संसद में शिवराज सिंह चौहान का दावा—सरकारी योजनाओं से कई किसानों की आय दोगुनी

संसद में शिवराज सिंह चौहान का दावा—सरकारी योजनाओं से कई किसानों की आय दोगुनी

लोकसभा में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि एमएसपी पर रिकॉर्ड खरीद, पीएम-आशा, फसल बीमा और भावांतर जैसी योजनाओं के जरिए कई किसानों की आय दोगुनी हुई है. सरकार ने लागत से 50% अधिक MSP लागू करने, दलहन-तिलहन की खरीद बढ़ाने और मार्केट इंटरवेंशन स्कीम के माध्यम से किसानों को मूल्य सुरक्षा देने पर जोर दिया है.

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संसद में शिवराज सिंह चौहान का दावा—सरकारी योजनाओं से कई किसानों की आय दोगुनीकृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को लोक सभा में स्पष्ट कहा कि एनडीए सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर रिकॉर्ड खरीदी, पीएम‑आशा, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, भावांतर भुगतान और मार्केट इंटरवेंशन स्कीम जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से किसान की आय को मजबूत सुरक्षा‑कवच मुहैया कराया है और कई किसानों की आय दोगुनी हुई है.

लोक सभा में सांसदों द्वारा पूछे गए अलग-अलग प्रश्नों के उत्तर देते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने और उनके हितों की रक्षा के लिए सरकार ने बीते वर्षों में कई कदम उठाए हैं. उन्होंने बताया कि कृषि उत्पादन में लगभग 44 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है और किसानों की उत्पादकता और आमदनी को समानांतर रूप से बढ़ाने का बड़ा अभियान चलाया गया है. 

उत्पादन लागत पर 50 प्रतिशत लाभ

चौहान ने कहा कि पहले की सरकारों के समय स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के नाम पर सिर्फ बहाने बनाए गए, यहां तक कि यह तक कहा गया कि लागत से 50 प्रतिशत अधिक एमएसपी देने से बाजार बिगड़ जाएगा. इसके विपरीत, एनडीए सरकार ने उत्पादन लागत पर 50 प्रतिशत लाभ को ध्यान में रखकर न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने का निर्णय लिया और लगातार उसे लागू किया है, जिससे किसान को उसकी मेहनत का बेहतर रिजल्ट मिल सका है.

शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि केवल एमएसपी घोषित कर देना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उस पर वास्तविक खरीदी कराना ज्यादा महत्वपूर्ण है, और इस दिशा में सरकार ने गेहूं, धान, दलहन और तिलहन के साथ‑साथ कई फसलों की एमएसपी पर रिकॉर्ड खरीदी कर किसानों को सीधा लाभ पहुंचाया है. उन्होंने कहा कि यह सरकार सिर्फ अनाज तक सीमित नहीं रही, बल्कि दलहन, तिलहन, फल और सब्जियों तक के लिए भी सक्रिय हस्तक्षेप कर रही है, ताकि किसी भी फसल के दाम गिरने पर किसान को नुकसान न उठाना पड़े.

प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान

चौहान ने बताया कि प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान– पीएम‑आशा योजना एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके अंतर्गत उन फसलों को सुरक्षा दी जाती है जिनके दाम अक्सर एमएसपी के नीचे चले जाते हैं. उन्होंने कहा कि पीएम‑आशा के तहत तीन प्रकार की व्यवस्थाएं बनाई गई हैं– प्राइस सपोर्ट स्कीम के माध्यम से दलहन और तिलहन की सीधी खरीद, मूल्य‑अंतर भुगतान व्यवस्था के ज़रिए एमएसपी और बाजार भाव के बीच की खाई को पाटना, और जरूरत पड़ने पर अन्य माध्यमों से भी किसानों को संरक्षण देना.

महाराष्ट्र के बारे में पूछे गए प्रश्न पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने बताया कि हाल की प्राकृतिक आपदाओं के समय राज्य सरकार ने केंद्र की नीति‑समर्थित डिजिटल व्यवस्था का भरपूर उपयोग किया और मात्र पांच दिनों के भीतर फार्मर आईडी के माध्यम से 14,000 करोड़ रुपये सीधे किसानों के खाते में भेजकर फौरी राहत पहुंचाई. 

भावांतर स्कीम से किसानों को लाभ

चौहान ने सोयाबीन सहित दलहन और तिलहन की फसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि दाम गिरने की स्थिति में सरकार केवल खरीद पर निर्भर नहीं रहती, बल्कि भावांतर जैसी व्यवस्था के माध्यम से एमएसपी और बाजार भाव के बीच की पूरी की पूरी राशि सीधे किसान के खाते में डालने का विकल्प भी अपनाती है. उन्होंने मध्य प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भावांतर भुगतान योजना के जरिए बिना लाइन में लगवाए, बिना अतिरिक्त लॉजिस्टिक लागत के, किसानों की आय को सुरक्षा दी गई है.

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि सरकार ने मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (एमआईएस) के माध्यम से जल्दी खराब होने वाले फल और सब्जियों के लिए भी एक मॉडल रेट तय कर, या तो सीधे खरीद की व्यवस्था की है या फिर मॉडल रेट और बाजार भाव के अंतर को किसान के खाते में जमा करने का निर्णय किया है. अंगूर, मिर्च, आलू, प्याज़, टमाटर जैसी उत्पादों के बारे में उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसानों के क्षेत्र में दाम बहुत कम हों और किसान अपना माल बड़े शहरों की मंडियों तक ले जाना चाहें, तो ऐसे मामलों में परिवहन लागत तक का भार केंद्र सरकार उठा रही है, जिससे किसान दूर की मंडियों में बेहतर दाम पा सकें.

लोक सभा में जवाब देते हुए शिवराज सिंह चौहान ने दोहराया कि किसान का पूरा उत्पाद ढंग से खरीदा जाए, इसके लिए एफसीआई, नेफेड, राज्य सरकारों की एजेंसियां और अन्य संस्थाएं एक साथ काम कर रही हैं और जहां जितने खरीद केंद्रों की जरूरत है, वहां उसी के अनुसार केंद्र खोले जा रहे हैं.

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