
देश में आलू की खपत लगातार बढ़ रही है. बढ़ती जनसंख्या का पेट भरने के लिए आलू सबसे महत्वपूर्ण सब्जी है. किसी को देखते हुए आलू का उत्पादन हर साल बढ़ता ही जा रहा है. अब आलू की ऐसी किस्म का तैयार कर लिया गया है जिसका उत्पादन ही नहीं बेहतर है बल्कि सेहत के लिए भी इसके फायदे ज्यादा है.
वैज्ञानिकों द्वारा विकसित उन्नत किस्म कुफरी उदय किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है. यह लाल रंग की, जल्दी तैयार होने वाली किस्म है, जो खासतौर पर उत्तर भारतीय मैदानों में मुख्य फसल के रूप में उगाई जा रही है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह मात्र 70–75 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसान एक ही सीजन में दो फसलें लेने में सक्षम हो रहे हैं.
कुफरी उदय आलू की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है. यह किस्म प्रति पौधा 8–10 या उससे अधिक कंद देती है और प्रति हेक्टेयर लगभग 35 से 40 टन तक उत्पादन देने की क्षमता रखती है. कम समय में तैयार होने के कारण इसकी फसल जल्दी बाजार में पहुंच जाती है, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिलते हैं.
इस किस्म के आलू का छिलका लाल, आकार अंडाकार और गूदा पीले रंग का होता है. इसकी छोटी आंखें और आकर्षक रूप इसे बाजार में अलग पहचान दिलाते हैं. लाल आलू की मांग उपभोक्ताओं के बीच अधिक होने के कारण किसानों को इसका अच्छा मूल्य मिलता है.
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, कुफरी उदय किस्म धान की कटाई के बाद लगाने के लिए बेहद उपयुक्त है. इसकी कम अवधि (70–75 दिन) के कारण किसान सितंबर के मध्य या अक्टूबर में इसकी बुवाई कर सकते हैं और समय रहते दूसरी फसल भी ले सकते हैं.
यह किस्म लेट ब्लाइट (पछेती झुलसा) जैसे प्रमुख रोगों के प्रति अच्छी प्रतिरोधक क्षमता रखती है. इसके अलावा, इसमें उच्च तापमान को सहन करने की भी क्षमता है, जिससे बदलते मौसम में भी इसकी खेती सुरक्षित रहती है.
कुफरी उदय आलू पोषण के लिहाज से भी बेहतर माना जा रहा है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा अधिक पाई जाती है, साथ ही एंथोसाइनिन जैसे तत्व मौजूद होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार इसमें एंटी-कार्सिनोजेनिक गुण भी पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं.
अंतरराष्ट्रीय पोटैटो सेंटर से जुड़े वैज्ञानिक डॉ अंशुल शर्मा का कहना है कि एरोपॉनिक तकनीक के माध्यम से तैयार किए गए कुफरी उदय के बीज अधिक गुणवत्ता वाले हैं. इस किस्म में उत्पादन क्षमता अन्य पारंपरिक किस्मों की तुलना में अधिक है और भविष्य में इसके जरिए किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है.
कुफरी उदय आलू कम समय में अधिक उत्पादन देने वाली किस्म है. खरीफ में धान की खेती के बाद इसको लगाकर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. वही इसके बाद किसान खेत में गेहूं की फसल भी लगाकर ज्यादा फायदा उठा सकते हैं.