक स्तर पर कॉफी का निर्यात कम हुआ है. फरवरी 2026 में कुल निर्यात 5.7% घटकर 11.46 मिलियन बैग रह गया. ब्राजील और कोलंबिया जैसे बड़े देशों में उत्पादन कम होने से यह गिरावट आई. खासकर दक्षिण अमेरिका में निर्यात में बड़ी कमी देखी गई.
भारत ने इस कठिन समय में अच्छा प्रदर्शन किया है. मार्च 2026 तक भारत का कॉफी निर्यात 2.136 अरब डॉलर तक पहुंच गया. यह एक रिकॉर्ड है. ज्यादा कीमत और थोड़ी ज्यादा मात्रा ने इस बढ़त में मदद की.
कुल मिलाकर, खाद की बढ़ती कीमतें और वैश्विक तनाव कॉफी खेती के लिए चिंता का विषय हैं. हालांकि भारत जैसे देशों के लिए यह एक मौका भी बन रहा है. अगर हालात सुधरे नहीं, तो आने वाले समय में कॉफी महंगी हो सकती है और उत्पादन पर असर पड़ सकता है.
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