
हरियाणा के सोनीपत जिले के एक ग्रामीण इलाके से निकली सुदेश कुमारी आज ‘नमो ड्रोन दीदी’ के रूप में देशभर में अपनी पहचान बना चुकी हैं. उन्होंने यह साबित कर दिया है कि आज की महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं. खेतों में ड्रोन उड़ाकर कीटनाशक और उर्वरक का स्प्रे करने वाली सुदेश न केवल आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन गई हैं.
सुदेश कुमारी पहले ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी थीं. इसी दौरान उन्हें सरकार की ओर से मुफ्त ड्रोन पायलट प्रशिक्षण की जानकारी मिली. उन्होंने इस अवसर का लाभ उठाया और 15 दिन की प्रशिक्षण प्रक्रिया पूरी कर ड्रोन उड़ाना सीख लिया. प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्हें इफको (IFFCO) की तरफ से एक ड्रोन और गाड़ी भी उपलब्ध कराई गई.
आज सुदेश खुद किसानों के खेतों में जाकर ड्रोन से स्प्रे करती हैं और इसके बदले उन्हें 500 रुपये प्रति एकड़ की आय होती है. एक दिन में वह करीब 20 एकड़ तक छिड़काव कर सकती हैं, जिससे उनकी मासिक आय 15 हजार रुपये या उससे अधिक तक पहुंच रही है.
ड्रोन के जरिए नैनो उर्वरक और कीटनाशकों का छिड़काव किया जाता है, जिससे समय और लागत दोनों की बचत होती है. यही वजह है कि अब ग्रामीण क्षेत्रों में इस तकनीक की मांग तेजी से बढ़ रही है. सरकार की ‘नमो ड्रोन दीदी योजना’ और ‘लखपति दीदी योजना’ के तहत महिलाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है.
सुदेश कुमारी अब अन्य महिलाओं को भी ड्रोन प्रशिक्षण लेने के लिए प्रेरित कर रही हैं. उनके कहने पर कई महिलाएं गुरुग्राम और अन्य स्थानों पर ट्रेनिंग लेकर अब खेतों में ड्रोन उड़ाती नजर आ रही हैं. सुदेश कहती हैं कि केंद्र सरकार की योजनाओं ने महिलाओं को घर से बाहर निकलकर कुछ नया करने का मौका दिया है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य सरकार का आभार जताते हुए कहा कि इन योजनाओं ने उनकी जिंदगी बदल दी है.
सुदेश कुमारी अपनी इस उपलब्धि के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से भी मुलाकात कर चुकी हैं. सभी नेताओं ने उनके काम की सराहना की है.
इसके लिए सरकार ने 1261 करोड़ रुपये का बजट भी मंजूर किया है, ताकि ग्रामीण महिलाओं को तकनीक से जोड़कर स्थायी रोजगार उपलब्ध कराया जा सके.
चुनी गई महिलाओं को DGCA से मान्यता प्राप्त संस्थानों में 15 दिन की ड्रोन पायलट ट्रेनिंग, 5 दिन की सहायक ट्रेनिंग दी जाती है, जिसमें ड्रोन उड़ाना, रखरखाव और डेटा विश्लेषण शामिल होता है.
सोनीपत की सुदेश कुमारी की सफलता कहानी यह दिखाती है कि सरकारी योजनाओं और आधुनिक तकनीक के मेल से ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं. ‘ड्रोन दीदी’ जैसी पहल न केवल किसानों को मदद दे रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा भी दे रही है.