
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सैटेलाइट तकनीक खेती की निगरानी के तरीके में बड़ा बदलाव ला सकती है. शोधकर्ताओं ने एक नया डेटासेट विकसित किया है, जिसकी मदद से भविष्य में AI सिस्टम बड़े कृषि क्षेत्रों में फसलों की निगरानी करने के साथ यह पता लगाने में सक्षम हो सकते हैं कि किसी खेत में कौन सी फसल उगाई गई है. इतना ही नहीं, फसल की बुवाई और कटाई के समय से लेकर उसकी संभावित पैदावार का अनुमान लगाने में भी यह तकनीक मददगार हो सकती है.
इंद्रप्रस्थ इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी-दिल्ली (IIIT-Delhi) और एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन के शोधकर्ताओं ने मिलकर यह मल्टी-सैटेलाइट डेटासेट विकसित किया है. इसे SICKLE यानी Satellite Imagery for Cropping annotated with Key parameter Labels नाम दिया गया है.
इससे संबंधित अध्ययन का नाम "SICKLE: A Multi-Sensor Satellite Imagery Dataset Annotated with Multiple Key Cropping Parameters" है. डेटासेट में सैटेलाइट तस्वीरों को खेतों से जुटाई गई वास्तविक जानकारियों के साथ जोड़ा गया है.
आमतौर पर सैटेलाइट तस्वीरों की मदद से किसी इलाके में वनस्पति और खेती की स्थिति देखी जा सकती है. SICKLE को इस तरह तैयार किया गया है कि मशीन लर्निंग मॉडल केवल सैटेलाइट तस्वीरों में दिखाई देने वाली हरियाली की पहचान तक सीमित न रहें, बल्कि खेती से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं को समझ सकें.
शोधकर्ताओं के मुताबिक, AI आधारित कृषि तकनीक विकसित करने में इस तरह के डेटासेट महत्वपूर्ण हैं. सैटेलाइट के जरिए एक साथ बहुत बड़े क्षेत्र की तस्वीरें हासिल की जा सकती हैं, लेकिन AI मॉडल को प्रशिक्षित करने और उनकी सटीकता जांचने के लिए खेत के स्तर की विस्तृत जानकारी की उपलब्धता सीमित रहती है. SICKLE के जरिए इसी अंतर को कम करने की कोशिश की गई है.
डेटासेट तैयार करने के लिए Landsat-8, Sentinel-1 और Sentinel-2 से मिलने वाली जानकारियों का इस्तेमाल किया गया है. इनके साथ खेतों में वास्तव में उगाई गई फसल और खेती के तौर-तरीकों से जुड़ी जानकारियां जोड़ी गई हैं.
इससे शोधकर्ता एक ही कृषि क्षेत्र के आधार पर फसल की पहचान, उसके विकास की अलग-अलग अवस्थाओं और संभावित उपज जैसे पहलुओं का अध्ययन कर सकते हैं.
SICKLE डेटासेट में 388 कृषि प्लॉट से करीब 2,370 सीजन आधारित सैंपल और लगभग 2.09 लाख सैटेलाइट इमेज शामिल हैं. इसमें 3 मीटर, 10 मीटर और 30 मीटर रिजॉल्यूशन वाली जानकारियां उपलब्ध हैं, जिससे कृषि क्षेत्रों का अलग-अलग स्तर पर अध्ययन किया जा सकता है.
डेटासेट की एक खासियत फसल के जीवन चक्र से जुड़ी जानकारी है. शोधकर्ताओं ने फसल की पहचान के अलावा Crop Phenology का अनुमान लगाने पर भी काम किया है.
क्रॉप फेनोलॉजी में फसल की बुवाई, रोपाई और कटाई जैसी महत्वपूर्ण अवस्थाएं शामिल होती हैं. SICKLE में ये जानकारियां अलग-अलग कृषि प्लॉट से जोड़ी गई हैं. इससे AI मॉडल को यह सीखने में मदद मिल सकती है कि कोई फसल समय के साथ किस प्रकार बदलती और विकसित होती है.
