
महाराष्ट्र के धाराशिव जिले में सूखे और खराब मौसम का असर सोयाबीन की फसल पर साफ दिखाई देने लगा है. धाराशिव तालुका के कोंड गांव में किए गए फसल कटाई प्रयोग में बेहद चौंकाने वाला परिणाम सामने आया. किसान संगीता भागवत पतंगे के खेत में 10×5 मीटर के क्षेत्र से सिर्फ 40 ग्राम सोयाबीन का उत्पादन मिला. इसके आधार पर प्रति हेक्टेयर उत्पादन करीब 8 किलो ही रहने का अनुमान लगाया गया है. खास बात यह है कि खेत में कुएं की सुविधा होने के बावजूद फसल की हालत बेहद खराब रही.
किसानों के लिए सोयाबीन की यह स्थिति बड़ी चिंता का कारण है. आम तौर पर एक हेक्टेयर में करीब 70 से 75 किलो सोयाबीन बीज की जरूरत होती है. फसल तैयार करने में किसानों का खर्च भी करीब 65 हजार रुपये तक पहुंच जाता है. लेकिन कोंड गांव में हुए फसल कटाई प्रयोग में प्रति हेक्टेयर उत्पादन महज 8 किलो रहने का अनुमान सामने आया है. इस आंकड़े से अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसानों को इस साल कितने बड़े नुकसान का सामना करना पड़ सकता है. जिस फसल से किसान अपनी लागत निकालने और आमदनी की उम्मीद कर रहे थे, उसी फसल में उत्पादन बेहद कम रह गया है.
धाराशिव जिले में सोयाबीन की फसल को देखकर पहली नजर में खेत हरे दिखाई दे रहे हैं. लेकिन फसल के अंदर की स्थिति काफी खराब है. कई खेतों में सोयाबीन के पौधों पर फलियां ही नहीं बनी हैं. जहां फलियां बनी हैं, वहां भी कई जगह दाने नहीं बनने की बात सामने आ रही है. किसानों के मुताबिक फसल की बढ़वार के दौरान मौसम अनुकूल नहीं रहा. बारिश में लंबे अंतराल के कारण फसल पर असर पड़ा. कई जगह पौधों की बढ़वार रुक गई और बाद में बारिश या मौसम में बदलाव का भी फसल को पर्याप्त फायदा नहीं मिला. इसका सीधा असर फलियों और दानों के बनने पर पड़ा है.
कोंड गांव में जिस खेत में फसल कटाई प्रयोग किया गया, वहां सिंचाई के लिए कुएं की सुविधा भी मौजूद थी. फसल को कुछ मात्रा में पानी भी दिया गया था. इसके बावजूद सोयाबीन का उत्पादन इतना कम रहा कि अधिकारियों और किसानों के सामने सूखे की गंभीर स्थिति की तस्वीर साफ हो गई. ऐसे में जिन इलाकों में खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर है, वहां स्थिति और भी खराब होने की आशंका जताई जा रही है. धाराशिव के कई किसान इस समय बारिश और फसल की स्थिति को लेकर चिंता में हैं.
फसल कटाई प्रयोग के दौरान धाराशिव तालुका के कोंड गांव में विधायक राणाजगजीतसिंह पाटील भी मौजूद रहे. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि खेत से मिले बेहद कम सोयाबीन उत्पादन को फसल कटाई प्रयोग की रिपोर्ट में साफ तौर पर दर्ज किया जाए. उन्होंने कहा कि फसल कटाई प्रयोग सिर्फ आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं है. इसके जरिए खेत में वास्तव में कितना उत्पादन हुआ और किसानों को कितना नुकसान हुआ, इसकी जानकारी सामने आती है. यही आंकड़े आगे सरकारी मदद और मुआवजे के लिए महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के धाराशिव दौरे से पहले विधायक पाटील ने क्षेत्र के खेतों का दौरा किया और फसलों की स्थिति का जायजा लिया. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के सामने जिले में सूखे की वास्तविक स्थिति और किसानों के नुकसान की जानकारी रखी जाएगी. विधायक के मुताबिक कोंड गांव में फसल कटाई प्रयोग से सामने आया 40 ग्राम का उत्पादन किसानों की स्थिति को समझने का एक बड़ा उदाहरण है. उन्होंने कहा कि जिले के दूसरे हिस्सों में भी फसल की स्थिति और किसानों के नुकसान का आकलन जरूरी है.
राणाजगजीतसिंह पाटील ने किसानों के लिए तत्काल मुआवजा, प्रभावी फसल बीमा सहायता और चारे-पानी की व्यवस्था की जरूरत बताई. उन्होंने कहा कि सूखे की स्थिति में किसानों के सामने सिर्फ फसल का नुकसान नहीं होता, बल्कि पशुओं के लिए चारा और पानी की समस्या भी खड़ी हो जाती है. उन्होंने किसानों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत पर भी जोर दिया, ताकि फसल खराब होने की स्थिति में ग्रामीण परिवारों को आय का दूसरा सहारा मिल सके.
विधायक ने किसानों से अपील की कि जब उनके खेत में फसल कटाई प्रयोग किया जाए तो वे खुद भी मौके पर मौजूद रहें. इससे फसल की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी और आंकड़ों को सही तरीके से दर्ज किया जा सकेगा. कोंड गांव में सामने आया सोयाबीन उत्पादन का आंकड़ा धाराशिव में सूखे और खराब मौसम से फसल पर पड़े असर की गंभीर तस्वीर दिखाता है. अब किसानों की नजर सरकार की ओर से मिलने वाली राहत, फसल बीमा और मुआवजे पर है. (गणेश सुभाष जाधव का इनपुट)
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