महाराष्ट्र में गन्ने पर सूखे की मार: शुगर रिकवरी घटने का डर, 80-85 लाख टन तक सिमट सकता है चीनी उत्पादन

महाराष्ट्र में गन्ने पर सूखे की मार: शुगर रिकवरी घटने का डर, 80-85 लाख टन तक सिमट सकता है चीनी उत्पादन

महाराष्ट्र में बारिश की कमी से गन्ने की बढ़वार प्रभावित हुई है. किसानों को शुगर रिकवरी गिरने का डर है, जबकि पूर्व चीनी आयुक्त संजय भोसले के मुताबिक रिकवरी 10 फीसदी से नीचे जाने की संभावना नहीं है. राज्य का चीनी उत्पादन 80-85 लाख टन तक रहने का अनुमान है.

गन्ने की कीमत तय करने का फार्मूला बदलने की मांग. गन्ने की कीमत तय करने का फार्मूला बदलने की मांग.
रवि कांत सिंह
  • नई दिल्ली,
  • Sep 25, 2026,
  • Updated Sep 25, 2026, 2:41 PM IST

महाराष्ट्र में बारिश की कमी का असर अब गन्ने से लेकर चीनी उत्पादन तक दिखाई देने की आशंका है. राज्य के प्रमुख गन्ना उत्पादक इलाकों में फसल की बढ़वार प्रभावित होने से जहां किसान परेशान हैं, वहीं आगामी पेराई सीजन में शुगर रिकवरी कम रहने की भी आशंका जताई जा रही है. हालात कितने गंभीर होंगे, इसे लेकर किसानों और चीनी क्षेत्र के जानकारों के अनुमानों में अंतर जरूर है, लेकिन दोनों इस बात पर सहमत हैं कि बारिश की कमी से गन्ने की ग्रोथ प्रभावित हुई है और इस बार चीनी उत्पादन कम रह सकता है.

सोलापुर के बड़े गन्ना किसान नामदेव पवार का कहना है कि बारिश नहीं होने की वजह से इस बार गन्ने की बढ़वार रुक गई है. इसका सीधा असर गन्ने की पैदावार के साथ उसकी शुगर रिकवरी पर भी पड़ने की आशंका है. पवार का अनुमान है कि महाराष्ट्र में कुछ इलाकों में चीनी की रिकवरी गिरकर करीब 8 फीसदी तक पहुंच सकती है, जबकि सामान्य तौर पर रिकवरी करीब 11 फीसदी रहती है.

गन्ना तैयार नहीं तो रिकवरी कहां से आएगी?

नामदेव पवार के मुताबिक गन्ने की फसल की स्थिति कई इलाकों में इतनी खराब है कि किसान इसे मवेशियों के चारे के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं. पर्याप्त पानी नहीं मिलने से पौधे की इतनी बढ़वार नहीं हुई और गन्ना कमजोर रह गया है.

पवार के अनुसार महाराष्ट्र के सांगली और कोल्हापुर जैसे बेहतर गन्ना उत्पादक इलाकों में एक एकड़ से 100 टन तक उत्पादन मिल जाता है. इसके विपरीत सोलापुर और उस्मानाबाद जैसे इलाकों में मौजूदा परिस्थितियों में प्रति एकड़ 30 टन उत्पादन हासिल करना भी मुश्किल हो रहा है.

उनका कहना है कि जिन क्षेत्रों में थोड़ी बेहतर बारिश हुई, वहां स्थिति तुलनात्मक रूप से ठीक है. उदाहरण के लिए सातारा में गन्ने की स्थिति कुछ बेहतर बताई जा रही है. लेकिन कम बारिश वाले इलाकों में किसानों के सामने उत्पादन और रिकवरी, दोनों को लेकर चिंता बनी हुई है.

क्या 8 फीसदी तक गिर सकती है शुगर रिकवरी?

किसानों की ओर से रिकवरी में बहुत बड़ी गिरावट की आशंका जताई जा रही है, लेकिन महाराष्ट्र के पूर्व चीनी आयुक्त संजय भोसले का आकलन इससे अलग है. भोसले भी मानते हैं कि इस बार शुगर रिकवरी कम रहेगी, लेकिन उनके मुताबिक इसके 10 फीसदी से नीचे जाने की संभावना नहीं है.

