
महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने शनिवार को राज्य के किसानों से अपील की है कि वे अपनी फसलों को प्राकृतिक आपदाओं और खराब मौसम से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए समय पर फसल बीमा योजना में नामांकन जरूर कर लें. उन्होंने साफ कहा कि किसानों को 31 जुलाई तक हर हाल में इस योजना के तहत रजिस्ट्रेशन पूरा करना चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी तरह के नुकसान की भरपाई मिल सके.
सरकारी जानकारी के अनुसार यह योजना किसानों को बारिश की कमी, अत्यधिक बारिश, सूखा, और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान से आर्थिक सुरक्षा देती है. इस योजना के तहत अगर किसी क्षेत्र में किसी नोटिफाइड फसल की औसत पैदावार तय सीमा से कम हो जाती है, तो किसानों को बीमा मुआवजा दिया जाता है. यह व्यवस्था किसानों की आय को स्थिर रखने में मदद करती है.
यह योजना Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana के तहत लागू की गई है, जो देशभर में किसानों को फसल नुकसान की स्थिति में आर्थिक सहायता प्रदान करती है.
इस योजना में कुल 14 खरीफ फसलों को शामिल किया गया है. इनमें धान, ज्वार, बाजरा, रागी, मूंग, उड़द, तूर, मक्का, मूंगफली, तिल, सोयाबीन, कपास और प्याज जैसी प्रमुख फसलें शामिल हैं. इन फसलों की खेती करने वाले किसानों को इस योजना का लाभ मिल सकता है.
सरकारी नियमों के अनुसार अनाज, दलहन और तिलहन जैसी फसलों पर किसानों को बीमा राशि का केवल 2 प्रतिशत प्रीमियम देना होगा. वहीं कपास और प्याज जैसी व्यावसायिक फसलों के लिए किसानों को 5 प्रतिशत प्रीमियम देना होगा. बाकी प्रीमियम सरकार द्वारा वहन किया जाता है, जिससे किसानों पर आर्थिक बोझ कम पड़ता है.
किसान इस योजना के लिए राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल (NCIP), बैंक, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए किसानों के पास एग्रीस्टैक रजिस्ट्रेशन नंबर, जमीन के कागजात, बुवाई की घोषणा, आधार से लिंक बैंक खाता और डिजिटल क्रॉप सर्वे पूरा होना जरूरी है.
कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर कोई किसान गलत जानकारी देकर योजना का लाभ लेने की कोशिश करता है, तो उसे 5 साल तक कृषि विभाग की योजनाओं से वंचित कर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन के कारण खेती का जोखिम बढ़ गया है, इसलिए सभी पात्र किसानों को समय रहते इस योजना में जरूर जुड़ना चाहिए.
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