बिहार में गैर-सब्सिडी वाले उर्वरकों की बिक्री पर रोक हटाने की मांग, FAI ने सरकार को लिखी चिट्ठी

बिहार में गैर-सब्सिडी वाले उर्वरकों की बिक्री पर रोक हटाने की मांग, FAI ने सरकार को लिखी चिट्ठी

बिहार में गैर-सब्सिडी वाले उर्वरकों की बिक्री पर लगी रोक हटाने की मांग उठी है. फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FAI) ने राज्य सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा है.

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क‍िसान तक
  • Noida,
  • Oct 15, 2026,
  • Updated Oct 15, 2026, 4:02 PM IST

फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FAI) ने बिहार सरकार से गैर-सब्सिडी वाले उर्वरकों की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाने की अपील की है. संगठन का कहना है कि इस फैसले से किसानों को मिट्टी की सेहत सुधारने और फसलों की बेहतर पैदावार के लिए जरूरी पोषक तत्वों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है. बिहार सरकार ने 8 अक्टूबर को गैर-सब्सिडी वाले उर्वरकों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया था. किसानों ने शिकायत की थी कि उन्हें सब्सिडी वाले यूरिया, डीएपी और कॉम्प्लेक्स उर्वरकों के साथ दूसरे गैर-सब्सिडी उत्पाद भी खरीदने के लिए दिए जा रहे हैं. इससे खेती में इस्तेमाल होने वाले इनपुट की लागत बढ़ रही थी.

FAI ने टैगिंग रोकने की वकालत की

FAI ने बिहार सरकार को लिखे पत्र में कहा कि वह गैर-सब्सिडी वाले उर्वरकों को दूसरे उत्पादों के साथ जोड़कर बेचने यानी टैगिंग की व्यवस्था का लगातार विरोध करता रहा है. संगठन ने साफ किया कि टैगिंग पर रोक लगाने और इन उर्वरकों की बिक्री पूरी तरह बंद करने में अंतर है. 

FAI के मुताबिक, बिक्री पर व्यापक प्रतिबंध लगाने से किसानों के लिए जरूरी पोषक तत्वों की उपलब्धता सीमित हो सकती है. संगठन ने यह भी बताया कि मध्य प्रदेश में इसी तरह का प्रतिबंध लगाया गया था, लेकिन बाद में सरकार ने इसकी समीक्षा कर रोक को केवल टैगिंग तक सीमित कर दिया था.

'मिट्टी की सेहत और पैदावार पर असर होगा'

FAI ने कहा कि सरकार संतुलित उर्वरक इस्तेमाल को प्रोत्साहित कर रही है, ताकि मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहे और कृषि उत्पादकता लंबे समय तक कायम रहे. ऐसे में गैर-सब्सिडी वाले उर्वरकों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध इस लक्ष्य के विपरीत असर डाल सकता है.

संगठन के अनुसार, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन के तहत रासायनिक उर्वरकों, जैव उर्वरकों और जैविक खाद का उचित अनुपात में इस्तेमाल मिट्टी की सेहत बनाए रखने का वैज्ञानिक तरीका है. किसान सब्सिडी वाले उर्वरकों के साथ गैर-सब्सिडी वाले उत्पादों का इस्तेमाल भी फसलों की पोषक तत्व संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए करते हैं.

मिट्टी में जैविक कार्बन कम होने का दिया हवाला

FAI ने मिट्टी से जुड़े आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि बिहार की मिट्टी में जैविक कार्बन का स्तर काफी कम है. मिट्टी की सेहत बनाए रखने के लिए इसका स्तर 0.75 प्रतिशत से अधिक होना चाहिए. इस स्थिति में गोबर की खाद, कंपोस्ट और फसल अवशेषों का इस्तेमाल बढ़ाने के साथ संतुलित उर्वरक प्रबंधन जरूरी है. 

FAI ने यूरिया के जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल से बचने और जैविक तथा अकार्बनिक पोषक तत्वों के संतुलित इस्‍तेामल की जरूरत बताई. संगठन ने चेतावनी दी कि गैर-सब्सिडी वाले उत्पादों पर प्रतिबंध से पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे फसल की पैदावार और मिट्टी की क्‍वालिटी प्रभावित होने का जोखिम है.

उर्वरक कंपनियों के कारोबार पर असर की आशंका: FAI

FAI ने कहा कि कई उर्वरक कंपनियां जैविक और सल्फर आधारित उर्वरकों का उत्पादन करती हैं. बिक्री पर प्रतिबंध से इन कंपनियों की विनिर्माण गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है. संगठन के अनुसार, कंपनियों ने ऐसे उत्पादों की आपूर्ति के लिए विक्रेताओं के साथ समझौते किए हैं, ताकि उर्वरक विभाग के निर्देशों के अनुरूप डीलरों के यहां एक ही जगह विभिन्न प्रकार के उर्वरक उपलब्ध कराए जा सकें.

FAI ने बिहार सरकार से हस्तक्षेप करने और गैर-सब्सिडी वाले उत्पादों समेत सभी उर्वरकों की बिक्री की अनुमति देने का अनुरोध किया है. संगठन का कहना है कि किसानों को उनकी जरूरत के मुताबिक विभिन्न पोषक तत्व उपलब्ध कराना खाद्य सुरक्षा, कृषि उत्पादन और किसानों की आय के लिए महत्वपूर्ण है. (पीटीआई)

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