भोसले का कहना है कि गन्ने की बढ़वार प्रभावित हुई है, इसलिए रिकवरी रेट पर असर पड़ना स्वाभाविक है. करीब तीन महीने तक पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण गन्ना उम्मीद के मुताबिक विकसित नहीं हुआ. फरवरी के बाद गन्ना बेल्ट में बारिश की कमी से उत्पादन पर भी गंभीर असर पड़ा है.

उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में लगभग 10 फीसदी रिकवरी को भी तुलनात्मक रूप से ठीक माना जा सकता है.

इस तरह रिकवरी को लेकर दो अलग-अलग आकलन सामने आ रहे हैं. किसान नामदेव पवार गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्रों में इसे 8 फीसदी तक पहुंचने की आशंका जता रहे हैं, जबकि संजय भोसले का मानना है कि राज्य की रिकवरी 10 फीसदी से नीचे नहीं जाएगी.

इथेनॉल डायवर्जन का भी रिकवरी से कनेक्शन

संजय भोसले ने शुगर रिकवरी के आकलन में इथेनॉल डायवर्जन को भी अहम बताया है. उनके मुताबिक अगर चीनी से बड़े पैमाने पर इथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्जन होता तो दर्ज रिकवरी रेट और नीचे जा सकता था.

उनका कहना है कि इस बार तेल कंपनियों की ओर से शुगर इंडस्ट्री से इथेनॉल की मांग सीमित रहने की संभावना है और मक्का और ज्वार जैसे अनाज से इथेनॉल उत्पादन पर अधिक फोकस किया जा रहा है. ऐसे में चीनी का इथेनॉल के लिए डायवर्जन कम रहने पर शुगर रिकवरी के आंकड़े को कुछ सहारा मिल सकता है.

यानी गन्ने की क्वालिटी और बढ़वार रिकवरी को नीचे खींच सकती है, लेकिन कम डायवर्जन इसके आंकड़े को बहुत तेजी से गिरने से बचा सकता है.

चीनी उत्पादन 80-85 लाख टन तक रहने का अनुमान

कमजोर गन्ना उत्पादन का सीधा असर महाराष्ट्र के कुल चीनी उत्पादन पर भी पड़ सकता है. संजय भोसले के मुताबिक इस साल राज्य का चीनी उत्पादन घटकर करीब 80 से 85 लाख टन तक रह सकता है. सामान्य परिस्थितियों में महाराष्ट्र में करीब 100 से 110 लाख टन चीनी उत्पादन होने की बात कही गई है.

इस लिहाज से सामान्य स्तर के मुकाबले उत्पादन में बड़ी गिरावट की आशंका बनती दिखाई दे रही है. हालांकि वास्तविक उत्पादन कितना रहेगा, यह उपलब्ध गन्ने, उसकी क्वालिटी, पेराई और पूरे सीजन की औसत रिकवरी पर निर्भर करेगा.

चीनी मिलों का पेराई सीजन भी हो सकता है छोटा

गन्ने की कमी का असर सिर्फ किसानों और चीनी उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा. इससे चीनी मिलों के पेराई सीजन की अवधि भी प्रभावित हो सकती है. नामदेव पवार का दावा है कि पर्याप्त गन्ना नहीं मिलने की स्थिति में कई कारखानों के सामने लंबे समय तक पेराई जारी रखने की चुनौती होगी.

उनके मुताबिक सामान्य रूप से करीब चार महीने चलने वाला पेराई सीजन प्रभावित क्षेत्रों में काफी छोटा हो सकता है. अगर खेतों से मिलों तक पर्याप्त गन्ना नहीं पहुंचता है तो पेराई बंद करने की नौबत जल्दी आ सकती है.

फिलहाल महाराष्ट्र के गन्ना क्षेत्र की सबसे बड़ी चिंता प्रति एकड़ घटती पैदावार और शुगर रिकवरी है. किसान जहां प्रभावित इलाकों की जमीनी स्थिति के आधार पर रिकवरी में बड़ी गिरावट देख रहे हैं, वहीं चीनी उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ इसे 10 फीसदी के आसपास रहने का अनुमान लगा रहे हैं. आने वाला पेराई सीजन साफ करेगा कि बारिश की कमी ने महाराष्ट्र के गन्ने और चीनी उद्योग को वास्तव में कितना नुकसान पहुंचाया है.

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