
क्रिसिल की हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अगले वित्त वर्ष (FY27) में भारत की ट्रैक्टर बिक्री में 0–2 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिल सकती है. अनुमान है कि कुल बिक्री करीब 12 लाख यूनिट पर सीमित रह सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले महीनों में अल नीनो पैटर्न कृषि गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है, जिसका सीधा असर ट्रैक्टरों की मांग पर पड़ेगा.
अल नीनो के प्रभाव से सूखा पड़ने और फसल चक्र बाधित होने की संभावना जताई गई है. इससे खेती-किसानी का काम प्रभावित होगा और ग्रामीण मांग धीमी पड़ सकती है. CRISIL के अनुसार यह प्रभाव FY27 की दूसरी छमाही में और अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है.
अभी ट्रैक्टर के दाम स्थिर बने हुए हैं और निकट भविष्य में कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना कम है. विश्लेषकों का मानना है कि दाम स्थिर रहने से कुछ हद तक मांग को सहारा मिल सकता है, लेकिन पूरे बाजार पर मॉनसून की स्थिति निर्णायक भूमिका निभाएगी. अगर मॉनसून सामान्य रहा, तो बिक्री में बढ़त संभव है.
22 सितंबर 2025 से ट्रैक्टर पर जीएसटी दर 12% से घटाकर 5% कर दी गई थी. इस वजह से चालू वित्त वर्ष में बिक्री को बढ़ावा मिला है. जीएसटी में कटौती से पहली बार खरीदारों की संख्या बढ़ी है. किसान पुराने ट्रैक्टरों की जगह नए मॉडल खरीद रहे हैं. अभी देश के जलाशयों में पर्याप्त पानी भरा हुआ है, जो अगली फसल को सहारा देगा और वित्त वर्ष 27 की शुरुआती छमाही में ट्रैक्टर बाजार को थोड़ा स्थिर रख सकता है.
छोटे जोत वाले किसानों में भी ट्रैक्टर की मांग बढ़ी है, क्योंकि ट्रैक्टर अब सिर्फ जुताई के लिए नहीं, बल्कि खेत की तैयारी, सिंचाई, ढुलाई, फसल प्रबंधन जैसे कई कामों में इस्तेमाल किया जा रहा है. खेती के इन सभी काम को देखते हुए किसान बड़ी संख्या में ट्रैक्टरों की खरीद कर रहे हैं.
क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, अभी ट्रैक्टर बिक्री का 60–65 फीसद हिस्सा पुराने ट्रैक्टरों के रिप्लेसमेंट का है. यानी किसान अपने पुराने ट्रैक्टरों को बेचकर नया ट्रैक्टर अधिक खरीद रहे हैं. 35–40 परसेंट हिस्सा पहली बार खरीदने वालों का है.
परिवहन मंत्रालय की ओर से प्रस्तावित TREM-V एमिशन नॉर्म्स ट्रैक्टर उद्योग पर बड़ा असर डाल सकते हैं. अगर प्रस्ताव पास होता है, तो 1 अक्टूबर 2026 से 25 HP से नीचे और 75 HP से ऊपर के ट्रैक्टर बदलने अनिवार्य हो जाएंगे. इससे ट्रैक्टरों के दाम में 15–20 परसेंट तक की बढ़ोतरी संभव है, क्योंकि कंपनियों को इंजन के नए वर्जन लॉन्च करने होंगे.