कमजोर मॉनसून का अनुमान, कम बारिश में फसलों को बचाने के लिए किसानों को जरूरी सलाह

कमजोर मॉनसून का अनुमान, कम बारिश में फसलों को बचाने के लिए किसानों को जरूरी सलाह

इस साल मॉनसून के कमजोर रहने और सामान्य से कम बारिश के अनुमान के बीच किसानों के लिए अलर्ट जारी किया गया है. कम बारिश से फसलों, खासकर बागवानी और सब्जी फसलों को नुकसान का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में किसानों को सही फसल चयन, उन्नत पौध उत्पादन, खेती की पद्धतियों में बदलाव, जैविक खाद के उपयोग और पोषक तत्वों के छिड़काव जैसे उपाय अपनाने की सलाह दी गई है, ताकि फसलों को सूखे से बचाया जा सके.

जायद फसलों का ऐसे रखें ध्यानजायद फसलों का ऐसे रखें ध्यान
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • May 01, 2026,
  • Updated May 01, 2026, 6:28 PM IST

इस साल मॉनसून के दौरान सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है. मौसम विभाग पहले ही इसकी जानकारी दे चुका है. कम बारिश का सीधा असर खेतों की नमी पर पड़ता है, जिससे फसलों के सूखने और नुकसान का खतरा बढ़ जाता है. खास तौर पर बागवानी और सब्जी फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं. ऐसे में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे पहले से तैयारी करें और खेती के तरीकों में बदलाव कर फसलों को नुकसान से बचाएं.

1. सही फसल और किस्म का चुनाव जरूरी

कम बारिश की स्थिति में ऐसी फसलों का चयन करना चाहिए जो कम पानी में भी अच्छी पैदावार दे सकें. विशेषज्ञों के अनुसार वर्षा आधारित खेती के लिए ये सब्जी फसलें ज्यादा उपयुक्त हैं-

  • डोलिकोस बीन
  • लोबिया
  • क्लस्टर बीन (ग्वार)
  • लीमा बीन
  • मिर्च
  • सहजन (ड्रमस्टिक)
  • भिंडी

अगर मॉनसून देर से आए, तो फली वाली सब्जियों की खेती करना फायदेमंद रहता है. साथ ही, जिन फसलों की जड़ें गहराई तक जाती हैं और घनी होती हैं, वे कम बारिश में भी मिट्टी की गहराई से पानी लेकर खुद को बचा सकती हैं. कम समय में तैयार होने वाली फसलों को प्राथमिकता देना बेहतर होता है.

2. पौध उत्पादन की उन्नत तकनीक अपनाएं

कमजोर मॉनसून की स्थिति में नर्सरी में पौध तैयार करने की सही तकनीक बहुत अहम हो जाती है. विशेषज्ञ बताते हैं कि कोकोपीट, नायलॉन जाल, प्रोट्रे, जैव उर्वरक और जैव कीटनाशकों की मदद से स्वस्थ पौधे तैयार किए जा सकते हैं. जब इन मजबूत पौधों को मुख्य खेत में रोपित किया जाता है, तो पौधों के खराब होने की संभावना कम रहती है, जड़ों को कम नुकसान होता है और पौधे सूखे को बेहतर झेल पाते हैं.

3. खेती की पद्धतियों में करें बदलाव

कम बारिश को देखते हुए किसानों को खेती के तरीके बदलने चाहिए. इसके लिए ये उपाय अपनाए जा सकते हैं-

  • कंटूर खेती
  • मिश्रित फसलों की बुवाई
  • कम जुताई (टिलेज)
  • मल्चिंग का प्रयोग

साथ ही पानी का बचाव और दोबारा उपयोग बेहद जरूरी है. खेतों के आसपास गड्ढे खोदकर बारिश का पानी इकट्ठा किया जा सकता है. तालाब, नाले और छोटे जलस्रोतों में पानी जमा कर उसे सूखे की स्थिति में इस्तेमाल किया जा सकता है.

4. जैविक खाद का बढ़ाएं इस्तेमाल

गर्मी और सूखे के समय रासायनिक खादों का ज्यादा इस्तेमाल नुकसानदायक हो सकता है. इससे मिट्टी जल्दी गर्म होती है और नमी तेजी से खत्म हो जाती है. मिट्टी में मौजूद कार्बनिक तत्व भी नष्ट होने लगते हैं. इससे बचने के लिए किसानों को जैविक खाद, हरी खाद, कंपोस्ट खाद का ज्यादा इस्तेमाल करना चाहिए. इससे मिट्टी की संरचना बेहतर होती है, पानी सोखने और रोकने की क्षमता बढ़ती है और फसल को लंबे समय तक नमी मिलती रहती है.

5. सब्जी फसलों का रखें खास ध्यान

कम बारिश और सूखे का सबसे ज्यादा असर सब्जी फसलों पर पड़ता है. पानी की कमी से पौधे सूखने लगते हैं और पोषक तत्वों की कमी हो जाती है. विशेषज्ञों के अनुसार, 
पोटाश और कैल्शियम का छिड़काव, सूक्ष्म पोषक तत्वों (माइक्रो न्यूट्रिएंट्स) का स्प्रे सब्जी फसलों को गर्मी और सूखे से बचाने में मदद करता है. इससे न सिर्फ पौधे स्वस्थ रहते हैं, बल्कि पैदावार और क्वालिटी दोनों में सुधार होता है.

पहले से तैयारी ही बचाव का सबसे अच्छा तरीका

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अनिश्चित और कमजोर मॉनसून के दौर में पहले से की गई तैयारी ही सबसे बड़ा सहारा होती है. सही फसल चयन, उन्नत खेती तकनीक, पानी का संरक्षण और जैविक उपाय अपनाकर किसान कम बारिश के बावजूद फसलों को बचा सकते हैं और नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं.

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