
आंध्र प्रदेश सरकार सूखे से प्रभावित रायलसीमा क्षेत्र को दुनिया के बड़े बागवानी केंद्रों में बदलने की तैयारी कर रही है. मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि रायलसीमा को एक ‘ग्लोबल फ्रूट बाउल’ के रूप में विकसित किया जाए. इसके लिए बागवानी फसलों, किसानों, खाद्य प्रसंस्करण और बाजार को एक साथ जोड़ने की योजना बनाई जा रही है.
सरकार की योजना के तहत रायलसीमा इंटीग्रेटेड हॉर्टिकल्चर हब को 10 जिलों में विकसित किया जाएगा. इसके लिए कुल 201 क्लस्टर बनाए जाएंगे. सरकार का उद्देश्य ऐसा बागवानी सिस्टम तैयार करना है, जिससे आंध्र प्रदेश के फल और दूसरी बागवानी फसलें देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच सकें. मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित हॉर्टिकल्चर हब की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को इसके काम में तेजी लाने के निर्देश दिए.
रायलसीमा को बागवानी हब बनाने के लिए करीब 1 लाख करोड़ रुपये के विकास कार्य किए जाएंगे. यह काम पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल के तहत होगा. इसमें सरकार करीब 40,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी, जबकि निजी क्षेत्र की ओर से करीब 60,000 करोड़ रुपये लगाए जाएंगे. सरकार का मानना है कि इस निवेश से बागवानी, खाद्य प्रसंस्करण, भंडारण और मार्केटिंग से जुड़े कई क्षेत्रों को बढ़ावा मिलेगा. इससे किसानों के लिए बाजार और रोजगार के नए अवसर भी बन सकते हैं.
आंध्र प्रदेश में 2 अक्टूबर को अन्नमय्या जिले के मदनपल्ले में इंटीग्रेटेड हॉर्टिकल्चर हब कार्यक्रम शुरू किया जाएगा. इसी दौरान इंडियन स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर की आधारशिला भी रखी जाएगी. इस पहल का मकसद बागवानी के क्षेत्र में नई तकनीक और बेहतर खेती के तरीकों को बढ़ावा देना है. सरकार चाहती है कि किसान बेहतर उत्पादन के साथ अपनी उपज को बड़े बाजारों तक पहुंचा सकें.
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि रायलसीमा लंबे समय तक सूखे और बारिश की कमी से प्रभावित रहा है. अब क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा बढ़ाने के लिए कई योजनाओं पर काम किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि माइक्रो इरिगेशन, हैंद्री-नीवा और गालेरु-नगरी परियोजनाओं के जरिए क्षेत्र में पानी पहुंचाया जा रहा है. इसके अलावा खेतों में फार्म पॉन्ड और चेक डैम भी बनाए जा रहे हैं. मुख्यमंत्री के मुताबिक हैंद्री-नीवा नहर के जरिए करीब 660 किलोमीटर तक कुप्पम में पानी पहुंचाया गया है. इससे सूखे क्षेत्र में खेती के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है.
सरकार की योजना सिर्फ फल और सब्जियां उगाने तक सीमित नहीं है. 201 क्लस्टर में बागवानी फसलों के साथ किसान उत्पादक संगठन यानी FPO, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और मार्केटिंग सिस्टम को भी जोड़ा जाएगा. नायडू ने अधिकारियों को FPO को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं. इन्हें क्लस्टर, विधानसभा क्षेत्र, जिला और राज्य स्तर पर मजबूत किया जाएगा. किसानों को भी ज्यादा संख्या में FPO बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि वे मिलकर अपनी फसल बेच सकें और बाजार में बेहतर तरीके से अपनी उपज पहुंचा सकें.
मुख्यमंत्री ने कहा कि रायलसीमा अब सूखे की समस्या को अवसर में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. क्षेत्र में ऑटोमोबाइल और डिफेंस समेत कई उद्योग आने से औद्योगिक विकास हुआ है. अब सरकार बागवानी को आर्थिक विकास के अगले बड़े क्षेत्र के रूप में देख रही है. सरकार का लक्ष्य है कि खेती और बागवानी से जुड़े कारोबार को बढ़ावा देकर किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जाए.
बैठक में कृषि पर अल नीनो के संभावित असर को कम करने के उपायों की भी समीक्षा की गई. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को वैकल्पिक फसल योजना तैयार करने के निर्देश दिए. इसमें फसल के उत्पादन, खपत और बाजार में उसकी मांग को ध्यान में रखने को कहा गया है. सरकार केंद्र से चना, उड़द, मूंग, अरहर, रागी, मक्का, ज्वार और प्याज जैसी फसलों की खेती और खरीद को लेकर भी बात करेगी. इसके साथ ही इन फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी.
मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग को AI आधारित सिस्टम का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए हैं. इसके जरिए अलग-अलग क्षेत्रों में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि वहां कौन सी फसल किसानों और उपभोक्ताओं के लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकती है. इस सिस्टम में उत्पादन, खपत और बाजार से जुड़े आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाएगा. सरकार का कहना है कि इससे किसानों को सही फसल चुनने में मदद मिल सकती है और बाजार में कीमतों में अचानक बढ़ोतरी को रोकने के लिए भी बेहतर योजना बनाई जा सकेगी. (PTI)
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