
पंजाब में कमजोर मॉनसून के बीच बिजली की मांग बढ़ने से आपूर्ति संकट गहरा गया है. मालवा क्षेत्र के धान किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए पर्याप्त और नियमित बिजली नहीं मिल रही है. किसानों का कहना है कि बिजली सप्लाई का कोई तय भरोसा नहीं रह गया है और कई बार निर्धारित शेड्यूल की जानकारी भी नहीं दी जाती. मालवा बेल्ट में किसानों ने धान की खेती के लिए जरूरत से कम बिजली आपूर्ति को लेकर विरोध जताया है.
‘दि ट्रिब्यून’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, किसान संगठनों का कहना है कि कई इलाकों में बिजली की सप्लाई अनियमित रहती है. इससे धान की फसल की सिंचाई प्रभावित हो रही है और किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
बिजली संकट का असर पंजाब के औद्योगिक क्षेत्रों पर भी साफ दिखाई दे रहा है. मंडी गोबिंदगढ़ की रोलिंग मिलों और लुधियाना के आसपास की प्लाईवुड इकाइयों में बार-बार बिजली कटौती से उत्पादन प्रभावित हो रहा है. घरेलू उपभोक्ता भी निर्धारित और अघोषित कटौती से परेशान हैं.
ऑल इंडिया स्टील रीरोलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद वशिष्ठ ने कहा कि रोजाना तीन से चार घंटे तक अघोषित बिजली कटौती हो रही है और पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) की ओर से इसकी कोई जानकारी नहीं दी जाती. उन्होंने कहा कि बिजली कटौती के कारण उनकी डबल शिफ्ट पहले ही बंद हो चुकी हैं, जबकि कर्मचारियों को बिना काम के वेतन देना पड़ रहा है, जिससे उद्योग का नुकसान बढ़ रहा है.
राज्य में गर्मी और उमस भरे मौसम के बीच बिजली की मांग लगातार ऊंची बनी हुई है. कमजोर मॉनसून के कारण सिंचाई और कूलिंग उपकरणों के इस्तेमाल से मांग पर दबाव बढ़ा है. वहीं, कोयले की सीमित आपूर्ति और थर्मल पावर प्लांटों में कम स्टॉक ने स्थिति को और गंभीर कर दिया है.
तलवंडी साबो और राजपुरा के थर्मल पावर प्लांट इस समय बेहद कम कोयला भंडार के साथ चल रहे हैं. राज्य में बिजली की उपलब्धता 16,000 मेगावाट से ऊपर बनी हुई है, लेकिन मांग और उपलब्ध सप्लाई के बीच अंतर बना हुआ है. 3 सितंबर को पंजाब की अधिकतम बिजली मांग 16,343 मेगावाट दर्ज हुई और आधिकारिक कमी 31 लाख यूनिट रही.
दिन के समय PSPCL बिजली एक्सचेंज से अपेक्षाकृत सस्ती सौर बिजली लेकर पीक डिमांड को संभालने की कोशिश कर रहा है. पंजाब बिजली की जरूरत पूरी करने के लिए नॉर्दर्न ग्रिड से 11,500 मेगावाट से अधिक बिजली ले रहा है. इसके बावजूद मांग और आपूर्ति के बीच अंतर खत्म नहीं हो पा रहा है.
एसोसिएशन ने कहा कि सूरज ढलने के बाद स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती है, क्योंकि सौर बिजली की उपलब्धता घट जाती है और PSPCL को महंगी बिजली खरीदनी पड़ती है. इसके चलते औद्योगिक उपभोक्ताओं की कुछ श्रेणियों में पांच घंटे तक की कटौती लागू की जा रही है. ओवरलोडेड फीडरों के ट्रिप होने और तकनीकी खराबियों ने भी बिजली आपूर्ति को प्रभावित किया है.
बिजली संकट को लेकर औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने शनिवार को पंजाब के बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंड से मुलाकात की. प्रतिनिधियों ने लगातार बिजली कटौती और उससे हो रहे नुकसान की शिकायत की. मंत्री ने उन्हें जल्द समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया है.