शोधकर्ताओं ने इस डेटासेट के जरिए मुख्य रूप से तीन कामों के लिए मशीन लर्निंग मॉडल का परीक्षण किया है. इनमें फसल की पहचान, फसल की अलग-अलग अवस्थाओं का अनुमान और पैदावार की भविष्यवाणी शामिल हैं.
अलग-अलग सैटेलाइट डेटा को एक साथ इस्तेमाल करने का अपना फायदा है. तीनों सैटेलाइट अलग प्रकार की जानकारियां उपलब्ध कराते हैं, जिनमें ऑप्टिकल, थर्मल और माइक्रोवेव ऑब्जर्वेशन शामिल हैं.
उदाहरण के लिए, बादल छाए रहने पर ऑप्टिकल सैटेलाइट तस्वीरों से स्पष्ट जानकारी हासिल करने में मुश्किल हो सकती है. दूसरी तरफ रडार आधारित निगरानी बादलों से तुलनात्मक रूप से कम प्रभावित होती हैं. ऐसे में कई स्रोतों से मिलने वाले डेटा को जोड़कर कृषि निगरानी को ज्यादा उपयोगी बनाया जा सकता है.
यह शोध भविष्य में ऐसी व्यवस्था की ओर संकेत करता है, जिसमें सैटेलाइट आधारित AI टूल्स की मदद से बड़े कृषि क्षेत्रों की जानकारी हासिल की जा सकेगी. परंपरागत तौर पर खेतों का सर्वे करने में समय और संसाधन ज्यादा लगते हैं. सैटेलाइट और AI आधारित प्रणाली बड़े क्षेत्र की फसलों की निगरानी में मददगार हो सकती है.
इस तरह की तकनीक से नीति निर्माताओं को बड़े स्तर पर फसल पैटर्न और कृषि उत्पादकता की निगरानी करने में सहायता मिल सकती है. वहीं वैज्ञानिक अलग-अलग परिस्थितियों में फसलों में होने वाले बदलावों का अध्ययन कर सकते हैं. भविष्य में इसका इस्तेमाल खेत के स्तर पर क्रॉप मैपिंग और उपज का अनुमान लगाने वाली तकनीकों को विकसित करने में भी किया जा सकता है.
SICKLE डेटासेट को तैयार करने के लिए तमिलनाडु के प्रमुख धान उत्पादक क्षेत्र कावेरी डेल्टा के कृषि प्लॉट का इस्तेमाल किया गया. खेतों से जुटाई गई जानकारी में फसल का प्रकार, उसकी किस्म, फसल का मौसम, उत्पादन और खेती से जुड़ी प्रमुख तारीखें शामिल थीं.
डेटासेट में जनवरी 2018 से मार्च 2021 तक की जानकारी है और इसमें चार जिलों की 21 प्रकार की फसलें शामिल हैं. कुल आंकड़ों में 145 कृषि प्लॉट के 351 धान के सैंपल भी शामिल हैं, जिनमें धान की किस्म, सीजन, अलग-अलग विकास अवस्थाओं और उत्पादकता से संबंधित विस्तृत जानकारी दी गई है.
हालांकि शोधकर्ताओं ने इस तकनीक की कुछ चुनौतियों का भी जिक्र किया है. इनमें खेतों के सर्वे से पर्याप्त डेटा नहीं मिलना, किसानों द्वारा दी गई जानकारी में संभावित अनिश्चितता और कम रिजॉल्यूशन वाली सैटेलाइट तस्वीरों में छोटे खेतों की सही पहचान करना शामिल है.
शोधकर्ताओं का मानना है कि SICKLE कृषि, रिमोट सेंसिंग और मशीन लर्निंग से जुड़े आगे के अध्ययनों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है. इसके आधार पर भविष्य में ऐसी AI तकनीक विकसित करने की दिशा में काम किया जा सकता है, जो कई सैटेलाइट से मिली जानकारी का विश्लेषण कर खेत के स्तर पर खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करा सके.(PTI)