लीची के बागों पर इस खतरनाक कीट का खतरा, समय रहते अपना लें ये आसान उपाय

लीची के बागों पर इस खतरनाक कीट का खतरा, समय रहते अपना लें ये आसान उपाय

अचानक मौसम में हो रहे बदलाव के कारण लीची के बाग में इस कीट का हमला बढ़ गया है, जिससे फल के उत्पादन पर असर पड़ता है. ये कीट लीची के लिए बहुत खतरनाक होता है, जिससे फलों को भारी नुकसान होता है. आइए जानते हैं बचाव के उपाय.

लीची के बागों पर कीट का खतरालीची के बागों पर कीट का खतरा
संदीप कुमार
  • Noida,
  • Apr 30, 2026,
  • Updated Apr 30, 2026, 1:12 PM IST

गर्मी का मौसम आते ही मार्केट में मीठी और स्वादिष्ट लीची मिलने लगती है. अभी मार्केट में फल नहीं आ रहे हैं, लेकिन पेड़ों पर फल आने शुरू हो गए हैं. ऐसे समय में इन पेड़ों की विशेष देखभाल करनी पड़ती है, क्योंकि इस महीने में लीची के बागान में फल बेधक कीट लगने का काफी खतरा होता है. दरअसल, अचानक मौसम में हो रहे बदलाव के कारण ये कीट पौधों पर हमला कर देते हैं जिससे फल के उत्पादन पर असर पड़ता है. ये कीट लीची के लिए बहुत खतरनाक होता है. जिससे फलों को भारी नुकसान होता है. ऐसे में बिहार के लीची किसानों के लिए बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र ने एक एडवाइजरी जारी की है, जिसमें बताया गया है कि किसान फल बेधक कीट से लीची को कैसे बचाएं. आइए जानते हैं आसान टिप्स.

फल बेधक कीट के लक्षण

शाही लीची के लिए फल बेधक कीट बहुत ही खतरनाक होता है, जो सीधे फल को नुकसान पहुंचाता है. यह कीट फल के ऊपर छोटा सा छेद करके अंदर घुस जाता है और गूदे को खाने लगता है. बाहर से फल कभी-कभी ठीक दिखाई देता है, लेकिन अंदर से पूरी तरह खराब हो चुका होता है. इसके कारण फल सड़ने लगते हैं, और फल समय से पहले पेड़ से गिर जाते हैं. अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह कीट 80 फीसदी तक नुकसान पहुंचा सकता है.

फल बेधक कीट से बचाव

शाही लीची में फल बेधक कीट से बचाव के लिए समय पर कदम उठाना बहुत जरूरी है. सबसे पहले पेड़ के नीचे गिरे हुए सड़े-गले फलों को तुरंत हटाकर नष्ट करें, ताकि कीट दोबारा न फैलें. फल लगने के बाद उन्हें कागज या कपड़े की थैली से ढकना (बैगिंग) भी काफी असरदार तरीका है.  इसके अलावा, कीटों पर नजर रखने के लिए फेरोमोन ट्रैप का इस्तेमाल करें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह से सही समय पर कीटनाशक का छिड़काव करें.  इसके लिए आप इन दवाओं का छिड़काव कर सकते हैं.

  • थियाक्लोप्रिड 0.6 मिली प्रति लीटर प्लस लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 0.6 मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें
  • नोवेल्यूरॉन 5.25 फीसदी प्लस इंडोक्साकार्ब 4.5 फीसदी SC 1.5 मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें

ये दवाएं कीटों को नियंत्रित कर फसल को सुरक्षित रखने में मदद करती हैं.

बोरॉन का करें छिड़काव

बोरॉन पौधों के लिए एक जरूरी पोषक तत्व है, जो फलों के सही विकास में मदद करता है. इस समय अगर घुलनशील बोरॉन (21 फीसदी) का पानी में घोल बनाकर छिड़काव किया जाए, तो फलों का आकार बेहतर होता है, उनकी क्वालिटी बढ़ती है और फल झड़ने की समस्या भी कम हो जाती है.  किसान चाहें तो बोरॉन का छिड़काव कीटनाशक के साथ मिलाकर भी कर सकते हैं, जिससे एक ही बार में दोनों काम हो जाते हैं और समय की बचत होती है.

अंतिम छिड़काव कब करें

लीची की फसल को अंतिम समय तक सुरक्षित रखने के लिए तुड़ाई से 10-12 दिन पहले एक अंतिम छिड़काव करना जरूरी है. इससे फल बेधक कीट से आखिरी सुरक्षा मिलती है. इसके लिए किसान इमामेक्टिन बेंजोएट 5 फीसदी SG 0.8 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें. इसके अलावा स्पाइनोसेड 45 फीसदी SC 1.6 मिली प्रति 5 लीटर पानी और स्पिनेटोरम 11.7 फीसदी SC 1.0 मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें. बता दें कि सही मात्रा में इनका उपयोग करने से फसल पूरी तरह सुरक्षित रहती है.

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