
जलवायु जोखिम के बढ़ते दबाव के बीच खेती को लेकर पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बुधवार साफ कहा कि आने वाले समय में खेती का आधार इनोवेशन और टेक्नोलॉजी होगा, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस किसानों को बेहतर फैसले लेने में सक्षम बनाएगा. उन्होंने कहा कि जमीन की समझ के साथ अब डेटा की ताकत जोड़ना जरूरी हो गया है. आईआईटी रोपड़ में आयोजित स्मार्ट एग्री समिट 2026 के दौरान खेती में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल पर जानकारी सामने आई.
यहां Annam.AI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने कृषि क्षेत्र में एआई आधारित समाधान को जमीनी स्तर तक ले जाने पर जोर दिया. संस्था का फोकस रिसर्च और तकनीक को सीधे खेतों तक पहुंचाकर किसानों की वास्तविक समस्याओं का समाधान करना है. इसी कड़ी में देश में वेदर इंटेलिजेंस नेटवर्क विकसित करने की शुरुआत की गई है, जिसकी पहली तैनाती पंजाब में हो रही है.
इसके तहत 100 एडवांस्ड वेदर स्टेशनों को लगाने की योजना है. ये एआई आधारित स्टेशन खेत स्तर पर रियल टाइम और हाइपरलोकल मौसम डेटा उपलब्ध कराएंगे, जिससे किसान बुवाई, सिंचाई और फसल सुरक्षा से जुड़े फैसले ज्यादा सटीक तरीके से ले सकेंगे.
इस पहल का मकसद मौसम से जुड़े जोखिम को कम करना और उत्पादन क्षमता को बढ़ाना है. साथ ही इसे एक ऐसे मॉडल के रूप में तैयार किया जा रहा है, जिसे आगे चलकर देशभर में लागू किया जा सके. तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल के लिए स्किलिंग पर भी फोकस रखा गया है. Annam.AI की ओर से 10 हजार छात्रों, ग्रामीण युवाओं और एग्री प्रोफेशनल्स को एआई की ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि खेत स्तर पर टेक्नोलॉजी को समझने और लागू करने वाली मजबूत टीम तैयार हो सके.
इससे पहले बीते हफ्ते मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भी पंजाब कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित किसान मेले से साफ किया कि पारंपरिक खेती अब सीमित लाभ दे रही है, इसलिए किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए एआई आधारित तकनीकों को तेजी से अपनाना जरूरी है. उन्होंने कहा कि हरित क्रांति के बाद संसाधनों पर दबाव बढ़ा है, ऐसे में डेटा और तकनीक के सहारे ही खेती को टिकाऊ बनाया जा सकता है.
सरकार की पहल के तहत किसानों को दिन में सिंचाई के लिए बिजली दी जा रही है और गन्ने पर 416 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान किया जा रहा है. नहर सिंचाई का दायरा भी तेजी से बढ़ाया गया है. साथ ही बागवानी को बढ़ावा देने और महिलाओं को आर्थिक सहायता देने की योजनाएं भी लागू की जा रही हैं, ताकि खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके. (एजेंसी)