Punjab: चुनावी पेच में फंसी पराली निपटान मशीनें, डिलीवरी के लिए किसानों ने प्रशासन ने लगाई गुहार

Punjab: चुनावी पेच में फंसी पराली निपटान मशीनें, डिलीवरी के लिए किसानों ने प्रशासन ने लगाई गुहार

पंजाब में कपूरथला की बात करें तो यहां 500 सोसायटी या लोगों को पराली मशीन के लिए मंजूरी मिल गई है. ये मशीनें सब्सिडी रेट पर दी जाएंगी. हालांकि आगामी 15 अक्टूबर को होने वाले पंचायत चुनाव के मद्देनजर आचार संहिता के कारण मशीन वितरण की प्रक्रिया रुकी हुई है.

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क‍िसान तक
  • Noida,
  • Oct 03, 2024,
  • Updated Oct 03, 2024, 6:22 PM IST

पंजाब में पराली का मुद्दा गंभीर रहा है. हर साल इसे लेकर राजनीति भी होती है. वजह है कि धान कटाई के बाद पराली को नहीं निपटा जाए तो किसान उसमें आग लगाना ही मुनासिब समझते हैं. फिर इसका धुआं इतना प्रदूषण फैलाता है कि दिल्ली से लेकर देश-विदेश तक कोहराम मच जाता है. इससे छुटकारा पाने के लिए सरकार ने पराली निपटान मशीन बांटना शुरू किया है. इसकी कीमत महंगी होती है जो कि किसानों के लिए मुश्किल है. लेकिन सब्सिडी देकर इसे सस्ता किया जाता है. पंजाब में अभी समस्या ये है कि वहां पंचायत चुनाव है जिसके चलते पराली निपटान मशीनों का वितरण खटाई में पड़ गया है.

पंजाब में कपूरथला की बात करें तो यहां 500 सोसायटी या लोगों को पराली मशीन के लिए मंजूरी मिल गई है. ये मशीनें सब्सिडी रेट पर दी जाएंगी. हालांकि आगामी 15 अक्टूबर को होने वाले पंचायत चुनाव के मद्देनजर आचार संहिता के कारण मशीन वितरण की प्रक्रिया रुकी हुई है. किसानों का कहना है कि चुनाव आचार संहिता धान की कटाई के मौसम के साथ मेल खाती है. 30 सितंबर को किसानों ने इस मुद्दे पर डीसी अमित पंचाल से भी मुलाकात की और मशीन दिए जाने के लिए गुहार लगाई.

प्रशासन से गुहार

इस पर डीसी ने कहा कि धान प्रबंधन के लिए जिला स्तर पर उपलब्ध 5,550 मशीनें अभी पर्याप्त हैं और जल्द ही और मशीनें मंजूर की जाएंगी. इस साल सरकार की ओर से पराली जलाने की घटनाओं पर सख्ती बरतने जाने के बाद अब तक घटनाओं में कमी आई है. यहां के किसान भी सब्सिडी दर पर मशीनें उपलब्ध कराने को अच्छा कदम मानते हैं. 

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'दि ट्रिब्यून' की एक रिपोर्ट बताती है, जालंधर और कपूरथला के सुल्तानपुर लोधी में धान की बड़े पैमाने पर कटाई अभी शुरू नहीं हुई है, लेकिन इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. कपूरथला में अब तक खेतों में आग लगने की 16 घटनाएं सामने आई हैं. किसानों का कहना है कि चुनाव आचार संहिता के कारण ही समय पर मशीनें नहीं मिल पा रही हैं.

बाऊपुर के किसान परमजीत सिंह, जिन्होंने कई सालों से पराली नहीं जलाई है, कहते हैं, "हमने एक समूह के रूप में ढाई महीने पहले और फिर एक महीने पहले मशीनों के लिए आवेदन किया था. हमें बताया गया था कि चुनाव आचार संहिता हटने के बाद प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होगी क्योंकि यह धान की कटाई का पीक सीजन है."

क्या कहा प्रशासन ने?

मुख्य कृषि अधिकारी बलबीर चंद ने कहा, "इस साल हमने पहले ही 540 मशीनें मंजूर कर दी हैं और इनमें से 192 मशीनें किसानों/सोसायटियों द्वारा पहले ही खरीद ली गई हैं. किसान इन मशीनों को मंजूरी की तारीख से 14 दिनों के भीतर खरीद सकते हैं."

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उन्होंने कहा कि चुनाव आचार संहिता हटने के बाद ही मशीनों की मंजूरी और खरीद फिर से शुरू की जा सकेगी. पंचाल ने कहा, "जिले में व्यक्तिगत/समूह आधार पर 5,550 मशीनें पहले से ही चालू हैं. मेरे अधिकारी, एसडीएम और कृषि अधिकारी पूरे मामले की समीक्षा कर रहे हैं, लेकिन ऐसा कोई मुद्दा हमारे संज्ञान में नहीं आया है. हालांकि, मैं मुख्य कृषि अधिकारी को मामले की जांच करने का निर्देश दूंगा."

 

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