सरकारी नौकरी नहीं मिली तो क्या? खेती में बनिए बॉस! कृषि मंत्री सिन्हा का बड़ा प्लान

सरकारी नौकरी नहीं मिली तो क्या? खेती में बनिए बॉस! कृषि मंत्री सिन्हा का बड़ा प्लान

बिहार सरकार खेती को पारंपरिक पेशे से आगे बढ़ाकर एक बड़े बिजनेस मॉडल में बदलने की योजना बना रही है. कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने एग्री स्टार्टअप, फूड प्रोसेसिंग, सप्लाई चेन और नई तकनीकों के जरिए युवाओं को रोजगार देने और पलायन रोकने की रणनीति बनाई है. इस पहल से युवा नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले बन सकते हैं.

vijay kumar sinhavijay kumar sinha
अंक‍ित कुमार स‍िंह
  • Patna,
  • Jun 15, 2026,
  • Updated Jun 15, 2026, 2:29 PM IST

बिहार में वर्षों से लाखों युवाओं का सपना सरकारी नौकरी हासिल करना रहा है. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, लंबा इंतजार और सीमित अवसरों के बीच अधिकांश युवा रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख कर लेते हैं. लेकिन अब बिहार सरकार एक ऐसी रणनीति पर काम कर रही है, जो युवाओं को नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बनाने का दावा करती है. 

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कृषि आधारित स्टार्टअप, कृषि नवाचार और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए जिस रोडमैप पर चर्चा हुई, वह संकेत देता है कि सरकार खेती को केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उसे एक बड़े बिजनेस मॉडल में बदलने की तैयारी कर रही है.

खेत अब सिर्फ खेती के लिए नहीं, कारोबार के लिए भी होंगे

बैठक में जिन क्षेत्रों को प्राथमिकता देने की बात कही गई, उनमें मखाना, फल एवं सब्जी प्रसंस्करण, कोल्ड स्टोरेज, सप्लाई चेन, कृषि विपणन, स्मार्ट सिंचाई, ड्रोन तकनीक और एग्री-लॉजिस्टिक्स शामिल हैं. वहीं, जानकारों का मानना है कि आने वाले वर्षों में कृषि का सबसे बड़ा बदलाव खेत में नहीं, बल्कि खेत से बाजार तक की पूरी श्रृंखला में दिखाई देगा. यही वह क्षेत्र है, जहां हजारों नए स्टार्टअप और रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं.

बता दें कि बिहार में लघु और सीमांत किसानों की संख्या सबसे अधिक है और ऐसे में किसान की आय तभी बढ़ेगी, जब वह कृषि को उद्योग के तौर पर करना शुरू करेंगे. इसमें कृषि विभाग की ये तमाम नीतियां कारगर साबित हो सकती हैं, अगर तमाम योजनाओं पर बेहतर तरीके से काम किया जाए तो.

युवाओं के लिए बड़ा सवाल—क्या नौकरी से बेहतर है कारोबार?

बिहार में हर साल लाखों युवा रोजगार की तलाश में दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, गुजरात और महाराष्ट्र जाते हैं. कृषि मंत्री ने बैठक में कहा कि यदि युवाओं को अपने गांव और जिले में ही अवसर मिलें, तो पलायन को काफी हद तक रोका जा सकता है. अगर एक सफल कृषि स्टार्टअप 10 से 20 लोगों को भी रोजगार देता है, तो हजारों स्टार्टअप मिलकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकते हैं.  लेकिन सवाल यह भी है कि अब तक बिहार में शुरू किए गए स्टार्टअप की जमीनी हकीकत बहुत ज्यादा बेहतर नहीं है. भले ही कृषि मंत्री कृषि स्टार्टअप को लेकर कुछ नया करना चाहते हों, मगर उससे पहले उन्हें पुराने युवा स्टार्टअप उद्यमियों से सलाह लेनी होगी.

महिलाओं के लिए भी खुलेंगे नए अवसर

कृषि मंत्री ने महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर देते हुए खाद्य प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग, ऑनलाइन बिक्री और स्थानीय ब्रांड निर्माण जैसे क्षेत्रों में महिलाओं के लिए बड़े अवसर पैदा होने की संभावना जताई. इसका असर केवल रोजगार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है. वहीं सरकार एक ऐसे इकोसिस्टम की बात कर रही है, जिसमें किसान, शोधकर्ता, स्टार्टअप, निवेशक और बाजार एक मंच पर जुड़ सकें. इसके लिए सिंगल विंडो प्लेटफॉर्म विकसित करने की भी योजना है. यदि ऐसा होता है, तो किसान नई तकनीकों तक आसानी से पहुंच सकेंगे और युवा अपने नवाचार को सीधे बाजार से जोड़ पाएंगे.

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