अधिक बारिश के चलते गन्ना उपज में गिरावट की आशंका, किसानों को फसल बचाव के तरीके बताए 

अधिक बारिश के चलते गन्ना उपज में गिरावट की आशंका, किसानों को फसल बचाव के तरीके बताए 

इस बार दक्षिण-पश्चिमी मानसून के दौरान प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में कुल बारिश सामान्य से 26 फीसदी अधिक रही है. हालांकि, कुछ जिलों में लगभग 40 फीसदी से भी ज्यादा बारिश दर्ज की गई है. दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में बारिश ज्यादा दर्ज की गई है, जिससे गन्ना फसल की ग्रोथ में कमी आने की आशंका जताई गई है.

नवंबर में गन्ना उत्पादन का पहला अग्रिम अनुमान जारी किया जाएगा. नवंबर में गन्ना उत्पादन का पहला अग्रिम अनुमान जारी किया जाएगा.
रिजवान नूर खान
  • New Delhi,
  • Oct 22, 2024,
  • Updated Oct 22, 2024, 1:29 PM IST

इस बार जमकर मॉनसूनी बारिश दर्ज की गई है, जो कई फसलों के लिए फायदेमंद साबित हुई है, जबकि कुछ फसलों के उत्पादन पर असर पड़ने की बात कही जा रही है. ऐसी ही फसल गन्ना है, जिस पर अधिक बारिश के चलते उपजी स्थितियों का विपरीत असर देखे जाने की आशंका जताई गई है. कृषि एक्सपर्ट के अनुसार महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में अत्यधिक बारिश के चलते फसल उपज में गिरावट देखने को मिल सकती है. हालांकि, किसानों को फसल बचाव के लिए कुछ सुझाव दिए हैं.  

खरीफ सीजन में देशभर में गन्ने की जमकर खेती की गई है. केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार 27 सितंबर तक बुवाई आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल की तुलना में 57 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में अधिक गन्ना की खेती की गई है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार गन्ना का रकबा बीते साल 57.11 लाख हेक्टेयर की तुलना में बढ़कर 57.68 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है. रकबा में बढ़ोत्तरी की वजह केंद्र की ओर से गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य यानी एफआरपी 340 रुपये क्विंटल को मंजूरी देना माना जा रहा है. 

फसल में गिरावट की आशंका 

इस बार दक्षिण-पश्चिमी मानसून के दौरान प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में कुल बारिश सामान्य से 26 फीसदी अधिक रही है. हालांकि, कुछ जिलों में लगभग 40 फीसदी से भी ज्यादा बारिश दर्ज की गई है. दूसरी ओर उत्तर प्रदेश में बारिश सामान्य श्रेणी में रही है. महाराष्ट्र में कुछ जिलों के निचले इलाकों में जल भराव देखा गया है, जिससे गन्ने की फसल कई सप्ताह तक डूबी रही है. शुरुआती फसल आकलन से पता चला है कि डूब वाले इलाकों में गन्ना फसल की बढ़ोत्तरी में कमी की आशंका है. हालांकि, राज्य भर में कुल खड़ी फसल की स्थिति सामान्य बताई गई है. 

कई राज्यों में आकलन शुरू 

2024-25 के लिए पेराई शुरू होने में एक महीने से अधिक का समय है, इसलिए प्रभावित क्षेत्रों में फसल को ठीक होने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा. हालांकि, किसानों को कीट और रोगों से फसल की सुरक्षा करने की सलाह दी है. उन्होंने कहा कि प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में बारिश और मौसम से फसल पर पड़ने प्रभाव का आकलन किया जा रहा है. 

ये उपाय करें गन्ना किसान 

गन्ना किसानों को बारिश के चलते उपजे सूखा रोग, लाल सड़न रोग समेत दूसरे कीटों, रोगों और मौसम बदलावों से फसल को बचाने के लिए कृषि एक्सपर्ट ने किसानों को सुझाव दिए हैं. 

  1. फसल को पानी से बचाने की जरूरत है. इसके लिए किसान खेत में ऊंचे रोपण बेड बनाएं. 
  2. किसानों को जल निकासी की उचित व्यवस्था करनी होगी. पानी को जल्दी से निकालने के लिए नालियों को बनाना होगा. 
  3. गन्ने के खेत में अतिरिक्त पानी की स्थिति में सोखने और मिट्टी के कटाव को कम करने में मदद करने के लिए जैविक मल्चिंग का इस्तेमाल करना होगा. 
  4. कम बारिश और सूखे वाले इलाकों में किसानों को खेत में नमी बनाए रखने के लिए ड्रिप सिंचाई करनी होगी. 
  5. गन्ना खेत की मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए मृदा संरक्षण के लिए मल्चिंग और कुदाल जैसी तकनीकों का उपयोग करना होगा. 
  6. खेत में रोगों संक्रमित पौधों और मलबे को हटाकर खेत को साफ रखें.

ये भी पढ़ें - 

MORE NEWS

Read more!