रागी उत्पादन में झारखंड को अव्वल बनाने की कोशिश, बांटे जा रहे हैं रागी के बीज

रागी उत्पादन में झारखंड को अव्वल बनाने की कोशिश, बांटे जा रहे हैं रागी के बीज

झारखंड के गुमला जिले में रागी की खेती को लेकर काफी बेहतर कार्य किया गया है. यहां पर मिशन मोड में रागी की खेती को लेकर कार्य किया गया. इसका फायदा यह हुआ कि रागी उत्पादन के मामले में गुमला जिला अव्वल नंबर पर आ गया है

रागी की खेती                फाइल फोटोरागी की खेती फाइल फोटो
पवन कुमार
  • Ranchi,
  • Jul 08, 2023,
  • Updated Jul 08, 2023, 9:21 PM IST

झारखंड में मोटे अनाज की खेती पर जोर दिया जा रहा है. इसके लिए किसानों के बीच मुफ्त में रागी के बीज बांटे जा रहे हैं. इस तरह से किसानों को रागी की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. झारखंड के लिए रागी की खेती कोई नयी चीज नहीं है. यह शुरु से ही हमारी संस्कृति का हिस्सा रहा है. इसका इस्तेमाल दैनिक जीवन के कई महत्वपूर्ण आयोजनों में किया जाता है. पर हाइब्रिड धान की मार्केट में पकड़, रागी के लिए बेहतर बाजार का नहीं होना और इसके विकास को लेकर सरकार की ढुलमुल नीतियों के कारण यह हमारी थाली से दूर हो गया था. पर फिर से इसे वापस थाली में लाने की मुहिम चल रही है. अब यह गरीबों का भोजन भर बन कर रही रहा है जबकि बुद्धिजीवी वर्ग के लोग काफी संख्या में इसका सेवन करने के लिए आगे आ रहे हैं.

झारखंड के गुमला जिले में रागी की खेती को लेकर काफी बेहतर कार्य किया गया है. यहां पर मिशन मोड में रागी की खेती को लेकर कार्य किया गया. इसका फायदा यह हुआ कि रागी उत्पादन के मामले में गुमला जिला अव्वल नंबर पर आ गया है. गुमला जिले में रागी उत्पादन को नई उंचाई तक पहुंचाने वाले जिला कृषि पदाधिकारी अशोक कुमार सिन्हा बताते हैं कि जिले में रागी की खेती और उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए यहां पर इसके वैल्यू एडिशन पर जोर दिया जा रहा है. इससे कई तरह के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं. रागी के अलग-अलग व्यंजन बनाकर इसे लोगों तक पंहुचाया जा रहा है. उन्होंने बताया कि जिले में पहले जहां 1600 हेक्टेयर में रागी की खेती होती थी वहीं अब 3500 हेक्टेयर में इसकी खेती की जा रही है. इस तरह इसका रकबा बढ़ा है.

ठोस रणनीति बनाने की जरुरत

झारखंड जैसे राज्य के लिए रागी की खेती इसलिए भी जरूरी हो जाती है क्योंकि यहां पर कुपोषण एक बड़ी समस्या है. मोटे अनाज की खेती के खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ पोषण सुरक्षा को भी हालि किया जा सकता है. झारखंड किसान महसभा के केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष पंकज कुमार ने कहा कि की भौगोलिक स्थिति यूपी और बिहार से अलग है. ऐसे में यहां पर इसकी खेती करने को लेकर एक ठोस नीति बनाने की जरूरत है. 

 

मार्केट लिंकेज नहीं होना बड़ी परेशानी

पंकज राय ने कहा कि मार्केट लिंकेज का नहीं होना भी एक बड़ा चैलेंज हैं. इसके कारण किसान रागी की खेती नहीं करते हुए सब्जियो की खेती की तरफ चले जाते हैं. इसलिए इस पर भी विशेष ध्यान देना होगा. उन्होंने कहा कि किसान महासभा की तरफ से हजारीबाग और रामगढ़ जिले के किसानों के बीच रागी के बीज बांटे जा रहे हैं.  
 

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