कश्मीर के सेब किसानों को व्यापारियों की चेतावनी, जल्द कटाई से गिर सकते हैं दाम, स्टोरेज में भी खतरा

कश्मीर के सेब किसानों को व्यापारियों की चेतावनी, जल्द कटाई से गिर सकते हैं दाम, स्टोरेज में भी खतरा

दक्षिण कश्मीर के सेब व्यापारियों ने किसानों से फसल की कटाई में जल्दबाजी न करने की अपील की है. व्यापारियों का कहना है कि समय से पहले सेब तोड़ने से बाजार में अधिक आवक होने के कारण कीमतों पर दबाव पड़ सकता है और कोल्ड स्टोरेज में फलों की क्वालिटी भी प्रभावित हो सकती है. शोपियां फ्रूट मंडी के अध्यक्ष मोहम्मद अशरफ वानी ने किसानों से हर किस्म के लिए तय पकने की अवधि का पालन करने और बाजार की जरूरतों के अनुसार कटाई करने की सलाह दी है. उनका मानना है कि जल्द कटाई से मिलने वाला तात्कालिक लाभ बाद में कम दाम, खराब भंडारण और कमजोर मांग के कारण नुकसान में बदल सकता है.

सेब किसानों का बकायासेब किसानों का बकाया
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Sep 09, 2026,
  • Updated Sep 09, 2026, 12:58 PM IST

दक्षिण कश्मीर में सेब के व्यापारियों ने किसानों से अपील की है कि वे अपनी फसल की कटाई में जल्दबाजी न करें. उन्होंने चेतावनी दी है कि समय से पहले सेब तोड़ने से थोक बाजारों में आवक बढ़ सकती है, जिससे कीमतों पर दबाव पड़ सकता है और कोल्ड स्टोरेज में रखे गए फलों की क्वालिटी खराब हो सकती है.

यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब दक्षिण कश्मीर के कई हिस्सों में किसानों ने बाजार में अच्छी कीमतों को देखते हुए सेब की शुरुआती किस्मों की कटाई शुरू कर दी है.

हालांकि, व्यापारियों ने आगाह किया है कि कच्चे फलों की बड़े पैमाने पर कटाई नुकसानदेह साबित हो सकती है, क्योंकि इससे मुख्य कटाई का मौसम शुरू होने से पहले ही थोक बाजार फलों से भर सकते हैं.

समय से पहले सेब नहीं तोड़ने की सलाह

फ्रूट मंडी शोपियां के अध्यक्ष मोहम्मद अशरफ वानी ने कोल्ड स्टोरेज ऑपरेटरों से अपील की कि वे किसानों से समय से पहले तोड़े गए सेब नहीं लें.

वानी ने greaterkashmir.com से कहा, "किसानों को फल के पूरी तरह पकने से पहले उसकी कटाई करने से बचना चाहिए. समय से पहले तोड़े गए सेबों की भारी आवक बाजार को प्रभावित कर सकती है और स्टोरेज के लिए भी समस्याएं पैदा कर सकती है."

उन्होंने कहा कि निचले इलाकों में किसानों ने कुल्लू डिलिशियस और डिलिशियस किस्मों की कटाई उनके सामान्य समय से कई हफ्ते पहले ही शुरू कर दी है.

वानी ने कहा, "इन किस्मों की कटाई आमतौर पर 25 सितंबर के बाद की जाती है, लेकिन कई किसान मौजूदा कीमतों के कारण इन्हें जल्दी तोड़ रहे हैं."

व्यापारियों को डर है कि अगर यह चलन बड़े पैमाने पर जारी रहा, तो आवक बढ़ने से थोक बाजारों में जरूरत से ज्यादा सप्लाई (oversupply) हो सकती है, ठीक उसी समय जब ऊंचाई वाले इलाकों में कटाई जोर पकड़ रही होगी.

सेब के पूरे कारोबार को नुकसान की आशंका

सेब के व्यापारी और किसान पीर शब्बीर अहमद ने कहा कि समय से पहले कटाई से किसानों और सेब के पूरे कारोबार को नुकसान हो सकता है, क्योंकि फल बाजार में तब आ जाते हैं जब उनमें लंबे समय तक स्टोर करने और बेहतर रिटर्न पाने के लिए जरूरी क्वालिटी तैयार नहीं हुई होती है.

उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे केवल मौजूदा कीमतों के आधार पर फैसला लेने के बजाय जल्दी कटाई के नुकसान पर भी विचार करें.

यह चिंता कश्मीर के स्टोरेज-आधारित सेब कारोबार के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां बड़ी मात्रा में फल कोल्ड स्टोरेज में स्टोर किए जाते हैं और धीरे-धीरे बाजार में उतारे जाते हैं. व्यापारियों का कहना है कि पूरी तरह पकने से पहले तोड़े गए सेब लंबे समय तक स्टोरेज के दौरान पूरी तरह पके फलों की तरह अच्छी स्थिति में नहीं रह सकते हैं.

सेब की खेती जम्मू-कश्मीर की बागवानी अर्थव्यवस्था के मुख्य काम में से एक है, जो घाटी भर में किसानों, व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों, मजदूरों और स्टोरेज ऑपरेटरों को सहारा देती है.

बाजार में ओवरसप्लाई से गिर सकते हैं दाम

कुछ निचले इलाकों में कटाई शुरू होने के साथ, व्यापारियों का कहना है कि आवक की क्वालिटी और समय को बनाए रखना बहुत जरूरी होगा ताकि शुरुआती दौर में ही जरूरत से ज्यादा सप्लाई (glut) से कीमतों पर बुरा असर न पड़े. इस बीच, किसानों को जल्दी कटाई करने के लिए तैयार किया जा रहा है, क्योंकि उन्हें मुख्य फसल के बाज़ार में आने से पहले ज्यादा कीमतों का फायदा उठाने का मौका मिल रहा है.

व्यापारियों ने चेतावनी दी कि समय से पहले कटाई से होने वाले किसी भी तात्कालिक लाभ को बाद में कम कीमतों, खराब भंडारण और कम मांग के कारण नुकसान में बदला जा सकता है.

उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे हर किस्म के लिए सुझाई गई परिपक्वता अवधि (पकने का समय) का पालन करें और बाज़ार और भंडारण की जरूरतों के अनुसार कटाई की योजना बनाएं.

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