राखी में छिपा हरियाली का संदेश, बीजों वाली राखियां बढ़ा रहीं महिलाओं की आय

राखी में छिपा हरियाली का संदेश, बीजों वाली राखियां बढ़ा रहीं महिलाओं की आय

मुंगेली के रोहराकला गांव की आदर्श महिला स्व-सहायता समूह ने प्राकृतिक बीजों से पर्यावरण-अनुकूल राखियां बनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है. बिहान योजना के सहयोग से महिलाओं को इस सीजन में 30 से 40 हजार रुपये अतिरिक्त आय की उम्मीद है.

धर्मेंद्र सिंह
  • Raipur ,
  • Aug 07, 2026,
  • Updated Aug 07, 2026, 9:11 AM IST

छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार सकारात्मक प्रयास किए जा रहे हैं. इन प्रयासों का असर अब गांवों में नवाचार और महिला उद्यमिता के रूप में दिखाई देने लगा है.मुंगेली जिले के विकासखंड पथरिया अंतर्गत ग्राम रोहराकला की आदर्श महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने इस वर्ष रक्षाबंधन के अवसर पर प्राकृतिक बीजों से आकर्षक और पर्यावरण-अनुकूल राखियां तैयार कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है.

चावल, मूंग, धनिया, काली मिर्च सहित विभिन्न प्राकृतिक बीजों से बनाई गई ये हस्तनिर्मित राखियां न केवल अपनी सुंदरता और अनूठे डिजाइन के कारण लोगों को आकर्षित कर रही हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रही हैं.स्थानीय बाजार में इन राखियों को अच्छी मांग मिल रही है और समूह को इस सीजन में 30 से 40 हजार रुपये की अतिरिक्त आय होने की उम्मीद है.

बिहान योजना ने बदली महिलाओं की जिंदगी

आदर्श महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं के पास पहले आय के सीमित साधन थे. राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत उन्हें रिवॉल्विंग फंड, कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड और बैंक लिंकेज जैसी वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं. इसके साथ ही विभाग द्वारा दिए गए प्रशिक्षण और क्षमता विकास कार्यक्रमों ने महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ाया. इसी प्रेरणा से उन्होंने स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर राखी निर्माण का नवाचार शुरू किया.

स्थानीय संसाधनों से तैयार हुआ अनोखा उत्पाद

रक्षाबंधन पर्व को ध्यान में रखते हुए महिलाओं ने अलग-अलग रंगों और डिजाइनों में प्राकृतिक बीजों से राखियां तैयार की हैं. इन राखियों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनमें प्लास्टिक या कृत्रिम सामग्री के बजाय स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किया गया है. इससे ये पूरी तरह पर्यावरण-अनुकूल होने के साथ ग्रामीण हस्तशिल्प की पहचान भी बन रही हैं.

आय के साथ बढ़ेगा परिवार का आर्थिक संबल

राखी निर्माण से होने वाली अतिरिक्त आय महिलाओं के परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद करेगी.इससे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में सहयोग मिलेगा. साथ ही महिलाओं में बचत, निवेश और स्वरोजगार की भावना भी मजबूत होगी.

महिला उद्यमिता का प्रेरक मॉडल

रोहराकला की महिलाओं की यह पहल केवल राखी निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिला उद्यमिता, स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग, पर्यावरण संरक्षण और सामूहिक आर्थिक सशक्तिकरण का सफल उदाहरण बनकर उभरी है. बिहान योजना के सहयोग से समूह की महिलाएं अब अपने हुनर को बाजार से जोड़ते हुए आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं.उनका यह नवाचार आसपास के गांवों की अन्य स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को भी नए आजीविका अवसर अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है.

 

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