
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP पर गेहूं खरीदी में सामने आई कथित गड़बड़ियों को लेकर जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. जांच के बाद आठ समिति प्रबंधकों और कंप्यूटर ऑपरेटरों को सेवा से हटा दिया गया है. इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की भी तैयारी की जा रही है. इसके अलावा राजस्व विभाग के चार पटवारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि चार तहसीलदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं.
प्रशासन का कहना है कि गेहूं उपार्जन प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही, गड़बड़ी या अनियमितता को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. जांच में जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.
मध्य प्रदेश में कथित गेहूं खरीदी घोटाले के सामने आने के बाद सरकार और प्रशासन लगातार सख्त कदम उठा रहे हैं. अब तक मुरैना, भिंड और राजगढ़ जिलों में कुल 64 अधिकारियों और कर्मचारियों पर अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई की जा चुकी है. इससे साफ है कि सरकार पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है. अब लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच का दायरा आगे और कितना बढ़ेगा. साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस मामले में बड़े अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी और उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.
जिला आपूर्ति अधिकारी अजित सिंह ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य किसानों के हितों की रक्षा करना और समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है. उन्होंने कहा कि किसानों के साथ किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ नियमों के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन का कहना है कि गेहूं खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और किसानों का भरोसा बनाए रखने के लिए आगे भी जांच और कार्रवाई जारी रहेगी.