
धान की कटाई के साथ ही पराली जलाने की समस्या बढ़ती जा रही है. पराली का नाम सुनते ही पंजाब, हरियाणा जैसे राज्यों का जिक्र होना एक आम बात है. सरकार किसानों के लिए पराली प्रबंधन की कई योजनाएं शुरू कर उन्हें पराली नहीं जलाने के लिए जागरूक करती है. इसके बावजूद कुछ किसान धड़ल्ले से पराली जलाते हैं.
पराली जलाने से प्रदूषण की समस्या बढ़ जाती है. इससे हवा की गुणवत्ता खराब होने लगती है. ऐसे में किसानों के बीज धान की कटाई के बाद पराली के लिए बायो डिकम्पोज़र की समस्या बढ़ती जा रही है.
दरअसल पराली की समस्या से निजात पाने के लिए पूसा इंस्टीट्यूट ने 2019 में बायो डिकम्पोज़र कैप्सूल लेकर आई थी. इस कैप्सूल का घोल बनाकर छिड़काव करने से कुछ ही हफ्तों में पराली खाद में तब्दील हो जाती है.
पूसा इंस्टीट्यूट के मुताबिक बायो डिकम्पोज़र के 04 कैप्सूल से 25 लीटर घोल बनाया जा सकता है. वहीं 25 लीटर के घोल को 500 लीटर पानी में मिलाकर इसका छिड़काव 02 से ढाई एकड़ जमीन में किया जा सकता है.
घोल का छिड़काव करने के बाद जल्द से जल्द पराली को मिट्टी में मिला देना चाहिए या फिर खेत की जुताई कर देनी चाहिए. इससे लगभग एक सप्ताह में ही बायो डिकम्पोजर पराली को सड़ाकर खाद बना देता है.
अगर आप भी अपनी पराली को खाद में तब्दील करना चाहते हैं तो आप इस बायो डिकम्पोज़र कैप्सूल को पूसा इंस्टीट्यूट से खरीद सकते हैं. इसके 04 कैप्सूल आपको मात्र 40 रुपये में मिल जाएंगे, जिससे आप पराली और प्रदूषण की समस्या से निजात पा सकते हैं.