डेयरी के गंदे पानी से नेपियर घास की खेती, दूध उत्पादन बढ़ाने का वैज्ञानिक और सस्ता तरीका

डेयरी के गंदे पानी से नेपियर घास की खेती, दूध उत्पादन बढ़ाने का वैज्ञानिक और सस्ता तरीका

डेयरी से निकलने वाले गंदे पानी से नेपियर घास की खेती कर दूध उत्पादन बढ़ाएं. ICAR द्वारा प्रमाणित यह तकनीक कम लागत, अधिक मुनाफा और टिकाऊ डेयरी खेती का बेहतरीन समाधान है.

Dairy wastewater managementDairy wastewater management
रवि कांत सिंह
  • New Delhi ,
  • Jan 23, 2026,
  • Updated Jan 23, 2026, 11:56 AM IST

डेयरी का गंदा पानी अपने आप में बड़ी समस्या है. इस गंदे पानी का निपटान कैसे हो, हमेशा ये चिंता बनी रहती है. लेकिन अब इसका समाधान आ गया है. समाधान भी इतना सटीक और सुविधाजनक है कि हर डेयरी किसान इसे अपनाना चाहेगा. ICAR ने बताया है कि डेयरी से निकलने वाला गंदा पानी जिसमें गोबर, गोमूत्र और स्लरी आदि मिले होते हैं, उसमें बड़ी मात्रा में पोषक तत्वों की मौजूदगी होती है. अगर इस पानी को किसी तरीके से खेत तक पहुंचा दिया जाए और उस खेत में नेपियर घास की खेती करें तो इसका चमत्कारी असर दिखेगा. राजस्थान के उदयपुर जिले के डेयरी किसान गौरी शंकर ने ऐसा कर दिखाया है. डेयरी के गंदे पानी का इस्तेमाल नेपियर घास की सिंचाई के लिए किया गया और उस घास से पशुओं का दूध बड़ी मात्रा में बढ़ गया.

डेयरी किसानों के लिए बड़ी सुविधा

इस वैज्ञानिक विधि ने डेयरी किसानों के लिए बड़ी सुविधा का रास्ता खोल दिया है. दरअसल, डेयरी से निकलने वाला गीला कचरा अपने आप में बहुत बड़ी चुनौती है. अक्सर हम देखते भी हैं कि डेयरी प्लांट में इन कचरों की वजह से साफ-सफाई की समस्या बनी रहती है. साफ-सफाई में थोड़ी सी भी चूक होती है तो पशुओं का दूध उत्पादन घट जाता है. डेयरी से निकलने वाला पानी गंदा, दुर्गंध वाला और कीचड़ सहित होता है. दिखने में यह गंदा जरूर होता है, लेकिन नेपियर घास के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं.

कम खर्च में नेपियर की खेती

नेपियर घास की बड़ी खासियत है कि वह खलार जमीन (जलजमाव वाली जमीन) में भी अच्छी तरह से उगती है. जहां पानी लगे, वहां भी यह घास अच्छा उत्पादन देती है. नेपियर की इस खासियत का फायदा डेयरी किसान आसानी से उठा सकते हैं. किसान जलजमाव वाले क्षेत्रों में डेयरी से निकलने वाले गंदे पानी का इस्तेमाल सिंचाई में कर सकते हैं.

आईसीएआर के मुताबिक, डेयरी किसान 20 दिनों तक गंदे पानी को इकट्ठा कर सकते हैं, फिर उसे किसी नाली के जरिये नेपियर के खेत में डाल सकते हैं. अगर खेत में पानी की कमी हो, सिंचाई की जल्द जरूरत हो तो डेयरी के गंदे पानी का अंतराल घटा भी सकते हैं. इससे नेपियर में तेज ग्रोथ होती है. 

पशुओं के लिए बेस्ट क्वालिटी की घास

पशुओं के लिए नेपियर को सबसे क्वालिटी वाली घास माना जाता है. रिसर्च में पता चला है कि इस घास में 13-14 परसेंट प्रोटीन पाया जाता है जिससे पशुओं का दूध बढ़ता है, रोगों से लड़ने की क्षमता में वृद्धि होती है और सेहत अच्छी रहती है. नेपियर अधिक उगाएं तो बाजार से चारा खरीदने का खर्च कम होगा. घर पर ही हरे चारे की उपलब्धता बनी रहेगी. आर्थिक रूप से देखें तो डेयरी का गंदा पानी और नेपियर घास का उत्पादन बहुत लाभदायक है.

सिंचाई का खर्च बचने के साथ ही रासायनिक खादों पर होने वाला खर्च भी बचता है. यह तकनीक उन इलाकों में अधिक उपयोगी है जहां सिंचाई के पानी की समस्या है. छोटे डेयरी किसान प्लांट से निकलने वाले पानी को बड़ा अवसर मानते हुए इस मॉडल को अपना सकते हैं और अपनी कमाई बढ़ा सकते हैं.

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