
महाराष्ट्र के अकोला जिले के अकोट क्षेत्र से किसानों की परेशानी की एक बड़ी तस्वीर सामने आई है. खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही यूरिया खाद की मांग तेजी से बढ़ गई है. हालात ऐसे हैं कि किसान रात 3 बजे से ही कृषि केंद्रों के बाहर लाइन लगाकर खड़े हो रहे हैं. उनका मकसद सिर्फ इतना है कि उन्हें समय पर यूरिया की एक बोरी मिल जाए और उनकी फसल प्रभावित न हो.
अकोट के कृषि केंद्रों के बाहर सुबह होने से पहले ही सैकड़ों किसानों की भीड़ जमा हो जाती है. अंधेरे में खड़े किसान इस चिंता में रहते हैं कि कहीं उनका नंबर न छूट जाए. कई किसान पूरी रात वहीं बिताने को मजबूर हैं.
जैसे-जैसे सुबह होती है, किसानों की संख्या भी बढ़ती जाती है. सुबह 5 बजे तक लाइन काफी लंबी हो जाती है. कई जगहों पर नंबर को लेकर बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति भी देखने को मिलती है. किसानों का कहना है कि यदि समय पर यूरिया नहीं मिला तो उनकी फसल को नुकसान हो सकता है.
खरीफ सीजन में कपास, सोयाबीन और अन्य फसलों के लिए यूरिया बेहद जरूरी माना जाता है. यही वजह है कि किसान किसी भी कीमत पर खाद हासिल करना चाहते हैं. उनके लिए यूरिया सिर्फ खाद नहीं बल्कि फसल बचाने का एक महत्वपूर्ण साधन है.
जानकारी के अनुसार अकोला जिले में करीब 7,000 मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है. यह लगभग 2 लाख 14 हजार बैग के बराबर है. इतना स्टॉक होने के बावजूद किसानों की लंबी कतारें कई सवाल खड़े कर रही हैं.
दरअसल अकोट और आसपास का इलाका महाराष्ट्र का प्रमुख कॉटन बेल्ट माना जाता है. यहां बड़ी संख्या में किसान कपास की खेती करते हैं. कपास की फसल में यूरिया की जरूरत अधिक होती है, इसलिए मांग अचानक बढ़ गई है. इसी कारण कृषि केंद्रों पर भारी भीड़ देखने को मिल रही है.
कृषि केंद्र संचालक शरद घुगे का कहना है कि फिलहाल किसानों में खाद की उपलब्धता को लेकर डर का माहौल है. कुछ समय पहले खाद की कमी की खबरों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी थी. इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और खाड़ी देशों में तनाव की खबरों के कारण भी किसानों को आशंका है कि आने वाले दिनों में खाद की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है.
यही वजह है कि किसान पहले से ही यूरिया खरीदकर अपने पास रखना चाहते हैं. बारिश शुरू होने के बाद खेतों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है, इसलिए किसान समय रहते खाद का इंतजाम करने में जुटे हुए हैं.
दो दिन पहले भी अकोट में इसी तरह के हालात देखने को मिले थे. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस तक बुलानी पड़ी थी. लगातार बढ़ती भीड़ और किसानों की चिंता प्रशासन के लिए चुनौती बनती जा रही है.
किसानों का कहना है कि उन्हें समय पर और आसानी से यूरिया उपलब्ध कराया जाए ताकि उन्हें रातभर लाइन में खड़ा न रहना पड़े. फिलहाल अकोला के अकोट में यूरिया को लेकर किसानों की परेशानी जारी है और सभी की नजरें प्रशासन और कृषि विभाग के अगले कदम पर टिकी हुई हैं.
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