
उत्तर प्रदेश में आधुनिक कृषि यंत्र और सरकार की सब्सिडी योजनाएं ग्रामीण अंचलों में खेती का पूरा गणित बदल रही हैं. महंगी कृषि मशीनरी अब किसानों की पहुंच से बाहर नहीं रही. कृषि विभाग की अलग-अलग योजनाओं और सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन (SMAM) जैसी योजनाओं के तहत किसानों को कृषि यंत्रों की खरीद पर सब्सिडी दी जा रही है. कई श्रेणियों में 40 से लेकर 80 प्रतिशत तक अनुदान मिलने से किसान ट्रैक्टर के साथ सुपर सीडर, बेलर, रोटावेटर, गहरी जुताई के यंत्र और फसल कटाई से जुड़े आधुनिक उपकरण खरीद रहे हैं.
इन मशीनों का असर खेती की लागत और समय दोनों पर दिखाई दे रहा है. जिन कृषि कार्यों में पहले दो दिन लगते थे, वे आधुनिक मशीनों की मदद से एक दिन में पूरे हो रहे हैं. इससे श्रम की जरूरत कम हुई है और किसान कम समय में अधिक क्षेत्र में खेती का काम पूरा कर पा रहे हैं. खास बात यह है कि किसान इन मशीनों का इस्तेमाल अपनी खेती के साथ-साथ दूसरे किसानों के खेतों में किराये पर काम करके अतिरिक्त आमदनी भी कर रहे हैं.
मेरठ में मवाना क्षेत्र के किसान नंदकिशोर ने बताया कि उन्होंने सरकार की योजना के तहत फार्म मशीनरी बैंक परियोजना का लाभ लिया. करीब 42 लाख रुपये की कृषि मशीनरी में 75 हॉर्स पावर का ट्रैक्टर और उसके साथ कई आधुनिक कृषि यंत्र शामिल हैं. उनके अनुसार 30 लाख की योजना में उन्हें करीब 80 प्रतिशत तक सब्सिडी का लाभ मिला और लगभग 24 लाख रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई.
उन्होंने बताया कि ट्रैक्टर के साथ बेलर, सुपर सीडर, गेहूं कटाई की मशीन और गहरी जुताई के लिए प्लाऊ समेत अन्य कृषि यंत्र खरीदे हैं. इन मशीनों से खेती के काम में करीब 50 प्रतिशत तक समय की बचत हो रही है. पहले जिस काम में दो दिन लगते थे, वह अब एक दिन में पूरा हो जाता है.
नंदकिशोर के पास करीब छह एकड़ जमीन है, जिसमें वह मुख्य रूप से आलू और गन्ने की खेती करते हैं. उनका कहना है कि मशीनों के इस्तेमाल से श्रमिकों की जरूरत भी कम हुई है. इसके अलावा मशीनों को दूसरे किसानों के खेतों में किराये पर चलाने से सालाना करीब चार से पांच लाख रुपये की अतिरिक्त आमदनी हो रही है.
नंदकिशोर ने बताया कि उनके पास गहरी जुताई के लिए प्लाऊ मशीन भी है, जिसकी कीमत करीब पांच लाख रुपये है. यह जमीन के नीचे बनी कठोर परत को तोड़ने में मदद करती है. इससे खेत की मिट्टी बेहतर होती है और फसल के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं.
उनका कहना है कि सरकार की योजनाओं की जानकारी लेकर किसान इनका बेहतर लाभ उठा सकते हैं. योजना के माध्यम से लोन लेने में भी उन्हें परेशानी नहीं हुई. कृषि विभाग की ओर से बैंक को पत्र भेजे जाने के बाद लोन की प्रक्रिया आगे बढ़ी. उनका कहना है कि आधुनिक मशीनरी से न केवल खेती आसान हुई, बल्कि परिवार की आमदनी के नए रास्ते भी खुले हैं.
मेरठ के किसान पुनीत यादव ने बताया कि उन्होंने सरकारी सब्सिडी का लाभ लेकर ट्रैक्टर के साथ सुपर सीडर और रोटावेटर खरीदा है. अलग-अलग कृषि यंत्रों पर उन्हें करीब 40 से 50 प्रतिशत तक सब्सिडी मिली है. वह फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (FPO) भी चलाते हैं, जिससे बड़ी संख्या में किसान जुड़े हुए हैं. उनके पास करीब 60 बीघा जमीन है और वह गन्ने और गेहूं की खेती करते हैं.
पुनीत के मुताबिक सुपर सीडर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे जुताई और बुवाई का काम एक साथ हो जाता है. पहले दोनों काम अलग-अलग करने पड़ते थे, जिससे समय और श्रम की लागत बढ़ती थी. सुपर सीडर से बीज की बचत होती है और फसल का उत्पादन भी बेहतर मिलने की संभावना रहती है. मशीन के इस्तेमाल से खेत तैयार करने में समय और मेहनत दोनों की बचत होती है.
कृषि मशीनरी पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी का लाभ लेकर किसान अब पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीक को तेजी से अपना रहे हैं. मशीनों से खेत तैयार करने, बुवाई, कटाई और अन्य कृषि कार्यों में लगने वाला समय कम हो रहा है. श्रम लागत घटने से खेती की कुल लागत पर भी असर पड़ रहा है.
वहीं, जिन किसानों के पास आधुनिक कृषि यंत्र हैं, वे इन्हें आसपास के किसानों को किराये पर उपलब्ध कराकर अतिरिक्त आमदनी भी कर रहे हैं. इस तरह सरकारी सब्सिडी से खरीदी गई कृषि मशीनरी किसानों के लिए केवल खेती का साधन नहीं, बल्कि अतिरिक्त रोजगार और आमदनी का जरिया भी बन रही है.